Religion

काँवड़ियों की गलती बताने से पहले...
काँवड़ियों की गलती बताने से पहले...
9 min
सोमवारी और काँवड़ यात्रा का बाहरी आयोजन तभी सार्थक है जब उसका संबंध शिवत्व और सत्य से हो। केवल भीड़, दिखावे, मांसाहार छोड़ने की औपचारिकता या पुत्र की कामना को धर्म मान लेना वास्तविक धर्म नहीं है। काँवड़ियों को दोष देने के बजाय उस सामूहिक मानसिकता को देखना चाहिए जो ऐसे कर्मों को जन्म देती है। धर्म का उद्देश्य लोकधर्म की रूढ़ियों को बढ़ाना नहीं, बल्कि विवेक और समझ के द्वारा उनसे मुक्त करना है।
मज़हब पर सवाल होते ही लोग नाराज़ क्यों हो जाते हैं?
मज़हब पर सवाल होते ही लोग नाराज़ क्यों हो जाते हैं?
30 min
धर्म का अर्थ अंधविश्वास या मान्यताओं को मान लेना नहीं, बल्कि निर्भीक जिज्ञासा और सत्य की खोज है। बच्चों पर धार्मिक नियम थोपने के बजाय उन्हें प्रश्न पूछने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। भय, शर्म और अपराधबोध पर आधारित धार्मिक संस्कार व्यक्ति को सत्य से दूर और देह-केंद्रित बना देते हैं। सच्चा धर्म हर मान्यता की निष्पक्ष जाँच, तथ्य के प्रति ईमानदारी और आंतरिक स्वतंत्रता का नाम है। प्रश्नचिह्न ही धार्मिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है।
"I was a Hardcore Hindu - and now I don't like Religion"
"I was a Hardcore Hindu - and now I don't like Religion"
24 min
Human beings are born into uncertainty, surrounded by beliefs, identities, and social conditioning that offer ready-made answers to fundamental questions. Real spirituality begins not with accepting collective or personal beliefs, but with honestly examining one’s own suffering, fears, and false identities. The journey is not toward comforting ideas, but toward self-inquiry, where truth is discovered through questioning, observation, and the gradual rejection of illusion.
आस्था ज़बरदस्ती जगाओगे क्या?
आस्था ज़बरदस्ती जगाओगे क्या?
13 min
आप आस्था खोज रहे हैं, पर क्या आस्था कभी ज़बरदस्ती पैदा होती है? आस्था फूल है, जो सही बीज, सही मिट्टी और सही संगति मिलने पर अपने आप खिलती है। शुरुआत श्रद्धा से नहीं, जिज्ञासा से होती है। सम्मान से नहीं, संदेह से होती है। परखिए, पूछिए, प्रयोग करिए। जहाँ वास्तविक लाभ होगा, वहाँ आस्था अपने आप जन्म लेगी, बनावटी नहीं।
11000 लीटर दूध बहाया गया: आस्था या अंधविश्वास?
11000 लीटर दूध बहाया गया: आस्था या अंधविश्वास?
7 min
आस्था और ज़िम्मेदारी अलग नहीं हैं; सच्ची आस्था खुद ज़िम्मेदारी बन जाती है। धर्म के नाम पर प्रकृति का नुकसान और अंधविश्वास, धर्म नहीं बल्कि अज्ञान है। वास्तविक धर्म समझ और सत्य पर आधारित है, न कि परंपराओं की अंधी नकल पर। अंधविश्वास पर प्रश्न उठाना धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि उसे बचाने का काम है।
भारतीय दर्शन में युवाओं की भूमिका
भारतीय दर्शन में युवाओं की भूमिका
48 min
आचार्य प्रशांत कलिंग में युवाओं से संवाद करते हैं। वे कहते हैं कि दर्शन सत्य की खोज है, जो आत्म-अनुसंधान से शुरू होती है। परंपरा सदा से चली आ रही है, बस रूप बदल गया है। विकृत धर्म बाजार बन गया है। युवाओं को अपनी बीमारी पहचानी चाहिए। सोशल मीडिया एल्गोरिदम मन को नियंत्रित कर रहा है। सच्चा शिक्षक वह है जो आपकी झूठी धारणाओं को चुनौती दे।
Who Is a Hindu?
Who Is a Hindu?
