दुनियादारी सीखो, भाई! और मुझसे अगर प्रेम है या कोई नाता है, इज्जत है, तो मेरी अभी स्थिति क्या है, वो समझो। प्रेम अगर है, तो प्रेम यह देखता है ना कि सामने वाला क्या चाहता है, उसकी क्या जरूरत है? प्रेम आत्म-केंद्रित थोड़ी हो जाएगा कि "मैं अपने तरीके से!" अपने तरीके से है, तो फिर प्रेम नहीं है, स्वार्थ है ना!
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, मैंने सुना है कि 20 साल पहले आपने अपने आईएम अहमदाबाद एमबीए के जस्ट बाद एक एक्सेल शीट बनाई थी, शायद अ जर्नी टू अ फ्री मैन के नाम से। उस शीट में शायद कुछ आपकी प्लानिंग थी कि आप कितनी जल्दी अपने लोन सेटल करके फ्री होना चाहते थे। तो मतलब आप तो स्पिरिचुअल इंसान हैं, तो स्पिरिचुअल जर्नी में फाइनेंशियल प्लानिंग और दुनियादारी के कैलकुलेशंस का क्या रोल होता है?
आचार्य प्रशांत: उस शीट का नाम था ‘फ्री मैन इन मार्च’, अ जर्नी टू अ फ्री मैन नहीं था। बहुत पुरानी एक्सेल थी, वो सेव करके अभी भी रखी हुई है। मेरी वो शीट बनी हुई थी कि मुझे कितनी जल्दी और किस तरीके से अपना कर्जा पटाना है।
आप लोग क्या सोचते हो? हर चीज़ का जवाब बस यही है—"अपने माही टटोल।"
वो शीट बनी हुई थी फ्री मैन इन मार्च, क्योंकि मैं जल्दी से जल्दी अपनी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ना चाहता था। तो उसमें मैं अपने छोटे से छोटे खर्चे का हिसाब रखता था। एजुकेशन लोन था और कुछ मैंने कर्जे ले रखे थे, वो मुझे सब खत्म करने थे जल्दी से जल्दी।




