कबीर माया मोहिनी माहि मिलै न हाथ। मन उतारी झूठ करुँ लागी डौलै साथ।।
~ कबीर साहब
आचार्य प्रशांत: जब फरीद की बात कर रहे थे तो क्या बोला था फरीद ने, "जो तू मेरा होय रहे, सब जग तेरा होय।" "जो तू मेरा होय रहे, सब जग तेरा होय।"
बिलकुल वही बात यहाँ भी है कि जब तक उसके पीछे भागोगे, तुम्हें नहीं मिलेगी। जब अपने हो जाओगे, या फरीद की भाषा में होगा, तो उसके हो जाओगे, तब वही सब जिसके पीछे-पीछे भाग रहे थे, अब वो तुम्हारे पीछे भागेगा।
तुम्हारे पीछे भागने से अर्थ ये नहीं है कि बहुत सारा रुपया पैसा मिल जाएगा। ‘पीछे भागेगा' से अर्थ ये है कि पहले वो मालिक था, तुम नौकर थे। अब तुम मालिक होगे, वो तुम्हें डॉमिनेट नहीं कर पाएगा। "कबीर माया मोहिनी" – मोहिनी मतलब जो आकर्षित करे। "माँगी मिले न हाथ" जिसने माँगा वो खाली हाथ ही गया। जो जितना माँगता रहता है, उसे उतना ही कम मिलता है। जितना माँगा जाता है, उतना ही कम मिलता है।
तृष्णा का स्वभाव ही यही है। एम्बिशन का स्वभाव ही यही है, ठीक है?
ऑब्जेक्ट ऑफ चेज़ जिसके पीछे जा रहे हैं – वस्तु, वो बदल सकती है। व्यक्ति – जिसके पीछे जा रहे हैं, वो बदल सकता है, लेकिन ‘पीछे जाना’ कभी नहीं बदलता। है न? कुछ-न-कुछ है जिसके पीछे जाना ज़रूर है।







