
Through penance one gets to know the inborn disposition (Sattva); From Sattva one gets (stability of) the mind; Through the mind one realizes the Atman; By realizing the Self (worldly life is) prevented.
~ Maitreya Upanishad (Chapter 1, Verse 6)
Context:
Are doubts worthy of being kept? Why do doubts…

Questioner: Would you please be able to explain to us the difference between the mind, the soul, the spirit, and consciousness?
Acharya Prashant: There is just consciousness; that consciousness requires physical support. That consciousness requires a physical support, right? That physical support is called: the man.
When we say consciousness,…

Questioner: When I do something my parents don’t approve of, they scold me. But sometimes the matter goes too far and I get offended, and then I refrain from talking back to them; I fear that if I say something, I will end up hurting them. But then, if I…

प्रश्नकर्ता: अपूर्वा हैं, अगर कोई हमारी किसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाए, हमें बार-बार परेशान करे तो हम उस समय पर न्यूट्रल (तटस्थ) कैसे बने रहें?
आचार्य प्रशांत: देखो, दो-तीन तरह की परेशानियाँ होती हैं जो लोगों को लगती हैं। मान लो, तुम ट्रेन में जा रही हो, भारतीय रेल। अब…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर, मेरा प्रश्न यह है कि हम अपने बच्चों को सत्य से कैसे अवगत कराएँ।
आचार्य प्रशांत: सत्य कुछ होता ही नहीं है, उससे कैसे अवगत कराएँगे? झूठ से अवगत कराया जाता है। सच रोशनी है। सच क्या है? रोशनी है, है न? उस रोशनी में वो सब…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम! मेरा सवाल मेरे बच्चों के बारे में था, आचार्य जी। मेरे नौ साल के और ग्यारह साल के दो बच्चे हैं लेकिन उनका लगाव आध्यात्मिक साहित्य में नहीं हो पा रहा है। वो लोग पंजाबी रैपिंग सॉन्ग सुनते हैं; बॉलीवुड के आइटम सॉन्ग सुनते हैंl उसमें…

प्रश्नकर्ता: एक चीज़ होती है मेंटल एजिलिटी (मानसिक चपलता), जैसे कि मैं कहीं बाइक से जा रहा हूँ और अचानक कोई मोड़ आ गया या एक कुत्ता बीच सड़क पर आ गया, तो मुझे एकदम से ब्रेक लगाने की आवश्यकता पड़ी। तो ये जो स्किल (कौशल) होती है एकदम से …

प्रश्नकर्ता: मेरे विचार से एक व्यक्तिगत संसार होता है और एक सामाजिक संसार होता है। और मेरी आयु वर्ग में — 21 से 30 वर्ष की आयु के बीच जहाँ पर आदमी के के सामाजिक संसार को दो हिस्सों में बाँट दिया जाता है — रिश्ता (पर्सनल लाइफ़) और कैरियर…

प्रश्नकर्ता: मन क्यों हमेशा सुरक्षा की तलाश में लगा रहता है? क्या हैं मन के सदा असुरक्षित अनुभव करने के कारण? मैं तो अध्यात्म में, आप में और शिविर इत्यादि में भी सुरक्षा की तलाश कर रहा हूँ कि संसार में सुरक्षा न मिली तो सत्य में मिल जाए। मैं…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आपने कहा था कि ग़लती ‘मैं’ भाव से आती है। तो इसके साथ ही अक्सर हम अपनेआप को ये तर्क देते हैं कि मुझसे ये ग़लती हो गयी, ये मैं नहीं थी। तो ये ‘मैं’ भाव क्या है? और ग़लती किसको कहा जा रहा है तब?…

आचार्य प्रशांत: कुछ पाने का विचार होगा, कुछ खोने का विचार होगा, और तो कोई विचार होता नहीं। विचार बड़ी नीरस चीज़ होती है, उबाऊ। न जाने तुम कैसे इस उबाऊ चीज़ के साथ इतना समय गुज़ार लेते हो।
विचार ने कभी कुछ और कहा है तुमसे? एक ही बात…

प्रश्नकर्ता १: आचार्य जी, प्रणाम। आज गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर है। आपसे आज तक मिला तो नहीं हूंँ, लेकिन आपके वीडियोस व्याख्यान ही मेरे लिए गुरु समान हैं। सबसे पहले धन्यवाद!
श्री गुरुगीता में आया है —
"शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन। लब्ध्वा कुलगुरुं सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत्।।"
यदि…

