जो लड़की अपने प्रेमी से जाकर बोले कि ‘मेरे पिताजी तुम्हारी जाति को पसंद नहीं करते,’ वो लड़की क्या किसी की जीवनसाथी बनेगी? या फिर वो लड़का? शारीरिक और जन्मगत श्रेष्ठता एकदम व्यर्थ की बात है। यह कौन-सा प्यार है जहाँ समाज, वर्ग, जाति और परिवार बीच में आ जाएं? साथी चुनने से पहले बोध, गहराई और समझदारी की बातें करनी होती हैं। ज़िंदगी, आशिकी और रिश्ते इतनी सस्ती नहीं होते कि कहीं भी जाकर बंध जाओ।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, मेरी उम्र चौबीस वर्ष है और मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मैं एक साथी महिला सहकर्मी के संग प्रेम प्रसंग में हूँ। मैं दलित वर्ग से आता हूँ और वह मुझसे ऊँची जाति की हैं। पर उन्हें शादी से कोई समस्या नहीं है। लेकिन जब उन्होंने शादी की बात अपने घर में की तो उनके घर वालों ने साफ़ मना कर दिया और कहा कि किसी से भी शादी कर देंगे पर किसी एससी एसटी से नहीं।
आचार्य जी, मेरा प्रश्न है कि हम इतना आगे बढ़ चुके हैं शिक्षा में, विज्ञान में और समाज आगे बढ़ रहा है, जीवन स्तर सुधर रहा है फिर भी जाति को इतना महत्व क्यों?
आचार्य प्रशांत: उनके मम्मी पापा ने कहा, ‘हम शादी नहीं करेंगे।’
प्रश्नकर्ता: हॉं, जी।
आचार्य प्रशांत: तो आपने उनकी मम्मी को प्रपोज क्यों किया था? (श्रोता हॅंसते हैं।)




