मैं देख रहा था अपने कमरे की खिड़की से। चिड़िया है एक, वो छुपी रहे, छुपी रहे। और जैसे ही बारिश शुरू होती है, वह बाहर निकल आती है और बारिश में लगती है फुदकने लगती है फुदकने यही काम वहां सामने बतके हैं पांच उनका है जैसे ही बारिश होती है वो ट्रेन बना देती हैं और वैसे वो अपने उसमें रहती हैं लेकिन बारिश होते ही उनकी ट्रेन चल पड़ती है और वैसे ट्रेन बना के जाती हैं फिर पूरा घूम के आती हैं। ये जीवन के सहज आनंद हैं। इनसे क्यों अपने आप को वंचित कर रहे हो? बारिश हो रही है तो भीगो नाचो। कौन रोक रहा है इसमें?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं आपको दो साल से सुन रही हूं। तो लाइक जब मैंने आपको सुनना चालू किया तो एक साल तक तो मैंने जब आपके बुक्स अगर पढ़े तब समझ में आया कि हमारी जो लाइफ में जो भी चीजें हम करते हैं बहुत कंडीशनिंग वगैरह होती है। हर चीज जो भी एक्शंस लेते हैं। बहुत सेल्फ डाउट्स आते हैं और चीजें जो छोड़ी हैं मतलब पहले जब आपकी बातें नहीं सुनती थी तब बहुत सारी बुरी आदतों का भी वो था। कि लाइक बहुत सारी चीजों में इन्वॉल्वड थी तो वो सब भी छोड़ दी। तो कहीं ना कहीं अब लगता है कि यार मतलब वो चीजें कहीं ना कहीं कभी कबभार ट्रिगर करती हैं कि अब क्या होगा? कुछ कर लूं क्या? मतलब कुछ मतलब वैसा होता है आचार्य जी।
आचार्य प्रशांत: जिन चीजों को आप छोड़ रहे हो उनको तभी छोड़िए जब वो सचमुच आपको किसी तरीके से रोक रही हो। नहीं तो नुकसान क्या होता है ना कि परंपरा में अध्यात्म और एक तरीके का एसिटिसिज्म लादा हुआ वैराग्य है। ये साथ चले हैं और इसलिए जो पूरी अध्यात्म की छवि ही है, वही ऐसी हो गई है कि लोग उससे बचते हैं। और यह बात वही लोक सत्य बन गई है। तो जो लोग आते भी हैं कि समझें विज़डम क्या चीज है, वह भी उस लोक सत्य के कारण ऐसी चीजों को भी छोड़ना शुरू कर देते हैं जिसको जिसको छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
जो जीवन के सहज आनंद हैं। उनको भी छोड़ना शुरू कर देते हैं क्योंकि उनको लगता है कि अध्यात्म का यही तो मतलब होता है सब छोड़ छाड़ दो। लेकिन इसका नतीजा क्या होता है? इसका नतीजा यह होता है कि जिंदगी हो जाती है बिल्कुल बेरौनक सुनी और फिर आपने जितना छोड़ा होता है उसका दोना आप पकड़ लेते हो। ऐसे भी लोग हैं आचार्य जी, जब से आपको सुना है तब से खेलना बंद कर दिया। घूमना बंद कर दिया। क्यों भाई? क्यों? यह तो इसमें कौन सा किसी का तुम नुकसान कर रहे थे कि तुमने यह काम बंद कर दिए? खेलना क्यों बंद कर दिया? घूमना क्यों बंद कर दिया? लोग आए आचार्य जी अब तो मैं जब से गीता कोर्स में आया हूं तब से लड़कियों से बिल्कुल बातचीत रोक दी है। ये ज्ञान तुम्हें किसने दिया? बोले नहीं, ‘मैं पहले ना बिल्कुल ऐसा ही था कि वो मनाइजर हुआ जा रहा था। दो भाई वो ठीक है कि तुम सबको इसी नजर से देख रहे थे कि पकड़ लूं खा लूं। वो चीज छोड़ दो। पर तुम कहो कि मैंने अब लड़कियों से बातचीत करनी बंद कर दी है। तो उसका परिणाम यही निकलेगा कि तुम गीता ही छोड़ोगे फिर।’ कितने दिन तक तुम दुनिया की आधी आबादी से बिना बात किए चल सकते हो। तुम जहां जाओगे वही दिखेंगी। और उनको तुम इतना तो नहीं अवॉइड कर पाओगे। तो ले दे के या तो अपनी नजर में पाखंडी बनोगे नहीं तो गीता को ही छोड़ दोगे।




