वक्ता: सवाल है किसी पर बहुत विश्वास करते है और विश्वास टूट रहा हो तो क्या करना चाहिए ? हर विश्वास टूटेगा ही टूटेगा। विश्वास अगर किया है तो तुम चोट खाने की तैयारी पहले ही कर के बैठ गए हो। विश्वास का अर्थ समझते हो क्या होता है ? विश्वास का अर्थ होता है कि जाना नहीं, बस यकीन कर लिया। समझा नहीं, बस यकीन कर लिया। वो यकीन कैसे भी आ सकता है। वो यकीन ऐसे आ सकता है कि बिल्कुल ही सुनी सुनाई बात है मान ली। तो वहाँ आमतौर पर ये स्पष्ट हो जाता है कि ये विशवास ‘अन्धविशवास’ है। उसमें तुम आमतौर पर फसते नहीं हो। तुम समझ ही जाते हो कि ये अन्धविशवास है। पर वहाँ भी पक्का नहीं है। कई बार वहाँ भी फंस जाते हो कि सब लोग कह रहे हैं तो ठीक होगा, मान लो। अब सब लोग कह रहे हैं तो ठीक ही होगा, ये बड़ी असंभावना है। आमतौर पर जो बात सब लोग कह रहे हों, वो ठीक होती ही नहीं।
दूसरे तरह का विश्वास ये है कि मुझे लग रहा है तो ठीक ही होगा। यहाँ भी गड़बड़ है क्योंकि हमें जो लग रहा होता है, उस लगने के पीछे कारण भी दूसरों ने ही दिए हुए होते हैं। तुम्हें एक विशेष प्रकार की नौकरी बड़ी अच्छी लग रही होती है। और क्यों लग रही होती है? क्योंकि तुम्हारे मन में ये बात बैठा दी जाती है कि ऐसी ही नौकरी अच्छी होती है। बात यहाँ तक जा रही होती है कि अगर कोई तुम्हें एक चेहरा है जो बड़ा सुन्दर लग रहा होता है, तो उसके पीछे भी कारण संस्कारों के ही होते हैं, कारण सामाजिक ही होते हैं। इसी कारण अलग-अलग देशो में और अलग-अलग समय के लोगों को अलग-अलग तरह के चेहरे पसंद आते हैं क्योंकि उन सबको अलग-अलग तरह के घुट्टी पिलाई गयी है। तो वहाँ पर अगर तुम कहो कि मुझे लग रहा है तो ठीक ही होगा, तो बात जमी नहीं। ये विश्वास भी टूटेगा ही टूटेगा। तुम्हें जो आज अच्छा, बड़ा सुन्दर, बड़ा आकर्षक लगा था, वो कल को नहीं लगेगा। और अगर दूसरों पर निर्भर होकर कुछ मान लिया, अपने मन पर निर्भर होकर कुछ मान लिया और विश्वास कर लिया, तो वह भी टूटेगा।
अन्धविशवास- विश्वास, इनसे आगे भी कुछ होता है। इनसे आगे होता है जानना। उस जानने को बड़े नाम दिए गए हैं, कोई चेतना कह लेता है, कोई श्रद्धा कह लेता है, कोई बोध कह लेता है, कोई प्रेम कह लेता है। लेकिन वहाँ पर फिर ठोकर लगने की गुंजाइश नहीं होती। ये तुमने कहा कि विश्वास करते हैं और विश्वास टूटता है। अन्धविशवास है टूटेगा, दूसरों से आया है। अपने आप पर विश्वास कर रहे हो, अपनी बुद्धि और अपनी चालाकियों पर, वो भी टूटेगा। क्योंकि परोक्ष रूप से दूसरों से आया है। ये जो तीसरा है ये नहीं टूट सकता क्योंकि ये बोध है। ये तुमने स्वयं जाना है। ये असली है इसकी टूटने की कोई सम्भावना ही नहीं है।




