वक्ता: जिसे तुम विश्वास कह रहे हो वह दो तरह का होता है: पहला, विश्वास और दूसरा श्रद्धा, और इन दोनों में ज़मीन आसमान का अंतर है। इसको ध्यान से समझिएगा। विश्वास का अर्थ होता है कि मैंने जाना नहीं है। विश्वास जो है, दो तरह का होता है, पहले का अर्थ होता है कि मैंने जाना नहीं, बस मान लिया। तुम सब विज्ञान के छात्र हो?
श्रोता: हाँ, सर।
वक्ता: क्या तुम मान लेते हो जो किताबो में लिखा है? प्रयोगशाला है, प्रयोगशाला में जाकर उसे सत्यापित भी करते हो? किसी ने कोई थ्योरम दिया तो इसका प्रमाण माँगते हो। विश्वास तो नहीं किया ना? जो दूसरा विश्वास है, वह है श्रद्धा। श्रद्धा का अर्थ होता है मैंने जाना। जो भी विश्वास, श्रद्धा बनेगा वह सच्चा होगा। उसमें धोखे का सवाल नहीं उठता क्यूँकी तुमने जाना है। जिसमें विश्वास होगा कि दूसरों ने कहा है, वह टूटेगा। उसमें तो धोखा भी होगा और दुःख भी मिलेगा। तो इसलिए मानो नहीं जानो। यह बात याद रखोगे?
श्रोता: हाँ, सर।
वक्ता:
मानो नहीं जानो।
हमारी ज़िन्दगी मानने पर चलती आ रही है। मैं तुमसे सिर्फ़ एक बात कर रहा हूँ कि मानो नहीं, जानो। इस शक्ति का इस्तमाल करो फिर देखो कितना मज़ा आता है।




