आखिर क्यों एक महिला की काबिलियत से ज़्यादा उसके शरीर पर ध्यान दिया जाता है?

एक महिला खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतती है, लेकिन उसे ऑनलाइन हैरसमेंट, फ़ेक अकाउंट्स और आपत्तिजनक तस्वीरों का सामना करना पड़ता है। सदियों की वर्जनाओं ने हमें स्त्री को सिर्फ़ देह के तल पर देखने का आदी बना दिया है, उसकी काबिलियत या गहराई से कोई सरोकार नहीं रहता। यही पैटर्न गाड़ी, नौकरी और शादी जैसे रोज़मर्रा के फैसलों में भी दिखता है। यह कोई विकृति नहीं, बल्कि इन्हीं वर्जनाओं की स्वाभाविक परिणति है।
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प्रश्नकर्ता: मैं बस एक ऐसी लड़की बनकर रहना चाहती हूँ जिसे डेडलिफ्ट करना पसंद है। यह कहना है 21 साल की एक भारतीय पावरलिफ्टर का, जिसे देश के लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। लेकिन चर्चा उसकी जीत की नहीं हुई। उसे ऑनलाइन सेक्शुअल हैरेसमेंट, फेक अकाउंट्स और एआई से बनी आपत्तिजनक तस्वीरें झेलनी पड़ीं। आखिर क्यों एक महिला की काबिलियत से ज़्यादा उसके शरीर पर ध्यान दिया जाता है?
आचार्य प्रशांत: किसी की निजी ज़िंदगी में, विशेषकर सेक्शुअल लाइफ में क्या चल रहा है, यह झांकने को हमेशा तैयार रहते हैं। उससे बस यही पता चलता है कि हमारी ज़िंदगी में भी सत्य से कहीं-कहीं, कहीं ज़्यादा सेक्स है। बस यही है और कुछ नहीं है।
और वो सेक्स भी बस एक गुब्बारे की तरह है। एक अरमान है जो बहुत बड़ा है, जिसके भीतर कुछ नहीं है। उसको बड़ा किसने कर दिया? लोकधार्मिक मान्यताओं ने। कैसे बड़ा कर दिया? उसका दमन कर-कर के। कोई जानवर सेक्स को लेकर के उतना सोचता नहीं, उतना ऑब्सेस्ड