7 min
The one who is religion-less. A real Hindu does not have any religion. To go beyond all religions is to be a Hindu. There are religions that are on one plane, and then there is Sanatan Dharma, which is another dimension — the eternal religiousness. Liberation from religion is religiousness. Sanatan Dharma is awakened intelligence.
Do religion and spirituality go together? || Acharya Prashant (2017)
Do religion and spirituality go together? || Acharya Prashant (2017)
10 min

Listener: (Reading a quote of Acharya Prashant from a quote-calendar)

What lies beyond mind?More mind.What is more mind?What and lies and mind.Questions, perceptions on the concept of the mind.

Acharya Prashant: Any question about beyondness would be a useless question because the question itself is coming

क्या हिन्दू धर्म पिछड़ा हुआ है?
क्या हिन्दू धर्म पिछड़ा हुआ है?
39 min
समसामयिक हिन्दू धर्म पुराणों, स्मृति ग्रंथ और स्थानीय क़िस्म की परंपराओं पर चल रहा है। वो हिन्दू धर्म है ही नहीं। हिन्दू धर्म से अगर हमारा आशय है वेदों के दर्शन पर आधारित धर्म, तो हिन्दू धर्म न अगड़ा है, न पिछड़ा है; हिन्दू धर्म एकमात्र धर्म है। धर्म तो एक ही है, ये जो दुख में बैठा हुआ है, इसका दुख दूर करना। बाक़ी सब कुछ किसी धर्म, पंथ, मज़हब में हो रहा हो, वो सब अंधविश्वास है। हिन्दू धर्म कहता है, “वो है कौन जो दुःखी है? प्रश्न करो, और प्रश्न का जवाब परंपरा नहीं, प्रयोग देगा।”
नयी पीढ़ी धर्म से दूर क्यों?
नयी पीढ़ी धर्म से दूर क्यों?
16 min
गीता की ब्रांडिंग एक लोकधार्मिक बुक के रूप में हो गई है। तो ये जो जेन-ज़ी है, जब लोकधर्म को ठुकराती है, तो लोकधर्म के साथ-साथ गीता को भी ठुकरा देती है। थ्रोइंग द बेबी अवे विद द बाथ-वॉटर। तो उनके लिए गीता, पुराण सब एक है। और जो चलती है, रावण संहिता उनके लिए वो सब एक है।
Are You Truly Religious?
Are You Truly Religious?
10 min
If you are religious, then shouldn’t you be truly religious? Religion is about a total commitment to the Truth. You’ll have to recognize that the objective of religion is not to attain heaven, not to please a holy figure, but to come to your own inner Truth. All good books exist to awaken your consciousness. When it comes to you and the Truth, do you want somebody in between? And wherever you spot fakeness, falseness, hollowness or ignorance, drop it.
The Roots Of Indian Philosophy
The Roots Of Indian Philosophy
8 min
There is a search within the human being, always for the greatest, the absolute, and that is what differentiates humans from animals. India was fertile, and there was abundance. You had ample leisure, and in that leisure there was space for intellectual inquiry. The sages and the seers would talk to each other purposelessly. And from that purposeless discussion, from silent observation of life for hours, days, months, and years, came those insights that you today recognize as Indian philosophy.
Online Pooja, e-Darshan and Cyber Prasadam : Babaji Blows Digital
Online Pooja, e-Darshan and Cyber Prasadam : Babaji Blows Digital
13 min
This has always been a hugely profit-making sector of all economies, just that it has always been a small sector controlled by the priestly class. Now the attempt is to make this sector really big and on an organized scale, because the profits are very tempting, and there is no quality control. There can be no external auditor. All kinds of objections, audits, and scrutinies are ruled out. Getting it? So it’s a very tempting sector.
If Not Surrender, Then How to Reach Shri Krishna
If Not Surrender, Then How to Reach Shri Krishna
13 min
Shri Krishna is saying: the mind is conditioned to move towards objects and perceive only their surface, periphery, or form. Develop the practice of penetrating further. Let Truth be your practice. The moment you would look at something, and you are in no position not to look at things being embodied, you would look at things. Nobody said that you have to practice lust. Lust just comes. You might be a total fool, an utter retard, and still you will find yourself getting sexually excited once you reach a particular age. Did you need some practice? No, you didn’t. It just happened. But if you are to understand lust, if you are to cross over, if you are to be a master of your body, then it will require a lot of practice, and that will necessarily and obviously tell you about your predicament.
