आप के सवाल का जवाब यही है कि ये सवाल आए ही नहीं। जिसको ये सवाल आ गया, अब उसको कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। ये सवाल ही अपने आप में चोरी है एक तरह की ये। तो ये कोई करके आ गया है। इस सवाल का दिमाग में आना ही समझिए जैसे कि हो गई गड़बड़। कुछ विचार ऐसे होते हैं जिनका दिमाग में; हम कहते हैं ना कि विचार यदि कर्म बन गया तब गड़बड़ हुई, तब पाप हुआ, अपराध हुआ। आवश्यक नहीं है। विचार कर्म बन जाए तभी अपराध नहीं होता। ज़्यादातर विचार ऐसे हैं जिनका दिमाग में आना ही अपराध होता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर। माय क्वेश्चन इज (मेरा सवाल है), थोड़ा-सा मैं हिंदी में बोलूँगी, थोड़ा-सा इंग्लिश में, आई एम इन अमेरिका एंड हिअर द सिचुएशन इज लाइक दैट यू हैव टू वर्क इन ऑर्डर टू, यू नो, हैव योर सोशल सिक्योरिटी सेटअप। यू नो फॉर वन्स यू आर सिक्सटी, यू कैन स्टार्ट विदड्राइंग दैट एंड माय क्वेश्चन इज कमिंग फ्रॉम मायसेल्फ एंड द एनवायरमेंट अराउंड मी, व्हेअर आय सी दैट पीपल हू डोंट वर्क बट हैव नॉट वर्क्ड इन देअर यूथ एंड दे आर नाउ सिक्सटी, सेवनटी इवन सेवेन्टी फाइव, एट्टी, दे आर वर्किंग लाइक ए थ्री जॉब्स। बिकॉज दे डोंट हैव द सोशल सिक्योरिटी, मनी। एंड बिकॉज द एक्सपेंसेस इंफ्लेशन इज हाई एक्सपेंसेस आर देयर दे डोंट हैव इंश्योरेंस, सो दे हैव टू मीट देअर एंडस। फॉर मीटिंग देअर एंडस, उनको तीन या तीन-चार जॉब्स (रोज़गार) में काम करना पड़ता है उस एज (उम्र) में।
(दरअसल मैं अमेरिका में रह रही हूँ और स्थिति कुछ ऐसी है कि लोगों को यहाँ इसलिए भी काम करना पड़ता है ताकि वो अपनी सोशल सिक्योरिटी स्थापित कर सकें। ताकि जब वो साठ साल के हो जाएँ, तो उन पैसों का इस्तेमाल कर सकें। और मेरा सवाल निजी है और मेरे आसपास के माहौल से संबंधित है। फिर मैं देखती हूँ कि जो लोग काम नहीं करते थे, उन्होनें अपनी जवानी में काम नहीं किया और अब वो साठ, सत्तर यहाँ तक कि पचहत्तर या अस्सी साल के हो गए हैं, उनको अब तीन-तीन नौकरियाँ करनी पड़ रही हैं। क्योंकि उनके पास सोशल सिक्योरिटी का पैसा नहीं है। और क्योंकि खर्चे और महंगाई बहुत बढ़ गई है, उनके पास बीमा भी नहीं है, तो उन्हें दो वक्त की रोटी जुटाने में भी काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।)




