मीरा अगर पुरुष होती, तो भी क्या श्रीकृष्ण को पति ही मानती? तुम्हें समझ में नहीं आ रही बात। ठीक है भाई दैहिकता है, शारीरिकता है, लेकिन फिर भी हम मूल्य देंगे, सम्मान देंगे कि इतना तो करा कि किसी जीवित पुरुष के जाकर के आलिंगन में नहीं बँध गई। उन्होंने कहा, "मुझे ऊँचे से ऊँचा चाहिए भले ही अभी वो जीवित ना हो, भले ही मुझे सामने शरीर–रूप में दिखाई ना देता हो।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम सारांश है। मेरा एक प्रश्न था। अभी आपने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं एक जगह, कि जो लोग मुझे देही रूप में स्वीकार करते हैं और मानते हैं, वे लोग भ्रमित हैं। फिर मन में प्रश्न आता है कि मीराबाई जब कहती थीं, "मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो ना कोई। जाके सर मोर मुकुट मेरो पति सोई।" तो वहाँ तो लगता है कि वो एक साकार रूप को श्रीकृष्ण के रूप में दर्जा दे रही हैं।
संत तुलसीदास जी को भी देखें तो वो भी साकार सगुण राम की भक्ति करते थे।
आचार्य प्रशांत: आप कब से हो गीता-समागम में?
प्रश्नकर्ता: डेढ़ से दो साल।
आचार्य प्रशांत: डेढ़-दो साल से हो गए तो तुलसीदास के ही कितने वक्तव्यों को मैंने 50 बार उद्धृत किया है। वो आपके कान में नहीं पड़े कभी? “राम ब्रह्म परमारथ रूपा।” सौ बार हम बात करते हैं, तो वो नहीं पढ़ा?