इन ''धार्मिक भावनाओं" को इतनी जल्दी ठेस क्यों लग जाती है?
इन ''धार्मिक भावनाओं" को इतनी जल्दी ठेस क्यों लग जाती है?
31 min
आम आदमी को भले ही कम चोट लगती हो, आप धार्मिक आदमी को कहोगे, उसे खट से चोट लगती है। अभी यहाँ कोई बैठा हो बहुत धार्मिक आदमी, वह भीतर से छलनी हुआ जा रहा होगा, “क्या बोल रहे हैं! महापाप!” तुमने अनंत को इतनी छोटी चीज़ क्यों बना दिया कि कोई उसको घाव दे सके, बताओ न। आकाश पर चोट लग सकती है? मारो गोली, आकाश को लगेगी चोट? थूको आकाश पर, आकाश गंदा हो जाएगा? सत्य तो आकाश है, जिसमें घुला जा सकता है उसमें लीन हुआ जा सकता है।
डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
31 min
डॉक्टर अंबेडकर मृत्यु की रात को भी क्या कर रहे थे? वह धर्म पर ही किताब लिख रहे थे, और उन्हें बड़ी हड़बड़ी थी कि इसको पूरा कर दें। तबीयत बहुत ख़राब थी, दिख रहा था कि जाने वाले हैं। उनकी मृत्यु के बाद वह किताब प्रकाशित हुई, ‘The Buddha and His Dhamma.’ वह कोई पॉलिटिकल या इकोनॉमिक्स की किताब नहीं लिख रहे थे। वह धर्म पर लिख रहे थे। जो भारतीय दर्शन रहा है, उसकी सारी खूबियाँ बौद्ध धर्म में ज़बरदस्त तरीके से मौजूद हैं। बौद्ध धर्म तो पूरा ही जिज्ञासा का धर्म है, रूढ़ियों के लिए वहाँ एकदम ही कोई जगह नहीं है।
जवाब देना होगा
जवाब देना होगा
5 min
धर्म तो सबसे ऊँची बात होनी चाहिए न? तो धर्म के नाम पर ऐसे काम क्यों कर रहे हो, जो एक छोटे बच्चे को भी दिख रहा है कि गलत है? और सबसे खौफ़नाक बात ये है, कि हमारे बच्चों को धीरे-धीरे झटका लगना बंद हो जाता है। वो इसी माहौल के हो जाते हैं, रच-बस जाते हैं। ज़िंदगी हिसाब करेगी, जवाब माँगेगी और तब लज्जित होने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
18 min
मेरे घर का मंदिर साफ़ रहेगा, बाकी मंदिर गंदे हैं तो रहें। क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मैं जाकर अपने उद्धार के लिए गंगा में डुबकी मार रहा हूँ और गंगा को गंदा कर रहा हूँ? दुनिया में किसी देश में इतनी गंदी नदियाँ आपको नहीं मिलेंगी। वाराणसी शायद दुनिया का सबसे पुराना नगर है, भोले बाबा की नगरी है, और जाकर देखो गंदगी। ख़ुद साफ़-स्वच्छ होकर रहे आना धर्म नहीं होता। ‘तुझे साफ़ करने की ख़ातिर मुझे ख़ुद मैला होना स्वीकार है,’ यह धर्म होता है।
ट्रू रिलिजन क्या है?
ट्रू रिलिजन क्या है?
12 min
The spirit of question. दो लोगों का साथ बैठ के कोशिश करना कि हम समझें कि दुनिया क्या है? ज़िंदगी क्या है? हम कहाँ कैसे सोच रहे होते हैं? हमारी ड्रीम्स कहाँ से आती हैं? डेथ क्या है? लाइफ़ क्या है? लव क्या है? When you go into these questions and not just once, but continuously, you are continuously observing life — वो ट्रू रिलिजन है। उसमें जादू, ये कहानी, वो कहानी इन सब के लिए कोई जगह नहीं होती। नो मिरेकल, नो सुपरस्टिशन, बट डीप डीप ऑनेस्टी।
हिंदू धर्म ख़तरे में क्यों है?
