हृदय भर कब पाया लेने से, पाया कितना यह साबित होता देने से? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2014)

शीलवन्त सुन ज्ञान मत, अति उदार चित होय।
लज्जावान अति निछलता, कोमल हिरदा सोय।।
संत कबीर
वक्ता: उदारता का विपरीत क्या होता है?
श्रोता १: संकीर्णता।
वक्ता: संकीर्णता या कृपणता, ठीक है?
श्रोता २: मायज़र।
वक्ता: हाँ, मायज़र। कब आती है कृपणता? कृपणता का मतलब होता है?
श्रोता ३: पकड़ कर रखना।






