कोई आपसे बोले कि कोई आदमी आपसे मिलने आ रहा है और वो धार्मिक है, तो तत्काल बताइए, आप क्या कल्पना करते हैं? कोई ज्ञानी आ रहा है? कोई विद्वान मिलने आ रहा है? तत्काल मन में क्या छवि आती है? एक भावुक-सा आदमी आएगा। यही हमारे साथ सबसे बड़ी गलत बात हुई, हम भावना का देश बन गए, और उसी भावना को फिर हमने धर्म भी बना लिया। और भावना से जो धर्म चलता है, वो फिर अंधभक्ति का धर्म होता है। यही दुर्भाग्य हो गया भारत का, ज्ञान का कोई सम्मान नहीं। जबकि धर्म का अर्थ ही ज्ञान होता है।
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प्रश्नकर्ता: आपको तो ज़्यादा पता है, अभी कंडीशन क्या चल रही है। मेरे एक रिलेटिव हैं जो बिहार में अभी सरकारी स्कूल में शिक्षक बने हैं इंग्लिश के। हालाँकि वो भी इंग्लिश के शिक्षक बने, मेरे लिए ये हँसी की बात है। मेरे रिलेटिव हैं, मेरे भाई हैं। उन्होंने बताया कि क्लास में जब वो स्कूल गए, तो उनको एक दिन चौथी की गणित की शिक्षिका ने सवाल किया कि “सर, एक सवाल का जवाब दीजिएगा, 12 में मैं कितना गुणा करूँ कि 48 आए? मुझे नहीं आता है, सर।” ये हाल है।
अभी जब वो शिक्षक बने तो वो बता रहे हैं, तो उन्हें छठी, सातवीं और आठवीं के बच्चों को इंग्लिश पढ़ाना है, किसी को कुछ नहीं आता है। और ये हर साल स्कूल, छोटे लेवल से लेकर कॉलेज के लेवल तक जो हम ‘उत्पाद’ पैदा कर रहे हैं, यही आगे जाकर।
आचार्य प्रशांत: आपकी जो पहचान है, एक भारतीय के तौर पर, वो है ‘एक भावुक धार्मिक आदमी’ की। पूरी दुनिया में भारतीय माना जाता है,