हिंदू धर्म ख़तरे में क्यों है?
19 min
धर्म की आज के समय में जो आपको हानि दिख रही है, वह इसीलिए है क्योंकि हमारा धर्म आचरणवादी, परंपरावादी हो चुका है। कुछ भी ढकोसला या अंधविश्वास चल रहा हो, हम तत्काल उसका संबंध धर्म से जोड़ देते हैं। ऐसे काम, जो कोई आम आदमी अपनी ज़िंदगी में करे तो कहेंगे—'पागल है, मूर्ख है, यह सबके लिए ख़तरा है, इसे पागलखाने में डालो'—वही काम जब धर्म के नाम पर होते हैं, तो सम्माननीय हो जाते हैं।
सत्य बनाम पारिवारिक परंपरा: रामायण व महाभारत से सीख
सत्य बनाम पारिवारिक परंपरा: रामायण व महाभारत से सीख
34 min
ये दुनिया किसी को भी प्यार दे सकती है। कृष्णों, बुद्धों को थोड़ी प्यार दे देगी। यही महाभारत है, यही दुख है, यही सर्वनाश है। सब प्यारे हैं, सिंहासन प्यारा है, दुशासन प्यारा है, यार प्यारा है, परिवार प्यारा है — सत्य प्यारा नहीं है। सोचो, क्या कर रहे हैं लोग? ये बाण अर्जुन पर चला रहे हैं, सारथी कौन बैठे हैं? श्रीकृष्ण। इन्हें ख़्याल तो आया होगा कि एक आध भूला-भटका बाण श्रीकृष्ण को भी लग सकता है, आया तो होगा न? और लगे भी होंगे बाण, पर अपने आग्रहों के लिए ये श्रीकृष्ण का खून बहाने से भी नहीं चूक रहे।
What is Religion? Why do We Pray?
What is Religion? Why do We Pray?
22 min
Religion is the way that brings the lost mind back to its center, its home. That is religion.
स्त्री और धर्म: इतिहास का सबसे बड़ा छल
स्त्री और धर्म: इतिहास का सबसे बड़ा छल
54 min
मात्र एक धर्म है, जो सचमुच महिला का मित्र है, और वह है वेदांत धर्म। बाकी सब लोक-धार्मिक परंपराओं में महिलाओं के लिए बस अपमान और शोषण है। जैसे, विच-हंटिंग और सती प्रथा के नाम पर हज़ारों स्त्रियाँ जलाई गईं। लोकधर्म महिला की भावनाओं से खेलना जानता है; इसीलिए आज भी स्त्रियाँ ही ज़्यादा हैं जो बाबाओं की शरण में जाती हैं। यदि महिला को अपनी निजता को अभिव्यक्ति देनी है, तो उसे उपनिषदों की ओर आना ही होगा। वेदांत अकेला है, जहाँ आत्मा का कोई लिंग नहीं है।
Religion and Women
Religion and Women
24 min
A lot of negative attitudes towards women today are claimed to be sanctioned by religion. The reason is that religion has been a victim of contamination. And this contaminated, mainstream, and false religion becomes a tool to exploit women. On the other hand, real religion is a woman's best friend because its effects are emancipation and empowerment. Therefore, when real religion shows up, it will deeply frustrate the traditional kind of religionists.
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
17 min
धर्म के साथ कई तरह की परंपराएँ जुड़ी हैं, जिनका उद्देश्य होता है — मन को भ्रम और दुख से मुक्ति देना। ‘शिव’ परम सत्य का दूसरा नाम है। यदि तीर्थाटन करने से मन साफ़ हो रहा है, आपके मन में सच्चाई दृढ़ता से स्थापित होती है, तो तीर्थयात्रा बहुत शुभ है — चाहे वह कावड़ यात्रा हो, अमरनाथ यात्रा हो, या केदार यात्रा। लेकिन यदि शिव का अर्थ बस मानसिक तल पर कुछ मान लिया है, उस पवित्रता से प्रेम ही नहीं, तो फिर क्या ही लाभ।
What Is Sanatan Dharma?
What Is Sanatan Dharma?
24 min
The human mind suffers because it does not understand what’s going on within itself. The mind longs for understanding and liberation from bondage. And the responsibility is on the human being to gain that understanding and that freedom from bondages. This responsibility is called Sanatan Dharma — founded on self-inquiry, ‘Atma-Jigyasa.’ It is a philosophy of the mind that gives a purpose to life.