प्रश्नकर्ता: कई लोग जैसा बोलते हैं कि तुम संसार को छोड़कर यदि कुछ और तरफ जा रहे हो, तो वो पलायनवादिता है। असली स्पिरिचुअलिटी (आध्यात्मिकता) वो है जब तुम सब चीज़ों के बीच में रहते हुए, वो हो सको। तो इस बारे में थोड़ा सा प्रकाश डालें प्लीज़।
आचार्य प्रशांत:…

Acharya Prashant: It has been told to us that there exist two centers. I suppose it has been very freshly told to you right? Very recently. He says, “How do I know that I am living out of the right center? How does a young man know whether he’s not…

प्रश्नकर्ता: जो अभी जिज्ञासा है मेरी आचार्य जी, यूट्यूब पर एक शॉर्ट्स देखा था, उसके सम्बन्ध में है। तो एक बहुत सुप्रसिद्ध व्यक्ति जो श्रीमद्भगवद्गीता पर बोलते हैं उनका वह शॉर्ट्स देखा था; काफ़ी चल रहा है, बार-बार मेरे फीड पर आया। तो वो निष्काम कर्म पर बोल रहे थे…

आज्ञाभयसंशयात्मगुणसङ्कल्पो बन्धः ।
ājñābhayasaṁśayātmaguṇasaṅkalpō bandhaḥ
Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts, fear, etc.
~ Niralamba Upanishad, Verse 25
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Acharya Prashant (AP): “Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts or fear etc. Bondage is to imagine that Ātman has doubt or…

प्रश्नकर्ता: ग्रैटिट्यूड एंड ब्लिस (आभार और आनन्द) के स्टेट (अवस्था) में हमेशा कैसे रहें?
आचार्य प्रशांत: ग्रैटिट्यूड तो तभी आएगा जब दिखायी देगा कि क्या-क्या ख़तरे हो सकते थे, कहाँ-कहाँ फँस सकते थे, कितना आसान था किसी गड्ढे में गिर जाना, किसी जाल में फँस जाना, और बच गये।
वो…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। आचार्य जी, पिछले एक साल से आपको सुन रहा हूँ और आपकी अनुकम्पा से ग्रन्थ भी पढ़ने शुरू किये हैं तो अभी प्रतिदिन कुछ नया सीखने को मिलता है, मन बिलकुल लगा रहता है और जैसा पहले चला करता था, उससे बिलकुल बदल गया है जीवन।…

आचार्य प्रशांत: केला तक तो खाते हो तो छिलका उतारकर खाते हो और बातें किसी की यूँही समूची निगल लेते हो, बिना देखे कि इसमें क्या लगा है। डॉक्टर हैं, बच्चों को समझाते होंगे सब्जी भी पहले रगड़-रगड़ कर धोना, छिलका उतारना, फिर पकाना और बातें कीचड़ मेंं लथपथ हो…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। सवाल ये है कि मन हर चीज़ को अंकित क्यों करता है, कि किसी ने किस नज़र से देखा, क्यों हँसा, क्यों आवाज़ हुई। कहीं तो मन में भी कुछ हो जाता है।
आचार्य प्रशांत: हर चीज़ को नहीं अंकित करता मन। इतनी सामर्थ्य ही नहीं…

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पांडव। न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन।।
~ श्रीमद्भगवद्गीता, छठा अध्याय, दूसरा श्लोक।
जिसको संन्यास कहते हैं उसको तू योग जान क्योंकि संकल्पों का त्याग न करने वाला कोई भी व्यक्ति योगी नहीं होता।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। मैं संकल्पों के त्याग का तात्पर्य समझना चाहता…

Acharya Prashant (AP) All the diversities that you see are the world. And these diversities are what make the mind suffer and here the sages have picked up all the diversities and have said that all these diversities are actually one. The distinctions are merely apparent. Actually, there is an…

प्रश्नकर्ता: सत्य और अध्यात्म की बात पर। व्हाट इस द डिफरेंस बिटवीन बींग स्पिरिचुअल एंड हैविंग अ स्पिरिचुअल एक्सपीरिएंस (आध्यात्मिक होने में और आध्यात्मिक अनुभव होने में क्या अंतर है) ?
आचार्य प्रशांत: आध्यात्मिक अनुभव जैसा कुछ नहीं होता। आप अगर आध्यात्मिक हैं तो आपके सब अनुभवों में एक सच्चाई…

Acharya Prashant (AP): The mind has been continuously lying to you. What has it been telling? It's been telling you that there exists no reality outside of itself; that it's not possible to 'be' without being the mind. That's what the mind has been telling you in its own selfish…

