कुछ नहीं होता उस कंटेंट में। इसीलिए सबको लगता है कि वो जो बकवास है, वो तो हम भी बना सकते हैं। तो हम भी यूट्यूबर बन जाएँ। वो वहाँ बैठा हुआ है, वो फूहड़ *कॉमेडी* कर रहा है। उससे अच्छी तो मैं कर सकता हूँ, तो मैं ही कर देता हूँ।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। मुझे आपसे इंट्रोड्यूस मेरे देवर ने कराया था। तो वो कभी नहीं आए अब की सेशन में, लेकिन मैं ज़रूर आई हूँ, क्योंकि मैं बैंगलोर से हूँ। मेरा आपसे प्रश्न है कि जो आज की नई पीढ़ी है, वो अपना करियर यूट्यूबर बनने में ज़्यादा देखती है, क्योंकि उसमें पैसा है और फेम है।
तो फेम कहाँ तक जायज़ है, या पैसा कहाँ तक जायज़ है उनके करियर के लिए? कुछ नहीं है, ये भी पाँच, दस, बीस होंगे जिनका आज के लड़कों ने देख लिया है यूट्यूब पर तो कितने करोड़ चैनल हैं, उनको कहाँ पैसा मिल रहा है, कहाँ फेम मिल रही है?
प्रश्नकर्ता: नहीं, जैसे वो दिखाते हैं, व्लॉगर्स वग़ैरह अपनी गाड़ियाँ हैं। जो फेमस ओरिजिन के बहुत सारे सब्सक्राइबर्स हैं।
आचार्य प्रशांत: जो फेमस हैं, वो तो किसी भी क्षेत्र में पैसा कमा रहे हैं। कोई भी क्षेत्र हो, उसमें जो ऊपर के 10-15 लोग होते हैं, वो तो पैसा कमाते ही हैं और प्रसिद्धि भी पाते हैं। कोई भी क्षेत्र हो।




