युद्ध, मुनाफाखोरी और हिंसा का मूल कारण अहंकार है, जो अपने स्वार्थ के लिए दूसरों ही नहीं, स्वयं को भी नष्ट कर सकता है। समाज अपनी बुराई को स्वीकार नहीं करता और खुद को अच्छा मानकर धोखे में जीता है। इसी अज्ञान से शोषण, युद्ध और अन्याय चलते रहते हैं। समाधान केवल आत्म-अवलोकन और भीतर की सच्चाई को ईमानदारी से देखने में है।
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प्रश्नकर्ता: मेरा जो प्रश्न है, वो अभी के चल रहे ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जो युद्ध चल रहा है, उससे संबंधित है। एक तरफ तो हम देख रहे हैं कि इस युद्ध का इस्तेमाल जो न्यूज़ टीवी चैनल्स हैं वो अपने टीआरपी मुनाफे के लिए कर रहे हैं। दूसरी तरफ लोग हैं जो इसी तबाही का इस्तेमाल कर रहे हैं पैसा कमाने के लिए, जिसका एक उदाहरण हम देख रहे हैं, एलपीजी सिलिंडरस्, उनकी कालाबाज़ारी जो चल रही है।
तो आचार्य जी, हमारे अंदर ऐसा क्या है जो ऐसी त्रासद और दुखद स्थिति में भी केवल अपना ही मुनाफा देख रहा है?
आचार्य प्रशांत: हमारे अंदर ऐसा क्या है, इसमें कोई गोपनीय बात तो है नहीं। हमारे अंदर वही है जो है नहीं, पर उसका दावा पूरा रहता है कि मैं ही मैं हूँ, मैं ही मैं हूँ, दूसरा कोई नहीं। और उसका नाम भी कोई राज़ नहीं है, उसका नाम रटते-रटते तो…
क्या नाम है उसका?
प्रश्नकर्ता:




