यह जीवन की गरीबी और दरिद्रता का प्रमाण है कि न जोश है, न जज़्बा, न सामर्थ्य, न ईमानदारी। तो ट्विटर पर अफवाहें फैलाना, गाली-गलौज करना ही पेशा बन गया है। घर का लंगड़ा कुत्ता भी बात नहीं मानता और कुछ करने को भी नहीं है, तो खोलो ट्विटर! जो समय गाली-गलौज और दुष्प्रचार में बर्बाद कर रहे हो, उसे शिक्षा हासिल करने में लगाओ। बहुत कुछ है जो पढ़ सकते हो, जान सकते हो। जीवन को सार्थक लक्ष्य से भरो, फिर या तो सोशल मीडिया के लिए वक्त नहीं रहेगा या फिर उसका सदुपयोग करोगे, दुरुपयोग नहीं।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: मैंने देखा है कि मेरे आसपास के सब यार दोस्त लोग जिनका दुनिया में मुँह भी नहीं खुलता, कुछ तो बहुत ही औसत स्तर के हैं, कुछ ऐसे हैं जो फिसड्डी से भी हैं; यह सब लोग ट्विटर और रेडिट वगैरह पर जाकर जाँबाज़ योद्धा और सूरमा हो जाते हैं। खूब लड़ते हैं एकदम जोश में, ये क्या है?
आचार्य प्रशांत: ये वही है जो तुम समझ ही रही हो और मेरे मुँह से कहलवाना चाहती हो। ज़िन्दगी में चूँकि कुछ कर पाने का न जोश है, न जज़्बा, न सामर्थ्य, न ईमानदारी; तो जाकर के यूँ ही पहुँच गए और ट्विटर पर किसी को गरिया दिया।
कई लोग तो ऐसे होते हैं कि एक-एक दिन में आठ-आठ, दस-दस ट्वीट हैं और उसके बाद दिन के अस्सी कमेंट् (टिप्पणियाँ) दूसरों के अकाउंट पर जा जाके। खास तौर पर ट्विटर तो जैसे द्वेष, दुर्भावना और गाली-गलौज का अड्डा बना हुआ है। ट्विटर पर हर आदमी एक घायल योद्धा है। ज़िन्दगी की जिसने बड़ी महान लड़ाइयाँ लड़ी हैं और अब आकर के जीवन भर में उसने जो ज़हर इकट्ठा करा है, उसको उगल रहा है कभी इस अकाउंट पर, कभी उस अकाउंट पर।
अभी कल-परसों मैंने जर्मन विचारक हैं, आर्थर शोपेनहावर, उनको लेकर के एक ट्वीट डाली। जिसमें मैंने जो नीचे चित्र होता है, जो अटैचमेंट (संलग्न) होता है, उसमें मैंने पहले उनको उद्धृत करा है, उनको क़ोट करा है उन्हीं के शब्दों में, जहाँ पर उन्होंने उपनिषदों के बारे में कुछ बोला है, बहुत कुछ बोला। उन्होंने बोला है कि, “मेरे दर्शन पर उपनिषदों का बड़ा गहरा प्रभाव रहा है और उपनिषदों को अगर कोई पढ़ ले तो उसके जीवन में, उसके मन में तमाम तरह की उच्च भावनाओं और विचारों का प्रवाह होगा।“ फिर आगे उन्हीं के शब्दों में उन्होंने कहा है कि, “उपनिषदों ने मुझे जीवन में तो शांति दी ही दी है, मरते वक्त भी यह मुझे शांति प्रदान करेंगे।“




