ये खास अनुभव आपको हुए हैं? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव आइ.आइ.एस.सी (IISc) बेंगलुरु (2022)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक प्रश्न मेरा भी है। हम अक्सर लोगों से बात करते हैं और अक्सर बात होती है कि आचार्य जी को ज्ञान तो बहुत है, शास्त्रीय ज्ञान। पुस्तकें बहुत पढ़ी हैं उन्होंने; पर एक्सपीरियंस (अनुभव) नहीं है। और एक्सपीरियंस की बात बहुत होती है। कहते हैं कि ज्ञान हो न हो, एक्सपीरियंस होता है तो बात ठीक रहती है। अक्सर ये तर्क इतनी ज़ोर से आते हैं; कबीर साहब का भी ज़िक्र होता है इसमें।
'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।
बोलते हैं कि ज्ञान हो न हो, एक्सपीरियंस की बात कर रहे हैं कबीर साहब, कि एक्सपीरियंस होना चाहिए। पढ़-पढ़कर क्या हो जाएगा? और मुझसे भी पूछते हैं कि आप तो आचार्य जी के साथ रहते हो, क्या एक्सपीरियंस होते हैं आपको, बताओ। तो मैं बड़े असमंजस में पड़ जाता हूँ। समझ में नहीं आता, क्या बोलूॅं?
आचार्य प्रशांत: नहीं, बता दिया करो न! (श्रोतागण हँसते हैं) ये जो ऐसे बोल रहे हैं कि आचार्य जी ने पढ़ाई-लिखाई तो खूब कर ली है, लेकिन उन्हें अनुभव नहीं है, इन्हें धोखा हो रहा है। मैंने बहुत पढ़ा लिखा भी नहीं है। (श्रोतागण फिर हँसते हैं) तुम्हें कुछ भी कैसे पता; तुम्हें कैसे पता कि मैंने बहुत पढ़ा है? तुम्हें कैसे पता, अच्छा बताओ।
तुम्हें ये भी कैसे पता कि जिसको तुम अनुभव बोलते हो, जो भी तुम्हारी परिभाषा है, वो मुझे नहीं है? वो भी कैसे पता? तुम मुझे कितना जानते हो?



