एक से मुक्त होओगे तो दूसरे के पास चले जाओगे। ये कोई मुक्ति नहीं है, एक से मुक्त होकर के दूसरे की ओर आकर्षित हो जाना कोई मुक्ति नहीं है। और जब भी एक से मुक्ति की बात करोगे, तो दूसरे की ओर आकर्षित होओगे ही होओगे, क्योंकि तुम्हारी मुक्ति किसी संदर्भ में है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रेम का अभाव ही डर है।
~ आचार्य प्रशांत
Perhaps everything that frightens us in its deepest essence is something helpless, that needs our love.
~ Rainer Maria Rilke
आचार्य प्रशांत: "पर्हैप्स एवरीथिंग दैट फ्राइटन्स अस इन इट्स डीपर एसेंस, इज़ समथिंग हेल्पलेस दैट नीड्स आवर लव।” ये रिल्के का है।
प्रेम का अभाव डर है। प्रेम का अभाव ही डर है। अगर आपके जीवन में डर गहराई से घुसा हुआ है, तो यही जान लीजिए कि प्रेम की कमी है। यही वो कह रहे हैं। जितना प्रेम बढ़ेगा, डर उतना न्यून होता जाएगा। डर अपने आप में शुभ भी है इस कारण कि डर सूचना देता है, प्रेम की संभावना की। यूँ समझें कि डर एक खाली जगह है। जहाँ खाली जगह है, वहाँ भरने की भी संभावना है — तो डर प्रेम की संभावना है। डर अपने आप में शुभ है, क्योंकि डर सूचित कर रहा है कि प्रेम का अभाव है।




