आत्मविश्वास बढ़ाने का अचूक तरीका || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता१: आचार्य जी प्रणाम। आचार्य जी, मैं पंजाब से हूँ। मेरा सवाल लो सेल्फ़स्टीम, प्रोकास्टिनेशन (कम आत्मसम्मान, टालमटोल) पर्सनल-प्रोफेशनल फ़्रन्ट (व्यक्तिगत-व्यावसायिक अग्रता) पर है।
आचार्य जी, फ़्रॉम लास्ट सो मैनी ईयर्स, आई एम लिसनिंग टू सो मैनी स्प्रिचुअल गुरूज़ एण्ड इन्सपिरेशन वीडियोज़ आई एम सीइंग (अन्तिम बहुत से सालों से मैं बहुत से आध्यात्मिक गुरुओं को सुन रहा हूँ और प्रेरक वीडियो देख रहा हूँ), बट डीपडाउन (परन्तु भीतर गहराई में) मुझे फ़ील (अनुभव) हो रहा है कि नथिंग इज़ गैटिंग चेन्ज्ड इनसाइड (भीतर कुछ भी नहीं बदल रहा है)।
तो मैं समझता हूँ, उसमें मेरी ही ग़लती है। इनसाइड (अन्दर) कुछ ऐसा होगा जैसे विवेक नहीं है या कुछ चीज़ें नहीं हैं और जैसे मैंने ओशो जी को सुना है। मुझे लगा थोड़ा–सा स्प्रिचुअल टच (आध्यात्मिक स्पर्श) आएगा, थोड़ा–सा मैं चेन्ज (परिवर्तित) होऊँगा लेकिन मैं वैसा-का-वैसा ही हूँ। उसमें कुछ बैड हैबिट्स (बुरी आदतें) भी इनवॉल्व (शामिल) हैं, मेरी लाइफ़ स्टाइल (जीवनशैली) को लेकर।
तो दो–एक महीने पहले मेरा एक फ़्रेन्ड (मित्र) थे, उन्होंने मुझे आपकी वीडियो दिखायी। वो ओशो सन्यासी हैं। तो मैंने आपको थोड़ा सुना, तो मुझे थोड़ा स्पार्क (चिंगारी) लगा। तो मैं लास्ट (पिछले) मौसम में आना चाहता था, बट आई कुड नॉट मेक इट (परन्तु मैं आ नहीं सका) तो मैं अभी इसमें आया हूँ।
तो होता क्या है, जैसे मैं कुछ काम करने की कोशिश करता हूँ,









