महिला घर बैठी रहे तो बुरा क्या? || आचार्य प्रशांत, अ. भा. आयुर्विज्ञान संस्थान – AIIMS, नागपुर (2022)

प्रश्नकर्ता: सर, घर पर रहना कोई बुरी बात नहीं हुई न?
आचार्य प्रशांत: बेटा, बात अच्छे-बुरे की नहीं है। बात इसकी है कि तुम किसलिए हो? वो काम अगर घर पर बैठ कर हो रहा है, तो कर लो।
प्र: सर, व्हाट्स द वे (रास्ता क्या है)?
आचार्य: तुमको यहाँ पर क्लास अटेंड करनी है, घर पर बैठना बुरा काम तो है नहीं, घर जाओ। यहाँ क्यों बैठे हो? अच्छे-बुरे की बात नहीं है न, बात इसकी है कि तुम किसलिए हो? तुम अभी किसलिए हो? तुम डॉक्टर बनने के लिए हो। तो घर पर क्यों बैठोगे? ठीक वैसे, जैसे इस संस्थान में होने का तुम्हारा एक उद्देश्य है, उसी तरह से इस पृथ्वी पर होने का तुम्हारा एक उद्देश्य है।
अब ये तो सबको पता चल जाता है कि अगर कैंपस में हो तो यहाँ होने के कारण कुछ कर्तव्य हैं। लेकिन ये शिक्षा हमको कभी दी नहीं जाती कि अगर तुम इस पृथ्वी पर हो तो वहाँ भी होने के कारण तुम पर कुछ कर्तव्य हैं। तो फिर हम कहते है, ‘हम घर बैठे हैं तो बुरा क्या है?’ अभी भी घर जाकर बैठ जाओ, बुरा क्या है? यहाँ पर क्यों हैं हम फिर?
भई, घर पर तुम कुछ ऐसा कर रहे हो जो तुम्हारे जीवन को सौंदर्य देगा, तुमको मुक्ति देगा, तो बेशक घर पर बैठो। बात घर पर बैठने या ना बैठने की नहीं है। पर तुम घर पर बैठ कर क्या करते हो, ये मुझसे ज़्यादा तुमको पता है।



