तीन दिन से ज़्यादा किसी काम में मन नहीं लगता || आचार्य प्रशांत, आर.डी.वी.वी. के साथ (2023)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी नमस्ते। मेरा प्रश्न ये है कि हमारा किसी काम में मन न लगना या हम किसी कार्य की शुरुआत करते हैं तो उस कार्य को दो या तीन दिन से अधिक नहीं कर पाते। इस स्थिति में हम क्या कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: बेटा, किसी भी काम में तो मन लगना भी नहीं चाहिए न।
प्र: जी सर।
आचार्य: किसी भी, किसी भी माने कुछ भी, यादृच्छिक,रैंडम (बिना सोचे समझे), किसी भी काम में क्यों मन लगे?
प्र: नहीं सर, जिस काम को करना चाहते हैं।
आचार्य: जिस काम को करना चाहते हो, उसको समझा है क्या कि उस काम की चाहत कहाँ से उठ रही है? हम नहीं जानते न कि हमें क्या काम करना है। हमारे द्वारा चुने गए सारे हमारे लक्ष्य ऐसे ही होते हैं कि चार लोग एक तरफ़ को जा रहे थे, तो हमने कहा कि हम भी उधर को चल पड़ेंगे। तो उसको अपना लक्ष्य बना लिया। कोई तारीख़ आ गयी, मान लो परीक्षा के निकट की तारीख़ आ गयी है। या कुछ और हो गया है। एक जनवरी आ गया है या पंद्रह अगस्त आ गया है। तो हमने उससे सम्बन्धित कुछ लक्ष्य बना लिया। है न?
हमारे अपने नहीं होते लक्ष्य, हमारे लक्ष्य बहुत बाहरी होते हैं। वो स्थितिवश होते हैं। उन्हें परिस्थितियों ने पैदा करा होता है। तो परिस्थितियों से हमारे लक्ष्य आ जाते हैं और परिस्थितियाँ चार दिन में बदल जाती हैं। तो अब पुराना लक्ष्य कैसे तुम्हें सुहाता रहेगा? जो तुम्हें लक्ष्य मिला था, वो लक्ष्य तुम्हें एक परिस्थिति ने दिया था।



