लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव आइ.आइ.एस.सी बेंगलुरु (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। आचार्य जी, ऐसा कहते हैं कि एक लड़का और एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते। मैंने भी यह देखा है कि कहीं-ना-कहीं कुछ छुपी हुई मंशा रहती है या इरादे रहते हैं।
इसी सिलसिले में एक पॉडकास्ट मैंने सुना, हालाँकि वह यूएस बेस्ड (आधारित) है, लेकिन उसकी रीच (पहुँच) काफ़ी यूएस के युवा में और भारत के युवा में भी है। उसमें इस चीज को मान्यता दी गई, एग्री (सहमत) किया गया कि हाँ ऐसा ही है, कभी दोस्त नहीं हो सकते। और लड़कियों को सम्बोधित करते हुए यह कहा गया कि तुम्हारे साथ कोई लड़का है, तुम्हारी हेल्प करता है, तुम्हारी बातें सुनता है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह तुमसे मित्रता ही रखना चाहता है। तो और अगर तुम ऐसा सोचती हो तो तुम बेवकूफ़ हो। और यह ’फ्रेंड् जोन’ भी है तो यह काफ़ी एक तरह से स्टिगमेटाइज्ड (लांछित) है। लड़कों के लिए कहा जाता है कि यह वीकनेस जोन है और या तो इससे निकलो, या तो कहीं और मामला सेट करो।
तो इस पर मेरा यह प्रश्न है कि यह किस हद तक सच है। और अगर सच है तो यह क्यों इतना मुश्किल है?
अचार्य प्रशांत: क्या मुश्किल है?
प्र: दोस्त रह पाना।
आचार्य: दोस्त रह पाना मुश्किल नहीं है। दोस्त की हमारे पास एक छवि है, उस तरह की छवि पर लड़के-लड़की की दोस्ती का खरा उतर पाना मुश्किल है। दोस्त तो हो सकते हैं पर वैसे दोस्त नहीं हो सकते जैसी हमने दोस्ती की मन में छवि बना रखी है। देखो, उसका नाम ही क्या है — लड़की। ठीक है न? उसके नाम में ही उसका लिंग बैठा हुआ है, है न?