इस्लाम में सुधार
इस्लाम में सुधार
12 min
पर एक साधारण सी बात है कि दूसरों की गंदगी बताने से पहले अपनी गंदगी तो साफ करूँ और मेरी गंदगी साफ होगी। उसके बाद कोई आकर के मुझसे बात करना चाहेगा उसके घर की गंदगी के बारे में। तो मैं प्रस्तुत हूँ। भई आखिरकार तो आप इंसान हो और हर इंसान से आपका सरोकार है। बात पंथ, मज़हब, संप्रदाय की तो नहीं होती है। कोई भी आकर आपसे बात करेगा और वो साफ होना चाहता है। बेहतर होना चाहता है तो आप बिल्कुल खुलकर बात करोगे। उसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सबसे पहले तो आप अपनी बात करोगे ना। अपना भीतर झाँक कर देखोगे।
क्या Gen-Z धर्म से बिछुड़ जाएगी?
क्या Gen-Z धर्म से बिछुड़ जाएगी?
34 min
गीता बिल्कुल आज की है। जैसे श्रीकृष्ण ने आपके लिए आज ही कही हो। बहुत-बहुत मॉडर्न है गीता, क्योंकि मनुष्य के अंतस की पुकार है गीता। यही वो असली धर्म है, जिसकी चाहत हर इंसान को है, और यही एकमात्र धर्म है, जिसका जेन ज़ी और उसके बाद की जेनेरेशन पालन कर पाएँगे, क्योंकि धीरे-धीरे जो धर्म, धारणा और अंधविश्वास बनकर रह गया है, वह विलुप्त हो जाएगा।
नमाज़ क्या? सलाम का अर्थ क्या? वेदांत के प्रकाश में
नमाज़ क्या? सलाम का अर्थ क्या? वेदांत के प्रकाश में
35 min
जितनी भी विधियाँ दी जाती हैं, वो जो हम कचरा इकट्ठा कर लेते हैं दिमाग़ में न, उसको साफ़ करने की विधियाँ हैं। सत्य को पाने की तो कोई विधि आज तक बनी नहीं। और विधि बनाने की कोई ज़रूरत भी नहीं है क्योंकि वो चीज़ पाने की है भी नहीं।
Middle East: Wolves will Hunt, and Pythons will Swallow
Middle East: Wolves will Hunt, and Pythons will Swallow
11 min
There is no morality really there. Though, being human beings, you want to frame it in moralistic terms. We want to kind of pretend that the action has some kind of moral basis to it. But there is no moral basis. Really, there is no moral basis.
The Israel–Iran Case: A Religious Struggle
The Israel–Iran Case: A Religious Struggle
12 min
What’s happening in the Israel–Iran case is mostly about religion. Israel–Iran relations were far more cordial until 1979, when Iran got a new Islamic constitution, and Iran declares Israel as the “Little Satan” because Israel is a Jewish country. Had both these countries been Muslim, would there be a strife? Had both these countries been Jewish, again, would there be a strife? But we want to close our eyes to the bare fact that religion gone wrong is the worst thing possible to human beings.
Shivling: Understanding Before the Debate
Shivling: Understanding Before the Debate
28 min
Now comes the deeper symbolism of Shivlinga. It says—look, if you have taken birth, then you are there in the body. But even while living in the body, you have to live as if you are without a body. So, the shape of the Yoni that you see in the Shivalinga is actually the world or the body, and this Lingam that you see in the middle of it is the Consciousness—the Consciousness which is located in the body.
Is Religion Merely Superstition?
Is Religion Merely Superstition?
11 min
Religion concerns itself with ‘Ego and its liberation!’ That’s all. In the name of religion, if you are talking about planets and stars, about fruits and vegetables, wear this, don’t wear that, eat this, don’t eat that, the house should face this direction, and a thousand other things that you associate with it, then all that is some kind of tribal superstition. Religion has nothing to do with these things.