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न बच्चों के परवरिश के संदर्भ में है। जैसे हमेशा से कहा जाता है कि एक बच्चे की परवरिश में उसके माता और पिता दोनों की ही बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। और अगर दोनों में से कोई एक पैरेंट (अभिभावक) भी अगर अनुपस्थित है, तो…

प्रश्नकर्ता: सर, सुबह जब मैं आया था और बैठा था गंगा किनारे। तो जो लोग घूमने आये थे, अभी भी जैसे हैं, तो लोग चिल्लाते क्यों हैं? जैसे मैंने भी अपने पर ध्यान दिया है, मैं भी बहुत चिल्लाता हूँ। तो ये चिल्लाहट क्यों है? कोई अभिव्यक्ति होती है?
आचार्य…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी! मेरा नाम ऋचा है। आप तीन महीने पहले मुझे यूट्यूब में आप मिले और तब से मुझे लग रहा है कि हाँ, कुछ हो सकता और कुछ बदलाव हम कर सकते हैं अपनी ज़िंदगी में। अन्यथा काफ़ी कुछ मन में चल रहा था।
मेरा जो व्यक्तित्व…

प्रश्नकर्ता: भगवान श्री प्रणाम। अपनी तरफ़ देखता हूँ, तो समझ में तो आ रहा है कि कंडिशनिंग (संस्कारों) से अहम् का निर्माण है, अगर इसको, कुछ-कुछ हल्की सी झलक भी आने लगी है कि मानसिक स्तर पर नहीं हूँ।
आचार्य प्रशांत: कंडिशनिंग से अहम् का निर्माण नहीं है, कंडिशनिंग से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, भारतीय दर्शन में वेदों के आधार पर आस्तिक और नास्तिक का विभाजन किया गया। उसमें बौद्ध, जैन और चार्वाक दर्शन को नास्तिक बोल दिया गया; जिसमें से मुख्यत: बौद्ध और जैन धर्म ने वेदों की सत्ता को माना नहीं, इस वजह से उसमें वर्गीकरण किया गया।
तो…

प्रश्नकर्ता: विशुद्ध चक्र की साधना करता था और एक दिन ऐसा लगा जैसे पार जा ही रहा हूँ, पर मन ने डराकर वापस कर दिया। फिर हिम्मत बाँधकर कोशिश की लेकिन वो मौक़ा दोबारा नहीं मिला। फिर शादी हुई और बाद में कोई दुर्घटना भी हुई जिसकी वजह से घुटने…

Questioner: Why think so much about decisions? Shouldn’t our decisions be spontaneous? I like to decide in a free flow.
Acharya Prashant: So the questioner is stressing on the spontaneity of decisions. He says that he likes to decide in a flow. It's a good thing, your intention is good.…

आचार्य प्रशांत: खिंचाव है, आकर्षण है, किधर को जाने की इच्छा, बदल जाने का मन; कुछ अनजाना, कुछ नया पा लेने की अभीप्सा। कोई ऐसा है जिसको ये न होता हो? कोई ऐसा है जो किधर को खिंचता न हो? कोई है जिसको कुछ-न-कुछ आकर्षित न करता हो? सब हैं…

The word for a Guru does not really exist in the English language. So, they have borrowed Guru itself, Guru. But they have borrowed the word Guru and rather misunderstood it and misapplied it. So, anybody who seems to be an expert at anything, can be justifiably called a Guru in the English language. Now that's not the proper usage in spirituality or in Sanskrit.

प्रश्नकर्ता: आप कहते रहते हैं कि जिसको जिसमें सहजता हो और सुविधा हो वो वैसे कपड़े पहने। आप ये भी कहते हैं कि ऋषियों को, मुनियों को स्वेच्छापूर्वक वस्त्र धारण करने का अधिकार है, उन्हें कुछ पहनना हो तो पहनें, न पहनना हो तो ना पहनें।
बहुत सारे पुराने ऋषि…

Acharya Prashant: Chandogya Upanishad — Chapter 3, part 11, verses 2 and 3:
न वै तत्र न निम्लोच नोदियाय कदाचन । देवास्तेनाहंसत्येन मा विराधिषि ब्रह्मणेति ॥ ३.११.२ ॥
na vai tatra na nimloca nodiyāya kadācana | devāstenāhaṃsatyena mā virādhiṣi Brahmaṇeti || 3.11.2 ||
Never does this happen there; never did…

Questioner (Q): So I had your advice and I got some books in terms of getting different perspectives. It might be a bit weird in a way question but I kind of wonder, when people are praying for God somewhere and also you're mentioning something about the myth of the…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रकृति और पुरुष को समझाने की कृपा करें।
आचार्य प्रशांत: पुरुष-प्रकृति की जो अवधारणा है, मूलतः वो सांख्य योग से आयी है। लेकिन जिस तरीके से ‘पुरुष' शब्द का प्रयोग फिर आध्यात्मिक साहित्य में हुआ है, वो आवश्यक नहीं है कि सांख्य योग के अनुसार ही हो।…

