सुंदरता शरीर, ग्लैमर या सामाजिक स्वीकृति से नहीं आती। अधिकांश लोग आकर्षण, प्रसिद्धि और बाहरी छवि को सुंदरता समझ लेते हैं, जबकि उनके निर्णयों के पीछे अक्सर प्रतिष्ठा, मान्यता और अहंकार की चाह काम कर रही होती है। वास्तविक सुंदरता स्वाभाविकता, सरलता और अहंकार से मुक्त होने में है। जब व्यक्ति स्वयं को किसी आदर्श छवि में ढालने के बजाय अपनी प्रकृति को स्वीकार करता है, तभी वह दूसरों को भी बिना स्वार्थ और अपेक्षा के देख पाता है।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। अभी रिसेंटली एक न्यूज़ आई थी कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो जो हैं फुटबॉल प्लेयर, उन्होंने अभी स्टेटमेंट दिया था कि वो 1000 गोल करना चाहते हैं अपने करियर में। अभी तक वो 965 तक पहुँचे हैं और अपने गोल से 35 गोल पीछे हैं। उनका यह स्टेटमेंट था, वो अगस्त 2024 का था। लेकिन फिर भी वह अपने गोल पर कायम रहना चाहते हैं। क्या यह उनका जो गोल है महत्वाकांक्षा से प्रेरित अभिव्यक्ति है, या यह श्रेष्ठता का प्रदर्शन है? इसमें थोड़ा कन्फ्यूज़न मुझे हो रहा है।
आचार्य प्रशांत: तुम बताओ।
प्रश्नकर्ता: जैसे, वो एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं। यह सब जानते हैं।
आचार्य प्रशांत: इतना बड़ा नाम न हो, इतना प्रचलित खेल न हो, तो कुल मिलाकर वह व्यक्ति जो कह रहा है, वह वैसी सी बात है कि ये कह रहे हैं, “मैं रिटायर होने से पहले 1 करोड़ जमा कर लेना चाहता हूँ।” अब क्या बोलें इसमें? परमार्थ है, यह क्या है? पर वहाँ पर





