मेरे देश की युवा ताकत बेहोश और मदहोश - किसने किया ये? || आचार्य प्रशांत, राष्ट्रीय युवा दिवस (2024)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, अभी बारह जनवरी को युवा दिवस है और स्वामी विवेकानन्द जी ने युवा जागरण के लिए बहुत कुछ किया है। और आपकी संस्था भी युवा जागरण के लिए बहुत प्रयास कर रही है।
मैं नॉर्थ ईस्ट त्रिपुरा से बिलॉन्ग (सम्बन्धित) करती हूँ, अभी कुछ सालों से देश के बाहर हूँ। पिछले साल मैं गयी थी वहाँ पर तो मैंने देखा कि वहाँ का हाल अभी ऐसा है कि बुक स्टोर्स (क़िताबों की दुकान) में हम जाते हैं तो वहाँ पर दूसरी क़िताबें तो छोड़ दीजिए, टेक्स्ट बुक्स (पाठ्य पुस्तक) भी नहीं मिलती हैं।
एक बुक ख़रीदते हैं तीन-चार बच्चे, लेकिन बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत ज़्यादा हो गया है और वो लोग मोस्टली (अधिकांशतः) इंस्टाग्राम, फेसबुक इत्यादि पर ज़्यादा एक्टिव (सक्रिय) रहते हैं, वो बुक्स ज़्यादा नहीं पढ़ते।
तो जो स्टोर (दुकान) वाले थे वो मुझसे बोल रहे थे कि आप दूसरे बुक्स यहाँ पर मत ढूँढो, क्योंकि हमारा बिजनेस (व्यवसाय) अभी बहुत ही घाटे में जा रहा है। एक लाइब्रेरी थी हमारे स्टेट में, वो लाइब्रेरी भी अब बन्द होने की कतार में है।
और मैंने देखा है कि बहुत सारे बच्चे ड्रग एडिक्ट (नशे के आदी) हो रहे हैं हमारे स्टेट में और ये सोलह-सत्रह साल के बच्चे हैं जो ड्रग्स के एडिक्शन में जा रहे हैं।