देसी युवा, इज़राइल और हमास - जलवे धर्म के
देसी युवा, इज़राइल और हमास - जलवे धर्म के
18 min
धर्म का अर्थ होता है गहरी, अथक, निर्मम जिज्ञासा। सत्य से पहले कहीं भी ना रुकने का नाम धर्म है। भारत को ही नहीं पूरे विश्व को आज सच्चे धर्म की अध्यात्म की बहुत-बहुत जरूरत है। हम जहाँ खड़े हुए हैं वहाँ पर धर्म के अलावा अब पूरे विश्व को कोई नहीं बचा सकता।
कृष्णमूर्ति, फ्रायड, न्यूटन: इनमें कुछ समानता है क्या?
कृष्णमूर्ति, फ्रायड, न्यूटन: इनमें कुछ समानता है क्या?
7 min
वैज्ञानिक का काम है — मलहम तैयार करना, तरह-तरह के रसायनों का इस्तेमाल करके। लेकिन विज्ञान अपने आप में ये नहीं कहेगा कि इस मलहम को अब ले जाओ और लोगों को लगाओ। विज्ञान कहेगा: “ये मलहम तैयार है।” अब इसके बाद कोई चाहिए — जिसको मुक्ति की या करुणा की क़द्र हो और वो उसको ले जाकर के लोगों को मलहम लगा दे।
‘धर्मो रक्षति रक्षितः' यदि सच है, तो इतने महापुरुष मारे क्यों गए?
‘धर्मो रक्षति रक्षितः' यदि सच है, तो इतने महापुरुष मारे क्यों गए?
32 min
धर्म आपके शरीर की रक्षा थोड़ी करेगा। रक्षा शब्द की जब बात आती है तो ये समझना पड़ेगा कि आपको बड़ा ख़तरा क्या होता है। ख़तरे के संदर्भ में ही रक्षा शब्द का कुछ अर्थ है ना। ख़तरा हो तभी रक्षा की बात होती है। ख़तरा ही नहीं तो रक्षा शब्द अर्थहीन है। हाँ तो सबसे पहले तो ये जानना पड़ेगा कि हमें ख़तरा क्या है? एक मनुष्य को सबसे बड़ा ख़तरा क्या है? क्या मृत्यु? क्या किसी इंसान को सबसे बड़ा ख़तरा ये होता है कि उसका शरीर गिर जाएगा, मृत्यु हो जाएगी — ये होता है? किसी इंसान को सबसे बड़ा ख़तरा ये होता है कि मृत्यु आने से पहले वो मुक्त नहीं हो पाएगा। ये होता है ख़तरा।
हिन्दू धर्म में जातिवाद का ज़िम्मेवार कौन? || (2021)
हिन्दू धर्म में जातिवाद का ज़िम्मेवार कौन? || (2021)
38 min

का जाति:। जातिरिति च। न चर्मणो न रक्तस्य न मांसस्य न चास्थिनः। न जातिरात्मनो जातिर्व्यवहारप्रकल्पिता॥१०॥

शरीर (त्वचा, रक्त, हड्डी आदि) की कोई जाति नहीं होती। आत्मा की भी कोई जाति नहीं होती। जाति तो व्यवहार में प्रयुक्त कल्पना मात्र है।

~ निरालंब उपनिषद (श्लोक क्रमांक १०)

आचार्य प्रशांत: आज जो

इस्लाम और आतंकवाद: समस्या और समाधान
इस्लाम और आतंकवाद: समस्या और समाधान
37 min
पुरानी कबीलाई रवायतें और इस्लामिक दर्शन — ये दोनों बातें आपस में गुथ गई हैं। बहुत सारी चीज़ें, जिनको आम मुसलमान मज़हब समझता है, वो वास्तव में बस अरब की प्रथाएँ हैं। धर्म के नाम पर जो चल रहा है, वो हज़ारों-लाखों लोगों की मौत बन रहा है। इसके प्रतिरोध में पूरी दुनिया कट्टर होती जा रही है। संसद, न्यायालय, कार्यालय, शैक्षिक संस्थाएँ — हर जगह से मुसलमान नदारद है। इस पिछड़ेपन का कारण अशिक्षा और ग़रीबी है। इसे दूर करने के लिए ज्ञान का प्रकाश चाहिए — विज्ञान, इतिहास, तर्क में शिक्षा चाहिए।
धर्म — उन्नति का मार्ग या विनाश का हथियार?
धर्म — उन्नति का मार्ग या विनाश का हथियार?
