Inspiring Personalities

Gandhi: An Earthly Journey, Not a Divine Destination
Gandhi: An Earthly Journey, Not a Divine Destination
7 min
Gandhi did not descend from the sky; he rose from the earth. He undertook a laborious and long journey from man to Mahatma. And he rightly said that his life is his message — what was possible for him is possible for all. When someone devotedly moves forward, challenging their past, their tendencies, and their limitations, their presence infuses a unique consciousness into the entire world.
गाँधी जयंती: किससे लड़ें, कहाँ है दुश्मन?
गाँधी जयंती: किससे लड़ें, कहाँ है दुश्मन?
36 min
गाँधी जी ने वास्तव में अंदर वाले दुश्मन से लोहा लिया था। बहुत साधारण कद-काठी के थे, कोई ऐसा ऐब नहीं जो साधारण आदमी में होता हो और उनमें ना हो, पर ये महात्मा कहलाए, गीता को माँ बोला। एक कमज़ोर मन का व्यक्ति इतना दृढ़ बन गया कि जब वह उपवास करने बैठते थे, तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया काँप जाती थी और चर्चिल के पसीने छूट जाते थे। वह उपवास पर बैठ गए तो बैठ गए और लोगों को उनकी बात सुननी पड़ती थी। औसत स्तर से उठकर इतना मजबूत बन जाना, मेरे ख्याल से सबको उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
[गाँधी जयंती विशेष] मत मानों उनके आदर्शों को, लेकिन उनको एक बार ठीक से पढ़ लो
[गाँधी जयंती विशेष] मत मानों उनके आदर्शों को, लेकिन उनको एक बार ठीक से पढ़ लो
7 min

मैनचेस्टर से जाकर पूछो कि गांधी का वहां क्या नाम था और क्या छवि थी। गांधी कहते थे कि यह सब व्यापारी हैं, सभी पैसे के भूखे हैं। इन्हें भारत से जो पैसा मिल रहा है, भारत को लूट-लूट कर के लंदन मोटा रहा है। मैं भारत की लूट रुकवाऊंगा।

आज भगत सिंह क्यों नहीं पैदा होते?
आज भगत सिंह क्यों नहीं पैदा होते?
39 min
एक क्रांतिकारी को उसकी वीरता के लिए जितना श्रेय मिलता है, उससे ज़्यादा श्रेय उसकी माँ को मिलना चाहिए। माँ चाहिए, जो बताए बेटे को कि तुम वो हो, जो शरीर के जाने के बाद भी नहीं मर सकता; तो मौत से घबराना कैसा? "न हन्यते हन्यमाने शरीरे।" भारत को अगर वीरों का देश बनाना है तो सर्वप्रथम हमने माँ का जो विकृत आदर्श खड़ा कर दिया है, इसको ढहाना पड़ेगा।
डर और मुक्ति || आचार्य प्रशांत, मारिया रिल्के पर (2013)
डर और मुक्ति || आचार्य प्रशांत, मारिया रिल्के पर (2013)
19 min
एक से मुक्त होओगे तो दूसरे के पास चले जाओगे। ये कोई मुक्ति नहीं है, एक से मुक्त होकर के दूसरे की ओर आकर्षित हो जाना कोई मुक्ति नहीं है। और जब भी एक से मुक्ति की बात करोगे, तो दूसरे की ओर आकर्षित होओगे ही होओगे, क्योंकि तुम्हारी मुक्ति किसी संदर्भ में है।
आइन रैंड की द फाउन्टेनहेड पर || आचार्य प्रशांत (2019)
आइन रैंड की द फाउन्टेनहेड पर || आचार्य प्रशांत (2019)
3 min

प्रश्नकर्ता: बहुत से लोग हैं जो फाउंटेनहेड पढ़कर जीवन में कोई बदलाव नहीं ला पाते हैं। और दूसरी तरफ़ बहुत ऐसे भी लोग हैं जो इस पुस्तक को पढ़ने के बाद विद्युतीकृत हो जाते हैं। आचार्य जी मैं दूसरे लोगों की श्रेणी में आने के लिए क्या कर सकता हूँ?

