सनातन धर्म को बचाना हो, तो एक सीधा उपाय || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2022)

प्रश्नकर्ता: मेरा एक सवाल आपसे है आचार्य जी कि आज कि समय में कौन असली हिन्दू है? उसके बारे में आप मुझे ज़रा बताइए। किसको मैं असली हिन्दू बोलूँ?
आचार्य प्रशांत: जो मुक्ति मात्र को जीवन का लक्ष्य बनाता है, वेदान्त में दीक्षित है वो हिन्दू है। उनके अलावा जो अपनेआप को हिन्दू बोलते हैं, कोई नहीं हिन्दू हैं। मैं जहाँ से देखता हूँ, इस समय भारत देश में अगर हज़ार भी हिन्दू हों, तो बहुत बड़ी बात है। भारत देश में इस समय एक हज़ार भी हिन्दू नहीं होंगे और तुर्रा ये कि हिन्दू लोग शोर मचाते हैं कि हिन्दू धर्म ख़तरे में है।
प्र: जी, मैं आपसे पूछने ही वाला था कि क्या हिन्दू धर्म सच में ख़तरे में है या कोई भी धर्म ख़तरे में है क्या?
आचार्य: हिन्दू धर्म है कहाँ जो ख़तरे में होगा? कुछ होना चाहिए न ख़तरे में होने के लिए? मैं पूछता हूँ है कहाँ? वैसे ही आप कहते हैं हिन्दू धर्म ख़तरे में है, मैं कह रहा हूँ हिन्दू धर्म है कहाँ? रीति-रिवाज़ हैं, मान्यताएँ हैं, अन्धविश्वास हैं, एक खिचड़ी सी, अधपकी सी संस्कृति है, जिसको लोग सर पर बैठाए रहते हैं। हिन्दू धर्म है कहाँ? हिन्दू होना कोई सस्ती बात होती है क्या?
हिन्दू होने के लिए बड़ी पात्रता चाहिए। ऐसे ही नहीं हिन्दू हो जाते आप कि शर्मा जी और वर्मा जी के घर में लड़का पैदा हुआ है, तो हिन्दू हो ही गया है, काहे कि बाप का नाम शर्मा है। वर्मा जी की लड़की तो हिन्दू हो ही गयी क्योंकि बाप का नाम वर्मा है। ऐसे नहीं हिन्दू हो जाते।
जन्म से तो शरीर मिलता है और शरीर तो पशुओं को भी मिलता है। जन्म से धर्म कैसे मिल सकता है? धर्म तो पाना पड़ता है और बहुत कम हिन्दू हैं; मैं कह रहा हूँ देश में अगर एक हज़ार भी निकलें, तो मुझे बड़ी प्रसन्नता होगी, राहत होगी; जिन्होंने सचमुच हिन्दू होने का सौभाग्य अर्जित किया हो। हिन्दू होना तो जैसे एक पदवी है, एक प्रशस्ति-पत्र है जो अर्जित करना पड़ता है।






