स्पिरिचुअलिटी अपने आप में अलग कोई फ़ील्ड थोड़ी होती है, तुम जिस भी क्षेत्र में हो, उसको गहराई से जान लो — यही अध्यात्म है। अध्यात्म रोशनी है, आपको आध्यात्मिक होना पड़ेगा, अगर किसी क्षेत्र में आपको सफल होना है। जो दुनिया को जान रहा है और ख़ुद को जान रहा है, उपनिषद् कहते हैं, वो है असली चैंपियन। यह मस्त जिएगा, ये इसी ज़िंदगी में बिल्कुल बादशाह की तरह जिएगा। इसे कोई नहीं बाँध सकता — जीवनमुक्त।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, मेरा नाम कृष्णम वर्मा है। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में सेकंड ईयर का स्टूडेंट हूँ। मेरा आपसे सवाल है कि मेरा इंटरेस्ट हमेशा से स्पिरिचुअलिटी में रहा है। पर जब भी मैं स्पिरिचुअलिटी में ज़्यादा इंडल्ज हो जाता हूँ तो मेरा ध्यान स्टडी से थोड़ा घट जाता है और मैं थोड़ा ऐम्बिशस हो जाता हूँ। तो मैं जानना चाहता हूँ कि क्या मैं सही चाह रहा हूँ।
आचार्य प्रशांत: नहीं कुछ नहीं, गलत चाह रहे हो सब। जो भी पढ़ रहे हो उसको गहराई से समझना ही अध्यात्म है। तुम आइदर ऑर में आ गए। या तो यह या तो वो, 'अथवा'। तुम मुझे देख रहे हो अभी, या इस कमरे में जो रोशनी है उसको देख रहे हो? किसको देख रहे हो?
प्रश्नकर्ता: आपको।
आचार्य प्रशांत: पर मुझे क्या देख पाओगे अगर रोशनी नहीं होगी। अध्यात्म रोशनी है। उसको कभी नहीं देखा जाता। वो अपने आप में कोई फ़ील्ड नहीं होती। होता है पर उसकी मौजूदगी में जो कुछ देख रहे होते हैं वो साफ़ दिखाई देता है। कोई यहाँ बैठ के यह नहीं कहेगा कि वह रोशनी को देखने आया है। पर रोशनी ना हो तो कुछ नहीं दिखाई देगा, अध्यात्म वो चीज़ है।




