NEET घोटाले केवल परीक्षा की गड़बड़ी नहीं, बल्कि युवाओं की रीढ़ तोड़ने वाली व्यवस्था है। समस्या किसी परीक्षा पद्धति में नहीं, इंसान की बेईमान नीयत में है। तकनीक, फोन या सिस्टम अच्छे-बुरे नहीं होते; असली प्रश्न यह है कि उनका उपयोग करने वाला व्यक्ति भीतर से कितना ईमानदार और जागरूक है।
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प्रश्नकर्ता: सर, क्या कहना है, जैसे इवेंट किया जा रहा है, इतने लोगों तक बात।
आचार्य प्रशांत: बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत प्यार से बुलाया है मुझे लुधियाना वासियों ने, पंजाब वासियों ने। और मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि ज़िंदगी में जो ऊँचाई है, उसकी ओर कुछ इशारे कर सकूँ। झूठ से लड़ने की, भेड़ियों को काटने की, सब में हम एक साथ हिम्मत जगा सकें। बस इसीलिए यहाँ पर आया हूँ। बाक़ी अभी सत्र होगा। आप भी उसमें बैठिए। आप देखेंगे।
प्रश्नकर्ता: क्या नया सोच लेकर आए हो? लोग आपको सुनने आए हैं। क्या बताना चाहते हो लोगों के लिए, क्या मैसेज देना चाहते हो लुधियाना वासियों को?
आचार्य प्रशांत: मैं कोई होता ही नहीं हूँ मैसेज देने वाला। मैं तो आईना दिखाने आया हूँ, और लोग अगर अपनी ज़िंदगी की सच्चाई देखेंगे, तो ख़ुद अपनी ज़िंदगी बदलेंगे, ख़ुद आगे बढ़ेंगे, ख़ुद हिम्मत उठेगी, ख़ुद ऊँचे उठेंगे। हर आदमी के भीतर एक जज़्बा होता है कि अच्छी ज़िंदगी जिए, सच्ची ज़िंदगी जिए, बिना डरे जिए। सबके भीतर होता है न? लेकिन हम बहुत तरह की चीज़ों में फँसे होते हैं और फिर थोड़ा-न-थोड़ा ख़ुद को ही धोखा दे लेते हैं। जो चीज़ ठीक नहीं भी चल रही होती है, उसको बोलते हैं ठीक चल रही है। जहाँ झूठ होता है, उसको सच का नाम दे लेते हैं। मेरा काम है आना और आपको आपकी ही ज़िंदगी से रूबरू कराना। बाक़ी काम आपका अपना है, आप ख़ुद करोगे।