Why Is Gandhi Ji Being Abused by Indians?
Why Is Gandhi Ji Being Abused by Indians?
24 min
Those abusing Gandhi Ji are least interested in him—they try to achieve something, and Gandhi Ji stands in the way. If one wants to create a society that is highly illiberal and deeply fractured on communal lines, then the symbol of liberalism and communal harmony has to be abused. Gandhi Ji is not just a person but a thought. Gandhi Ji was killed once, and that didn't suffice. Now, he’s being killed in abusive ways, yet some things cannot be killed.
क्रांतिकारी भगत सिंह और आज के युवा
क्रांतिकारी भगत सिंह और आज के युवा
19 min
जिस उम्र में हम अपने-आपको दुधमुँहा बच्चा समझते हैं, उस उम्र में भगत सिंह फाँसी पर चढ़ गए थे। और यह कोई किशोरावस्था का साधारण उद्वेग नहीं था; भगत सिंह का ज्ञान गहरा था। जब कोई आम युवा जीवन की चकाचौंध और रंगीनियों के ख़्वाब देखता है, उस समय भगत सिंह अपने जीवन की निजी माँगों से बहुत आगे जा चुके थे। जवान हो, तो जीने का एक ही तरीक़ा है - किसी बहुत ऊँचे उद्देश्य को समर्पित हो जाओ। नहीं तो समस्याएँ, वासनाएँ, अतृप्तियाँ, समय की बर्बादी और फिर निराशाएँ घेरेंगी।
भगत सिंह: एक निष्काम कर्मयोगी
भगत सिंह: एक निष्काम कर्मयोगी
26 min
ये भगत सिंह हैं, जिन्होंने मुक़दमे और फाँसी की सज़ा के बाद कहा, 'मैं कोई खास नहीं हूँ; मेरे सीमित जीवन का मूल्य ही कितना है? मेरा जीवन शायद देश की उतनी सेवा न कर पाए, जितनी मेरी मृत्यु करेगी।' उनके लिए उनका ध्येय सर्वोपरि था—उच्च और महान। उन्होंने कहा, 'अगर मेरे जैसे पाँच सौ लोग भी इस ध्येय के लिए बलिदान हो जाएँ, तो क्या फ़र्क पड़ता है?' यह मात्र एक निष्काम कर्मयोगी का ही वक्तव्य हो सकता है।
A Life Like Bhagat Singh's
A Life Like Bhagat Singh's
5 min
Bhagat Singh was just twenty-three when he laid down his life, yet he remains immortal, while those who lived up to ninety years are just the dust of time. Who cares for them? That's the difference. He had no time for trivial things. Even on the eve of his hanging, he was reading the Bhagavad Gita, and that copy is still preserved. A voracious reader, well-read at a young age, he never wasted time. Does such a life not excite you?
सीखना चाहो तो बहुत सीख सकते हो
सीखना चाहो तो बहुत सीख सकते हो
4 min

आचार्य प्रशांत: खास बात समझो तो उनमें क्या है? देखो, किसी की सीधे-सीधे निन्दा कर देना बहुत आसान होता है। और किसी को देवता बनाकर के उसकी पूजा करने लगना, ये भी आसान ही होता है। पर इंसान को इंसान की तरह देखना और उसका सही मूल्यांकन करना वो ज़रूरी

Maslow’s Hierarchy of Needs Is Flawed
Maslow’s Hierarchy of Needs Is Flawed
6 min
The way Maslow constructed his pyramid is good, but not very exact. The ladder goes like “Food, security, self-esteem, and only then self-actualization.” No, that is not how it actually is. Self-actualization is not the top of the pyramid; it is the foundation of everything that you do; it is the foundation of your activity even when you are fulfilling your lower needs. Whatever you do, your entire universe, all your deeds, thoughts, purposes, motivations—all arises for the sake of actualization.
Why Aren't You Free?
Why Aren't You Free?
15 min
If freedom is important to you, you will secure it, you will get it. Do you love being free? Are you really a free bird? No, you had accepted slavery long back. And then you complain, and then you put up miserable faces, that won’t do. These faces are masks. The one who wants it, gets it.
Ancient Spiritual Practices Relevant Today?
Ancient Spiritual Practices Relevant Today?
16 min
Practices do not determine the core of spirituality; consciousness does. If someone is feeding you practices in the name of spirituality, then that fellow is either ignorant or cunning or both, which is actually the same thing.
चंद्रशेखर आज़ाद
चंद्रशेखर आज़ाद
5 min

