भ्रष्ट जीवन का लक्षण है भ्रष्ट भाषा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)

आचार्य प्रशांत: सही भाषा, एक सही जीवन का ‘सहायक-फल’ है।
श्रोता: सही जीवन बता दीजिये क्या है?
आचार्य जी: ग़लत जीवन क्या है, पहले वो समझते हैं! ग़लत जीवन वो है, जो तुम जीते हो।
श्रोता: वही जानना चाहता हूँ।
आचार्य जी: ग़लत जीवन वो है, जिसमें तुम्हारे पास दिनभर में पढ़ने के लिए आधे घंटे का भी समय नहीं है। ग़लत जीवन समझ में आया? ग़लत जीवन वो है, जिसमें तुम्हारे आस-पास में तुम्हें ये बोलने वाला कोई भी नहीं है कि तू कैसी बातें कर रहा है? ग़लत जीवन वो है! ग़लत जीवन वो है जिसमें तुमने अपने दोस्तों का दायरा बिल्कुल अपने ही जैसा बना रखा है कि मैं जैसा हूँ सारे आस-पास के लोग भी वैसे हों तो सब ठीक है।
कौन, किसको रोशनी दिखायेगा? कौन, किसको प्रेरित करेगा? कौन, किसको आईना दिखायेगा? ग़लत जीवन वो है जिसमें मैं जहाँ पर भी बैठा हुआ हूँ, मैं लगातार दबंग हूँ।