प्रश्नकर्ता मेरे को पता है कि मैं नशा करता हूँ और वो एक सर्टेन टाइम (निश्चित समय) पर आता है। शाम हो जाती है तब मन उधर को पूरा खिंचा चला आता है। वो जो मज़ा देता है मैं उसको छोड़ भी नहीं पाता और मैं कहीं भी कोई भी…

Questioner 1 (Q1): Acharya Ji, Pranam. There are certain and similar objects that occupy my mind every day. However much I try to get rid of them, they still linger. How should I get rid of them? Please help.
Acharya Prashant (AP): They are just occupying a void. That void…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पिछले कुछ दिनों से उदासी रहती है, सब ठीक चल रहा है फिर भी पता नहीं क्यों रोना आ जाता है, समझ नहीं आ रहा क्या करूँ? कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: तो जो हो रहा है, उसको होने दो, उसके साथ रहो, बुरा मत मानो इसका।…

Acharya Prashant: Observing the daily ordinary actions of the mind, that is the only way. Observing it as an impartial observer. There is no other method that is going to work because all other methods are ‘isolations.’ The method does something to life. The method excludes life; the method…

Acharya Prashant (AP): What’s happening here, firstly I will read it out to you and then explain.Once, the five senses disputed among themselves about their personal superiority. The five senses quarreled as to who is superior among them. So, once the five senses disputed and each of them was…

प्रसंग:
मन क्या है? कैसा है तुम्हारा मन - फूल, या धूल? मन को माणिक क्यों बोला गया है? मन माणिक कब है? मन को कीमती क्यों बताये है संत दादू दयाल? मन माणिक मूरख राखि रे, जन-जन हाथ न देहु। इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
दोहा:
मन माणिक…

आचार्य प्रशांत: एक स्कूल था बच्चों का, छोटे बच्चे आते थे वहाँ एकदम। छोटे बच्चे आये वहाँ, खड़े हो और बड़े अपनेपन से और बड़े नाज़ से बोले, 'ये हमारा स्कूल है।' एक दिन वहाँ कुछ जंगली जानवर आ गये। उनको खबर मिल गयी थी कि यहाँ छोटे-छोटे बच्चे रहते…

Questioner (Q): I have been suffering from a type of OCD (Obsessive Compulsive Disorder) called somatic OCD for the last two years. I was in constant fear, every single moment, for around two years. I was on sleeping pills and anti-anxiety pills, but I think what helped me a lot…

Questioner: Acharya Ji, a good discussion happened yesterday in which many seekers participated and shared their understanding of Prakṛiti, Puruṣha and other things.
During the discussion, it was put that Prakṛiti, Puruṣha, Māyā, are mere concepts and that one is pure Ātman, never threatened and…

Questioner(Q): Hello Sir, I am Saurav, PhD student at IIT-Patna. Sir, a couple of years ago I met with a bike accident. At that moment, I felt like time was moving very slowly. I don’t know if it was just my feelings, but I searched on the internet and I…

हम सोचते हैं वर्तमान में होने का अर्थ है कि जो काम कर रहे हो उसमें हो जाओ। ये हो ही नहीं पाएगा। हम सोचते हैं वर्तमान में होने का अर्थ है कि इस वक़्त जो हो रहा है उसको अपना पूरा मन दे दो। ये हो ही नहीं पाएगा जब तक तुम अपनी उस जगह को उपलब्ध नहीं हो जाते जो वास्तव में है, जो वास्तव में प्रेज़ेंट (वर्तमान) है, जिसकी सत्ता सच्ची से सच्ची है, जो बदल नहीं सकती, जिसका कोई आना-जाना नहीं है। जब तुम वहाँ बैठे होते हो तब दुनिया भी तुम्हारी होती है और चूँकि हम वहाँ नहीं बैठे होते इसीलिए हम दुनिया में भी फिसड्डी रह जाते है।

प्रश्नकर्ता: प्रिय आचार्य जी, प्रणाम! गीता का पाठ संभव कर देने के लिए धन्यवाद। अध्याय ७, १३ और १५ में श्रीकृष्ण प्रकृति, दो प्रकार के पुरुष, और पुरुषोत्तम के बारे में बताते हैं और कबीर साहब ने चार रामों की बात कही है-
चार राम हैं जगत में, तीन राम…