आत्मज्ञान के बिना समाज, पर्यावरण या किसी भी बाहरी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं, क्योंकि हर संकट की जड़ मनुष्य की चेतना में है। बाहरी सुधार, नीतियाँ या अभियानों की अपनी भूमिका है, लेकिन वे मूल कारण को नहीं बदलते। इसलिए सबसे आवश्यक कार्य है स्वयं को बदलना और सत्य के प्रति गंभीर होना। जो व्यक्ति सत्य के प्रति उदासीन है, उससे स्वीकृति या मान्यता की अपेक्षा करना भी व्यर्थ है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
** प्रश्नकर्ता:** गुड इवनिंग, सर। मेरा नाम अंबिका है और मैं जयपुर, राजस्थान से हूँ। राजस्थान में बहुत सारे ऐसे इश्यूज़ हैं, जो मैं देखती हूँ। जैसे कि अभी भी घूँघट प्रथा चल रही है। मैं उन सब के बारे में अब आपसे डिस्कस मतलब नहीं बताना चाहूँगी, बिकॉज़ देयर आर अ लॉट ऑफ़ थिंग्स दैट आइ वुड लाइक टू से। सिविक सेंस ऑल्सो। वहाँ पर बहुत गुटखा और ये सब भी खाते हैं। बट व्हाट आई वुड लाइक टू टेल यू कि वहाँ पर जो वॉटर क्राइसिस है, वह काफ़ी ज़्यादा हद तक बढ़ चुका है और जो ग्राउंडवॉटर जो यूनिट्स हैं, वो अभी पूरी तरह से एक्सप्लॉइट हो चुकी हैं, लाइक 70%। तो उसको कैसे केटर किया जा सकता है?
और साथ ही साथ जो क्लाइमेट क्राइसिज़ हैं, जैसे टियर-वन सिटीज़, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, यहाँ पर तो इन सबके बारे में बातें की जाती हैं, बट टियर-टू, टियर-थ्री सिटीज़ के अंदर इनके ऊपर कोई डिस्कशन्स नहीं होते हैं। इन फ़ैक्ट, वीगनिज़्म भी काफ़ी बड़ा मुद्दा है। तो इन सब चीज़ों को कैसे केटर किया जा सकता है? एंड वी, ऐज़ राजस्थानीज़, हाउ कैन वी केटर दैट?