🔥 "मेरा नाम 'आज़ाद' है, बाप का नाम 'स्वाधीनता' है और मेरा घर है 'जेल'” 🔥

भगत सिंह ने जब अपना घर छोड़ा, तो चिट्ठी के अंत में लिखा, "मेरी शादी की चिंता मत करना, मेरी दुल्हन आज़ादी है"।

एक ओर, जहाँ दुनिया को ये मुद्दा बड़ा गंभीर

War is what is normal || On Albert Camus (2017)
War is what is normal || On Albert Camus (2017)
4 min

“There’s always been war, But people quickly get accustomed to peace. So they think it’s normal. No, war is what’s normal.”

~ Albert Camus

Questioner: Acharya Ji, which ‘war’ is Albert Camus referring to?

Acharya Prashant: The questioner has asked that Albert Camus has said that ‘war’ is what is

Why is freedom from desire so very extolled? || On Vivekchudamani (2020)
Why is freedom from desire so very extolled? || On Vivekchudamani (2020)
3 min

Questioner: In The Fountainhead it is said, “I take the only desire one can really permit oneself. Freedom, Alvah, freedom. To ask nothing. To expect nothing. To depend on nothing.”

In the above lines, Ayn Rand has said that freedom is to not expect and depend on the desired outcome.

Bhagat Singh || Neem Candies
Bhagat Singh || Neem Candies
1 min

When his mother asked him, “Why don’t you get married?” Bhagat Singh replied, “I am already married, and her name is Freedom.”

Now, it behooves a Bhagat Singh to not get married to a woman because he has committed himself to freedom, but to every Tom, Dick and Harry it

The act of real rebellion || Acharya Prashant, on Albert Camus (2017)
The act of real rebellion || Acharya Prashant, on Albert Camus (2017)
1 min
तनाव आलस को आमन्त्रण है || आचार्य प्रशांत (2017)
तनाव आलस को आमन्त्रण है || आचार्य प्रशांत (2017)
37 min

प्रश्नकर्ता: न आलस है, न उठा हुआ है, न सोया हुआ, कुछ ऐसा मतलब एक कंफ्यूजन (संशय) है कि क्या ये, ये क्या है? नींद भी है उसमें हल्की सी, जागृति भी है, अब जागृति का तो पता नहीं लेकिन कुछ है, विचार भी नहीं है लेकिन कुछ है। लेकिन

जब लगे कि नाइंसाफ़ी हुई है आपके साथ || आचार्य प्रशांत (2023)
जब लगे कि नाइंसाफ़ी हुई है आपके साथ || आचार्य प्रशांत (2023)
46 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरा पहला प्रश्न ये है, हमनें चोट के बारे में बात कही, तो मैं अपने अनुभव में जो देखती हूँ मुझे ऐसा लगता है कि जब भी मुझे चोट लगती है उसके साथ एक और भाव जो साथ में ही उठता है वो होता है कि

अगर आज होते भगत सिंह || आचार्य प्रशांत (2020)
अगर आज होते भगत सिंह || आचार्य प्रशांत (2020)
11 min

आचार्य प्रशांत: समझ में नहीं आ रहा क्या कि जब भगत सिंह कहते थे कि वो नास्तिक हैं तो वो वास्तव में परंपरागत धर्म, सड़े-गले धर्म, संस्थागत धर्म को नकार रहे थे। नहीं तो एक ऊँचे आदर्श के लिए शरीर की आहुति दे देने से बड़ा धार्मिक काम क्या होगा?

भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कौन? || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2020)
भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कौन? || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2020)
15 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी कल हमने एक वीडियो पब्लिश किया था भगत सिंह के ऊपर, कल जन्मदिन भी था उनका, तो थोड़ा फिर मैंने रिसर्च( शोध) किया इंटरनेट पर उनके बारे में; फिर आपने एक आर्टिकल (लेख) भी फॉरवर्ड किया थाl तो कल मेरे को पहली बार पता लगा कि

बस खाली बैठे हो? || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
बस खाली बैठे हो? || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
4 min

आचार्य प्रशांत: मुझे बिलकुल नहीं समझ आता कि छब्बीस, अट्ठाईस, तीस साल का कोई जवान लड़का या लड़की घर पर बैठकर कैसे खा सकता है, मेरे लिए ये एक भयानक बात है। मैं तो भगत सिंह को जानता हूँ, मैं राजगुरु को जानता हूँ, जो बाईस की उम्र में ही

ताकत चाहिए, आज़ादी चाहिए? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)
ताकत चाहिए, आज़ादी चाहिए? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)
10 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न श्रीमद्भगवद्गीता से है। श्रीकृष्ण कर्मयोग की जब बात करते हैं, तो वो कहते हैं, "निधनं श्रेय:", तो उसका सजीव उदाहरण अगर मैंने कहीं पढ़ा है, या इतिहास में देखा जाए, तो शहीद-ए-आज़म भगतसिंह मुझे उसका बहुत बड़ा उदाहरण दिखते हैं।

तो आज के युवा

रिश्ते और भावनाएँ || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
रिश्ते और भावनाएँ || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
25 min

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, मैं आपको 2014 से लगभग सुन रही हूँ। उस समय बहुत छोटे-छोटे ग्रुप में आप शिक्षा दिया करते थे। तो अचानक से एक दिन वीडियो पॉप-अप हुआ — एंड आई वॉज लिसनिंग (और मैं सुन रही थी) स्वामी सर्व प्रियानंद हावर्ड स्कूल ऑफ डिविनिटी, वहाँ

उनके लिए, जिन्हें ऊँची ज़िन्दगी चाहिए || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश (2022)
उनके लिए, जिन्हें ऊँची ज़िन्दगी चाहिए || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश (2022)
14 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मैंने नवम्बर वाला शिविर अटेंड किया था। वहाँ मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा था विचारों को लेकर। और आपने दो चीज़ें बताईं थीकि एक तो ध्येय आपका सही होना चाहिए और निकटता होनी चाहिए उससे| एक आपने सूत्र भी दिया था कि ध्येय से प्रेम को

नरगिस मोहम्मदी - जीवन वृतांत
नरगिस मोहम्मदी - जीवन वृतांत
3 min

पिछले वर्ष ईरान में 22 वर्षीया 'माशा अमीनी' की ईरानी पुलिस द्वारा हत्या हुई। पूरी दुनिया ने विरोध जताया। माशा ओमिनी का जुर्म क्या था? उसने हिजाब वैसे नहीं पहना था जैसा ईरानी सरकार का आदेश था।

इस बर्बर हत्या के बाद ईरान की सड़कों पर हज़ारों महिलाओं की

आचार्य प्रशांत, आइन रैंड पर (2013)
आचार्य प्रशांत, आइन रैंड पर (2013)
5 min

Man’s basic vice, the source of all his evils, is the act of unfocusing his mind, the suspension of his consciousness, which is not blindness, but the refusal to see, not ignorance, but the refusal to know. Irrationality is the rejection of man’s means of survival and, therefore, a commitment

भगत सिंह - जीवन वृतांत
भगत सिंह - जीवन वृतांत
3 min

भगत सिंह कहते थे "बहरे कानों तक अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए अक्सर धमाकों की ज़रूरत पड़ती है।"

लेकिन उनको कहाँ पता था कि लोगों की स्मृति इतनी कमज़ोर है कि उनके जाने के बाद वे सिर्फ़ उनका 'धमाका' ही याद रखेंगे। और उनको भूल जाएँगे, उनके

धर्म को नशा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत (2015)
धर्म को नशा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत (2015)
3 min

आचार्य प्रशांत: मार्क्स ने कहा था “रिलीजन इज़ द ओपियम ऑफ़ द मासेज़ ”। समझ में आ रहा है क्यों कहा था? क्यों कहा होगा? क्यों कहा होगा? ओपियम माने? नशा, गाँजा। क्यों कहा होगा?