22 min
धर्म की दिशा सबसे पहले भीतरी होती है। दूसरों को काफ़िर कहकर मार देना धर्म की दिशा नहीं है। धर्म जब गलत दिशा ले लेता है, तो ऐसी व्यापक तबाही करता है जिसकी कोई इंतहा नहीं होती। धर्म दोधारी तलवार है — अगर सही से समझा गया, तो ऊँचाइयों पर ले जाएगा; और नहीं समझा गया, तो ऐसा गिराएगा कि उठना असंभव हो जाएगा।
'धर्म हिंसा तथैव च' शास्त्रों में लिखा है?
'धर्म हिंसा तथैव च' शास्त्रों में लिखा है?
14 min
महाभारत में एक दर्जन जगह आया होगा 'अहिंसा परमो धर्म:,’ लेकिन उसमें साथ में आगे कहीं भी नहीं लिखा है कि 'धर्म हिंसा तथैव च।' 'धर्म हिंसा तथैव च' — अहिंसा तो परम धर्म है लेकिन हिंसा भी धर्म है; किसी भी ग्रंथ में कहीं पर भी नहीं लिखा हुआ है। इससे आपके रोंगटे खड़े हो जाने चाहिए कि ये कौन लोग हैं और ये कौन-सी सेंट्रलाइज़्ड जगहें हैं, जहाँ इस तरह की साज़िशें की जा रही हैं। जो उन्होंने जोड़ा है इसी से उनके मंसूबे पढ़िए — वो हिंसा करना चाहते हैं। यहाँ सीधे-सीधे धर्मग्रंथ के साथ पूरी खिलवाड़ ही कर दी गई है।
Religion and Violence
Religion and Violence
17 min
Religious violence is not about a handful of terrorists; it's an entire ecosystem of passive toxicity supported by lakhs of people. When toxicity is beamed to you on TV and social media, you don't resist. And one day, it explodes into active violence. This is because we're still animals who live without understanding ourselves — this is called ignorance. Therefore, we need wisdom literature to help us transcend our animal disposition.
धर्म के नाम पर आतंकवाद
धर्म के नाम पर आतंकवाद
9 min
लोकधर्म हमेशा मान्यताओं पर चलता है। एक आतंकवादी अपनी मान्यता के लिए किसी को मार रहा है, क्योंकि जो उसकी मान्यता, उसकी कहानी में विश्वास नहीं करेगा, वो गंदा आदमी है। बहुत सारे बुद्धिजीवी यही कहते हैं कि रिलीजन इज़ वन ऑफ़ द फॉरमोस्ट सोर्सेज ऑफ़ स्ट्राइफ़ एंड कॉन्फ्लिक्ट। धर्म एकता का स्रोत सिर्फ़ तब हो सकता है, जब वो व्यक्ति को सब विभाजनों से दूर कर दे। वेदांत ही शायद एक अकेला है जो ‘ग्रेट यूनिफ़ायर’ है, बाक़ी तो सब तोड़-फोड़ के अड्डे हैं।
To Understand The Quran, Go To It With A Clean Mind
To Understand The Quran, Go To It With A Clean Mind
7 min
Before you go to the Quran, you must first be in a condition to understand what it is saying. The center of the Quran is Tauheed – Oneness. The Quran can be understood only when you, as the ego-mind, are connected to the same source that blessed the Prophet. Otherwise, you will misinterpret it. You are so full of ego that you want to remain what you are. By remaining what you are, if you apply your intellect to the scriptures, you will obviously distort them.
असली तीर्थ क्या है?
असली तीर्थ क्या है?
8 min
संतों ने इतना समझाया कि असली तीर्थ है आत्मस्नान, और आत्मस्नान यदि नहीं हो रहा है, तो तुम गंदे ही रह जाओगे। अभी हमारी हालत यह है कि हम भीतरी गंदगी और बढ़ा रहे हैं धर्म के नाम पर। जब मन की मैल बचाकर रखनी होती है, तो फिर हम गंगा को भी बस मैला ही करते हैं। जब हम भीतर के पशु को समझकर उससे आज़ाद नहीं होते, तो बाहर वाले जितने पशु होते हैं, उनके साथ भी बड़ा अत्याचार करते हैं।
God, Allah, Ram: One Truth, Many Names
God, Allah, Ram: One Truth, Many Names
23 min
Some say 'God', others say 'Allah', and some say 'Ram'; all three refer to the same entity. If a name or sound reminds you of the nameless one, it's wonderful. The problem arises with self-appointed meanings. The purpose of religion is to convey the truth, not obstruct it. You have a variety of flutes, but there is one music. Religion is that music.
