जीवन्मुक्त होने की शुरुआत कहाँ से करें? || आचार्य प्रशांत, जीवन्मुक्त गीता पर (2020)
गर्भध्यानेन पश्यन्ति ज्ञानिनां मन उच्यते।
सोऽहं मनो विलीयन्ते जीवन्मक्त: स उच्यते॥
अन्तःध्यान के द्वारा जिसे ज्ञानीजन देख पाते हैं वह “मन” कहा जाता है। उस मन को सोऽहं की भावना में जो विलीन कर देता है, वही जीवनमुक्त है।
~ जीवन्मुक्त गीता श्लोक 13
ऊर्ध्वध्यानेन पश्यन्ति विज्ञानं मन उच्यते।
शून्यं… read_more