प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मैं कसौली हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूँ, शिमला के पास में ही है बिलकुल। यहाँ पर पिछले कुछ सालों में टूरिज्म बहुत बढ़ गया है। और उससे जॉब्स तो क्रिएट हो रही हैं, परकैपिटा इन्कम भी बढ़ रही है। बल्कि रीसेंटली मैंने एक स्टडी पढ़ी थी जिसमे जो ये डिस्ट्रिक है सोलन डिस्ट्रिक, ये सेकेंड नम्बर पर आती है नॉर्थ इंडिया में, इन टर्म्स ऑफ़ परकैपिटा इन्कम, आफ्टर गुडगाँव। तो इससे एम्प्लॉयमेंट जनरेट हो रही है, इकॉनमिक बेनिफिट्स हैं। लेकिन इसके बहुत सारे डाउन-साइड्स भी क्रिएट हो रहे हैं हम लोगों के लिए, लोकल लोगों के लिए। जैसे कि बहुत से नए होटल्स बन रहे हैं। होम-स्टेज़ खुल गये हैं।
टूरिस्ट जो है वो मोस्टली पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आता है। वो यहाँ पर आते है जैसे शराब पीने, नशे करने और शोर मचाने, पार्टीज करने। अब होटल्स वगैरह क्या कर रहे हैं इनको आकर्षित करने के लिए वो म्यूज़िक बजाते हैं। बहुत लाउड म्यूज़िक बजाते हैं जो मतलब परमिसिबल लिमिट्स हैं जो गवर्नमेंट ने सेट करी हैं उनका उनको कोई भी ध्यान नहीं है। डेस्टिनेशन वेडिंगस और ये ऑफसाइट पार्टीज, इन चीज़ों के लिए भी ये जो इलाका है ये काफ़ी मशहूर हो गया है। और इस इलाके का पर्यावरण की दृष्टि से, पोलूशन की दृष्टि से, टेम्प्रेचर वगैरह भी बहुत अच्छे रहते हैं साल भर।
हम मतलब पुलिस में कम्पलेंट्स करते हैं, कभी सीएम हेल्पलाइन्स पर कम्पलेंट करते हैं तो इन पर हम भी दबाव डालने की कोशिश करते हैं लेकिन मोस्ट फैमिलीज़ के बच्चे भी अब इनके पास एम्प्लॉयड हैं तो वो भी अब मतलब हमारे साथ जुड़ना नहीं चाहते। अगर हम इनके अगेंस्ट कुछ एक्शन करना चाहें तो हम जनसमर्थन भी इतनी आसानी से जुटा नहीं पाते हैं। तो मतलब हम जो लोकल जब सफ़र कर रहे हैं उससे लड़ने के लिए अब हम मतलब कैसे? थोड़ा मार्गदर्शन करें कैसे हम इसको….?
आचार्य प्रशांत: देखो, जो इसमें एक्टिविज़्म वाले जवाब हैं, वो जितना मैं जानता हूँ उतना ही आप भी जानते हैं। वो जवाब मैं दे सकता हूँ सब। मैं कह सकता हूँ कि लोकल मीडिया में इन मुद्दों को उठाइए। मैं ये कह सकता हूँ, ‘आपके जो जन प्रतिनिधि हैं, एमपी, एमएलए हैं, इनसे मिलने जाइए।‘ पर शायद आपने ये सबकुछ थोड़ा बहुत करके देखा ही हुआ है तो इन बातों की जो सीमा है वो आप समझते हैं।