प्रश्नकर्ता: सर, मास फिनोमेना नहीं।

प्र२: सर, लगता है कि जानते नहीं हैं।

आचार्य:

धर्म नशा कैसे? || आचार्य प्रशांत, कार्ल मार्क्स पर (2013)
धर्म नशा कैसे? || आचार्य प्रशांत, कार्ल मार्क्स पर (2013)
1 min

प्रसंग:

धर्म का सही अर्थ क्या है? धर्म क्या है? क्या होश में जीना ही एक मात्र धर्म है? धर्म की प्रासंगिकता क्या है? इंसान को धर्म की आवश्यकता क्यों है? आज के मानव के लिए सच्चे अर्थों में धार्मिक होने के क्या मायने हैं? धर्म को कैसे समझें? कार्ल

सबसे शक्तिशाली प्रार्थना कैसी? || आचार्य प्रशांत, माइस्टर एकहार्ट पर (2013)
सबसे शक्तिशाली प्रार्थना कैसी? || आचार्य प्रशांत, माइस्टर एकहार्ट पर (2013)
1 min

तेरहवीं शताब्दी के जर्मनी के प्रसिद्द दार्शनिक - माइस्टर एकहार्ट द्वारा प्रार्थना से सम्बंधित उक्तियों पर आचार्य प्रशांत जी प्रकाश डालते हुए :

The most powerful prayer, one well nigh omnipotent, and the worthiest work of all is the outcome of a quiet mind. The quieter it is the more

श्री ईश्वरचन्द्र विद्यासागर - जीवन वृतांत
श्री ईश्वरचन्द्र विद्यासागर - जीवन वृतांत
4 min

"मुझे आश्चर्य होता है ये देखकर कि कैसे भगवान ने चार करोड़ बंगालियों को बनाते हुए, एक आदमी को भी जन्म दिया।"

जिस 'आदमी' की बात यहाँ गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर कर रहे हैं, उनके लिए एक बार गांधी जी ने कहा था,

"विद्यासागर की उपाधि उन्हें उनके ज्ञान के लिए

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प्रश्न: आपने कहा कि आज के जितने भी लिबरल चिंतक इत्यादि हैं, वे कोई भी पराभौतिक हस्ती को पूर्णतया नकार देते हैं, और कहते हैं - "जो भी है वह यहीं आँखों के सामने है।" भगत सिंह ने भी कहा, "दुनिया में ईश्वर नाम की कोई चीज़ नहीं है," पेरियार

वासना निर्बल और निराधार क्यों? || आचार्य प्रशांत, रवीन्द्रनाथ टैगोर पर (2018)
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तुम मुझे रोज़मर्रा की निर्बल और निराधार वासना से बचते रहने की शक्ति देते रहो।

~ गीतांजलि

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर, वासना को निर्बल और निराधार क्यों कह रहे हैं?

आचार्य प्रशांत: वासना को रवीन्द्रनाथ निर्बल इसीलिए कह रहे हैं, क्योंकि वासना में बल होता तो वासना उसको पा

