श्रीकृष्ण भी तुम्हीं में हैं, और मीरा भी। इन्हें मिलने दो, फिर आफ़तों में भी नाचोगे जैसे मीरा नाचती थी। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, तुम मौज में रहोगे। मीरा होना अनिवार्य है; जीवन मिला ही इसीलिए है कि हमारी मीरा और हमारे श्रीकृष्ण मिल सकें। जिनमें यह मिलन नहीं होता, वे सूखे, उदास जीते हैं। समझ ही श्रीकृष्ण है; जब समझ जागेगी, तब मीरा नाचेगी। यही मिलन, यही योग, यही जीवन जीने की कला है।
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प्रश्नकर्ता: आप मीरा जी के प्यार को क्या नाम देंगे? आप उसे भक्ति बोलेंगे या उसे श्रीकृष्ण के प्रति प्यार कहेंगे?
आचार्य प्रशांत: तो जसप्रीत (प्रश्नकर्ता) हम अपनी बात करें। मीरा हुए बिना, मीरा को जान नहीं पाओगे। बाहर-बाहर से देखोगे, दूर-दूर से समझने की कोशिश करोगे, कुछ बात बनेगी नहीं। जो तुम हो नहीं, उसको तुम जान सकते नहीं। मीरा क्या है और श्रीकृष्ण से क्या संबंध है उसका, इसके लिए मीरा ही होना पड़ेगा।
तुमने जो कभी नहीं खाया, उसका स्वाद तुम्हें कैसे बताया जाएगा शब्दों से? तुमने जो पानी कभी पीया नहीं, वो प्यास कैसे बुझाएगा तुम्हारी? और उसके बारे में मैं कुछ बता भी रहा हूँ कि H2O और दिन भर बताऊँ और सब समझा दूँ, कौन-कौन से बॉन्ड होते हैं, कॉवेलेंट बॉन्ड क्या होता है, हाइड्रोजन बॉन्ड क्या होता है, तो प्यास बुझ जाएगी? मीरा और श्रीकृष्ण के बारे में तुमको दुनिया भर की कहानी सुना दूँ तो होगा क्या? मीरा और श्रीकृष्ण होना पड़ेगा न। इसीलिए कहा कि अपनी बात करो कि, ‘हम कहाँ पर खड़े हैं’ वही असली सच है।
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