जैसा उपनिषद् के ऋषि उसे चाहते थे, वैसा होना चाहिए, सच्चा भारतीय युवा — ज्ञानी, साहसी, निडर, मज़बूत। ऋषियों को पता था कि अगर उपनिषद् के साथ रहोगे तो कोई कमज़ोरी तुम्हें नहीं पकड़ेगी। जिसके पास ज्ञान और जिज्ञासा है, वो कभी कमज़ोर पड़ नहीं सकता। वेदान्त के अलावा कोई चारा नहीं, एक नया भारत पैदा ही करना पड़ेगा, जो पूरे विश्व को बदल डालेगा।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम उदय मेहता है। मैं आजकल देख रहा हूँ कि युवाओं में बहुत हीनभावना बढ़ रही है और समय मिलता है और कनाडा भाग जाते हैं, देश छोड़ देते हैं, आत्म गौरव जैसी चीज़ नहीं है। मैंने उपनिषद् का एक श्लोक पढ़ा था, वो मेरे ज़हन में बैठ गया है। मैं पढ़ना चाहता हूँ।
युवा स्यात् साधु युवाध्यायकः। आशिष्ठो दृढिष्ठो बलिष्ठः॥
युवा बनो — अच्छे व्यवहार वाला युवा, अध्ययनशील, विनम्र, दृढ़ निश्चयी और मज़बूत बनो।
~ तैत्तिरीयोपनिषद्
तो आचार्य जी, मैं ये जानना चाहता हूँ कि सच्चा भारतीय युवा कैसा होना चाहिए?