श्रीमद्भगवद्गीता दूसरा अध्याय २, श्लोक 15-24
श्रीमद्भगवद्गीता दूसरा अध्याय २, श्लोक 15-24
45 min
मनुष्य की देह होने भर से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं मिल जाता, यहाँ तक कि आपको जीवित कहलाने का अधिकार भी नहीं मिल जाता। सम्मान इत्यादि का अधिकार तो बहुत दूर की बात है, ये अधिकार भी नहीं मिलेगा कि कहा जाए कि ज़िन्दा हो।
Is Secularism Possible Without Religion?
Is Secularism Possible Without Religion?
5 min
A secular person is one who does the right thing irrespective of his religious association. And if you want this, then you should be deeply religious. Because in secularism, you want equanimity, a certain detachment, respect towards divergent opinions, and non-violence; but who teaches these things? Religion. Therefore, if secularism is in strife with religiosity, it means both are misplaced. The religiosity is fake, and the secularism is shallow.
धर्म का विकृत व प्रचलित रूप है "लोकधर्म"
धर्म का विकृत व प्रचलित रूप है "लोकधर्म"
31 min
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण को बोलना पड़ता है, “अर्जुन! ये सीधा-सीधा श्लोक है बिल्कुल इन्हीं शब्दों में है; अर्जुन! जब तक तुम वेदों की सकाम ऋचाओं से ऊपर नहीं उठते, जब तक जो काम्य कर्म हैं तुम उनसे बँधे हुए हो, तब तक तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आएगी।” उपनिषदों में कामनाओं की बात नहीं है, पर मंत्रों में है, वहाँ सब कुछ कामनागत ही है। सब प्राकृतिक देवी, देवताओं से कहा जा रहा है हमारी ये कामना पूरी कर दो वो कामना, और कामनाएँ सारी वही हैं पुरानी कामनाएँ — बेटा दे दो, ज़मीन दे दो, हमारे पशुओं के ज़्यादा दूध आए और हमारे शत्रुओं को आग लगाकर के मार दो, यही हैं। ये लोकधर्म है। और वास्तविक धर्म — निष्कामता।
महाकुंभ में आचार्य प्रशांत की पुस्तकें क्यों जलाई गईं?
महाकुंभ में आचार्य प्रशांत की पुस्तकें क्यों जलाई गईं?
56 min
महाकुंभ जैसे पावन पर्व तथा गंगा तट के किनारे श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ५०० धार्मिक ग्रंथों को जलाया गया। ऐसा आक्रमण कोई पहली बार नहीं हुआ है। हम खिलजी की बात करते हैं कि उसने नालंदा आकर के विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय जला दिया था और हम उसे भारत पर हुए अत्याचार की तरह देखते हैं। दरअसल, यह वास्तविक धर्म और विकृत लोकधर्म के बीच का संग्राम है जो भारत राष्ट्र और महान सनातन धर्म का भविष्य तय करेगा।
सनातन धर्म के सामने सबसे बड़ा खतरा क्या?
सनातन धर्म के सामने सबसे बड़ा खतरा क्या?
17 min
धर्म की बुनियाद धर्मग्रंथ होते हैं। वे बताते हैं कि कैसे जीना है और जीव की सच्चाई क्या है। जिसे तुम हिंदू कहते हो, उसका अपने धर्म की केंद्रीय किताबों से कोई संबंध ही नहीं रह गया है। सनातन धर्म को अन्य धर्मों से नहीं, बल्कि इस वक्त सबसे बड़ा खतरा झूठे धर्मगुरुओं से है, जो भीतर-भीतर सनातन धर्म की नींव खोद रहे हैं। सनातन धर्म में हिंदुओं को किसी दूसरे धर्म से बाद में खतरा होगा; पहला खतरा उन्हें हिंदुओं से ही है, क्योंकि जिसे तुम हिंदू कहते हो, वह केवल परंपरा और अंधविश्वास को मानने वाला हिंदू है।
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