दिवाली वह दिन है जब हम अपने जीवन को बहुत ध्यान से देखें और पूछें: हम में इतना डर क्यों है? क्योंकि जो एक बात श्रीराम के साथ बिल्कुल सामने आती है, वह है निडरता। उनके पास क्या था, कुछ भी नहीं। निहत्थे, बिना किसी संपदा के नंगे पांव दो राजकुमार जंगल में, और भिड़ किससे गए? दशानन से। दिवाली पर्व है जब हम अपने आप से पूछें कि आज के रावण कौन हैं और हम भिड़ क्यों नहीं पाते? और रावण आवश्यक नहीं है हमेशा कोई व्यक्ति ही हो। रावण एक सोच भी हो सकती है, एक प्रकार का ट्रेंड, कल्चर भी हो सकता है जिसने हमको दबा रखा हो। भीतर अपने थोड़ा रामत्व तो लाइए, वह उत्सव होगा।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आचार्य जी आजकल त्योहारों का माहौल है, तो जानना था, भारत में त्योहारों का मतलब क्या है?
आचार्य प्रशांत: माने क्या? समझा के बोलो।
प्रश्नकर्ता: त्योहारों का माहौल है आजकल, तो इस विषय में जानना था कि भारत में त्योहारों का मतलब क्या है?
आचार्य प्रशांत: भारत में, माने, आम जनता के लिए, किसके लिए?
प्रश्नकर्ता: जी, आम जनता के लिए।