The Collective Ego: Why Nations Worship GDP and Fear Wisdom
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Nations were supposed to emerge from the distilled wisdom of a people, yet they end up mirroring the collective ego. What the individual does with net worth, the nation does with GDP, treating what can be counted and compared as proof of worth. We call this sanity, then wonder why both person and country feel perpetually cornered, as if resting were forbidden.
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राष्ट्रों का निर्माण किसी समाज की परिष्कृत बुद्धिमत्ता से होना चाहिए था, लेकिन वे सामूहिक अहंकार का दर्पण बन जाते हैं। व्यक्ति जो अपनी संपत्ति के साथ करता है, राष्ट्र वही GDP के साथ करता है—जो गिना और तुलना किया जा सके, उसे योग्यता का प्रमाण मान लेता है। हम इसे समझदारी कहते हैं, फिर आश्चर्य करते हैं कि व्यक्ति और देश दोनों सदा घिरे हुए क्यों महसूस करते हैं, मानो विश्राम करना निषिद्ध हो।
गोवा त्रासदी: सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन?
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15 min
पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी। इंस्पेक्शन हुआ था गवर्नमेंट एजेंसी से, तो उनको बोला गया था कि भाई, ये सब ठीक करो; उन्होंने ठीक नहीं किया। रेगुलेशंस का उल्लंघन हुआ है, और उसके बाद जो वहाँ चल रहा था, वह बस बेहोशी का समाँ है, उसमें कुछ भी करो। हमारा कोई भी उत्सव हो, समारोह हो, उसका मतलब ही यही होता है कि चेतना को और गिरा दो। हमारे मन में यह बात डाल किसने दी कि सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन? फिर उसी का एक एक्सट्रीम रूप हमें देखने को मिलता है; ये जो पच्चीस-पचास मौतें हो गईं।
The American Dream is India's Nightmare: GDP is Gross
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If you see GDP growing at a fast rate, it is not a matter of celebration; it might actually be a warning. Don’t do that. Slow down. GDP is something that you can increase even with a lot of income inequality, as is happening in the case of countries like India. We need clarity. We need to be extremely clear on the definitions of our national imperatives. If development means the images we have been carrying of the United States, that is unsustainable, just not possible.
महिलाओं में गिल्ट की भावना
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23 min
‘मुझे किसी की फीलिंग्स नहीं हर्ट करनी है। मुझसे मम्मी-पापा के आँसू नहीं देखे जाते। मैं गिल्टी फील करने लगती हूँ।’ गिल्टी फील करना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है लेकिन सही वजह से गिल्टी फील करो न। असली गलती यह है कि आप अपना जीवन व्यर्थ कर रही हैं। न ज्ञान है, न कला है, न कौशल है, न अनुभव है, कुछ नहीं है, दुनिया देखी नहीं है। महिला वग़ैरह आप बहुत बाद में हैं, सबसे पहले आप इंसान हैं और इंसान होने का मतलब ही होता है कि चेतना होना।
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60–65% शेयर है इंडिगो का। आप इंडिगो को सज़ा दे दो, आप बोल दो ‘कल से इंडिगो की उड़ानें बंद,’ तो भारत की दो-तिहाई उड़ानें बंद हो जाएँगी। कौन-सी रेगुलेटरी अथॉरिटी अब इंडिगो को सज़ा दे सकती है? फ्लाइट कैंसल हो गई, तो जो पैसेंजर्स थे, उन्होंने क्रांति कर दी; ऐसे होती हैं क्रांतियाँ? जब जीवन में गीता आती है न, तो जीवन में गरिमा आती है। फिर इंसान कहता है कि ‘मैं आकाश हूँ। मुझे धरती पर ये तिलचट्टा और केंचुआ क्यों बनाया जा रहा है? मुझे मिट्टी में क्यों गाड़ा जा रहा है?’ फिर उठती है क्रांति, भीतर से।
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Speaker: It is an absence. Absence of everything. It an absence of both pleasure and pain, nothing that excites the mind. Joy is not something that you can think of as something wonderful. Joy is nothing that you can conceptualize as being pleasurable. Joy is just

Why Do So Many Relationships Turn Violent?
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"As long as you are giving me pleasure and satisfying my needs, there will be peace. The day you stop, there will be war.” This is the usual social contract in which we exchange pleasures and dependencies. This is why there is a lot of violence. But there can be another way of relating to the other, where you are existentially complete within. There can now be beautiful, loving, compassionate relationships because you are not looking to be a parasite or a commander.
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आत्म-अवलोकन बस ये नहीं है कि बैठे-बैठे कह रहे हैं, 'मैं आत्म-अवलोकन कर रहा हूँ।' सक्रिय रूप से जाकर के पूछो। जैसे, आपने एक फ़िल्म देखी किसी के साथ। तो देखने के बाद आधे घंटे कहीं बैठ जाओ, और कहो, 'अच्छा, मैंने क्या देखा?' 'अच्छा, तुमने क्या देखा?' इससे पता चलता है कि कितने हम पक्षपाती हैं। फ़िल्म हो, समाज हो, घटना हो, जीवन हो, कुछ भी। जिन्हें स्वयं को बढ़ाना है, उनके लिए बहुत-बहुत ज़रूरी है कि वो दूसरों से बात ज़रूर करें। अपने पास सिर्फ़ अपना ही पक्ष नहीं, तीन-चार और पक्ष आने दें।
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इंसान होने का मतलब ही है बहुत कुछ होगा जो तुम्हारे सामर्थ्य से बाहर का होगा। एक चीज़ है तुम्हारे हक़ में। क्या? घटना कुछ भी घट रही हो, उस घटना को उत्तर क्या देना है। तुम्हारा प्रतिसाद, तुम्हारी प्रतिक्रिया, ये तुम्हारे अधिकार में हो सकते हैं। बिल्कुल संभव है कि बाहर बड़ी से बड़ी कठिनाई हो, कष्ट हो; भीतर तुम्हारे एक अस्पर्शित शांति बनी ही रहे। जो ऐसा कर ले गया, वो न सिर्फ़ जी गया, वो जीवन के पार निकल गया। सिर्फ़ उसी का जीवन सार्थक हुआ।
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डॉक्टर अंबेडकर मृत्यु की रात को भी क्या कर रहे थे? वह धर्म पर ही किताब लिख रहे थे, और उन्हें बड़ी हड़बड़ी थी कि इसको पूरा कर दें। तबीयत बहुत ख़राब थी, दिख रहा था कि जाने वाले हैं। उनकी मृत्यु के बाद वह किताब प्रकाशित हुई, ‘The Buddha and His Dhamma.’ वह कोई पॉलिटिकल या इकोनॉमिक्स की किताब नहीं लिख रहे थे। वह धर्म पर लिख रहे थे। जो भारतीय दर्शन रहा है, उसकी सारी खूबियाँ बौद्ध धर्म में ज़बरदस्त तरीके से मौजूद हैं। बौद्ध धर्म तो पूरा ही जिज्ञासा का धर्म है, रूढ़ियों के लिए वहाँ एकदम ही कोई जगह नहीं है।
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There is no compulsion, it's either a slavery you buy into or just an expensive luxury that the rich afford. All this that we are doing: success, marriage, fidelity, money, prestige, whatever, all these are founded on self-ignorance. Somebody tells you, “Go get married, bear kids.” What do you know? You don't know your own birth, and you are giving birth. No point playing blind. Before you start walking, start opening your eyes.
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“I love my job as long as I'm paid for it.” Can you work without being paid? If yes, then probably there is some beginning of love. There are ten things we all like, and all liking or disliking is conditional, and the mark of love is that it survives all conditions. If you come to something that is dearer to you than life itself, then you know what love is. Love is dangerous, because it would mean you have come to something that's more precious to you than life itself.
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अर्थशास्त्र का साधारण-सा सिद्धांत है कि ग्रोथ और डेवलपमेंट एक चीज़ नहीं होते। जीडीपी माने बाहरी तरक़्क़ी: सड़क बन गई, फ़ैक्ट्रियाँ ज़्यादा उत्पादन कर रही हैं, इन सब से जीडीपी बढ़ता है। लेकिन यह अपने-आप में अंत नहीं हो सकता, वह सब तभी तक अच्छा है जब तक उससे इंसान को लाभ हो रहा हो। और इंसान को लाभ हो रहा है कि नहीं, यह जानने के लिए इंसान को पहले यह पता करना पड़ेगा कि वह है कौन? ख़ुद को जानना विकास की दिशा में पहला कदम है। राष्ट्र के विकास का सबसे अच्छा तरीका है, राष्ट्र के लोगों को भीतरी तल पर बेहतर बनाना।