Atma

जहाँ ज्ञान है, वहाँ विद्रोह भी होगा।  (गुरु गोविन्द सिंह जी पर)
जहाँ ज्ञान है, वहाँ विद्रोह भी होगा। (गुरु गोविन्द सिंह जी पर)
30 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, कल गुरु गोविन्द सिंह जी की जयन्ती है, तो हम उन्हें आदर्श रूप में कैसे स्थित करके अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं? जैसा कि आपने भी बोला है कि युवा के पास ऊर्जा तो है लेकिन सही आदर्श नहीं हैं, हमने आदर्श ग़लत लोगों

सौ बार गिरे हो, तो भी याद रहे: स्वभाव अपना उड़ान है, घर अपना आसमान है
सौ बार गिरे हो, तो भी याद रहे: स्वभाव अपना उड़ान है, घर अपना आसमान है
51 min
टूटफूट ही वो जरिया है जो आपको बताएगा कि आपके पास कुछ ऐसा भी है जो टूट नहीं सकता। जब सब बिखरा पड़ा होगा उसके बीच ही अचानक आपको पता चलेगा, अरे एक ऐसी चीज है जो नहीं बिखरी बड़ा मजा आएगा। उसके बाद यही लगेगा कि इसको और बार-बार पटको और जितना बार-बार पटको और जितना यह नहीं टूटता उतना इसमें विश्वास और गहरा होता जाता है और आदमी और खुलकर खेलता है। यह सबके पास है। यह सबके पास है। हमें इसका पता इसीलिए नहीं है क्योंकि हमने इसको कभी आजमाया ही नहीं।
संयोगों के खेल को आत्मा नहीं बनाते || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
संयोगों के खेल को आत्मा नहीं बनाते || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)
5 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा प्रश्न सच्ची ख़ुशी को लेकर है। जैसे मैंने कोई कामना करी, और अगर वो पूरी नहीं होती है, तो उससे जो फ़्रस्ट्रेशन, जो दिमाग में मम्बलिंग या ओवरथिंकिंग (अधिक सोचना) होती है, बाद में इसको लेकर एक वॉइड (खालीपन या रिक्तता) बन जाता है

मृत्यु के समय शरीर से क्या निकलता है?
मृत्यु के समय शरीर से क्या निकलता है?
13 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे एक चीज़ पूछनी थी कि जैसे आपकी चेतना है या ओशो रजनीश की चेतना, हम ये मान के चल रहे हैं कि आप लोगों की चेतना एक आम चेतना से बहुत ऊपर है। तो क्या हम ये मान के चलें जब ऐसे धर्मगुरु शरीर छोड़ते हैं

आप दुनिया को बर्बाद होने से कैसे रोक सकते हैं
आप दुनिया को बर्बाद होने से कैसे रोक सकते हैं
16 min

प्रश्न: आचार्य जी, हम पूर्णता के भाव तक कैसे पहुँचे?

आचार्य प्रशांत: पूर्णता के भाव तक पहुँचे कैसे, शुरुआत यहाँ से करते हैं। पूर्णता कोई भाव है ही नहीं, तो उस तक पहुँचने का भी कोई प्रश्न नहीं है।

आप (प्रश्नकर्ता) कहते हैं कि आपने मेरा लिखा पढ़ा है, थोड़ा

Does Maya Really Exist?
Does Maya Really Exist?
25 min

Questioner: Acharya Ji, a good discussion happened yesterday in which many seekers participated and shared their understanding of Prakṛiti, Puruṣha and other things.

During the discussion, it was put that Prakṛiti, Puruṣha, Māyā, are mere concepts and that one is pure Ātman, never threatened and

The One Thing You Must Never Lose
The One Thing You Must Never Lose
12 min

Acharya Prashant: Chandogya Upanishad — Chapter 3, part 11, verses 2 and 3:

न वै तत्र न निम्लोच नोदियाय कदाचन । देवास्तेनाहंसत्येन मा विराधिषि ब्रह्मणेति ॥ ३.११.२ ॥

na vai tatra na nimloca nodiyāya kadācana | devāstenāhaṃsatyena mā virādhiṣi Brahmaṇeti || 3.11.2 ||

Never does this happen there; never did

Where’s the Difference Between Vedanta's Atma and Buddha’s Shunyata?
Where’s the Difference Between Vedanta's Atma and Buddha’s Shunyata?
5 min
Buddha's silence on Ātmā corresponds to Śūnyatā, showing no interest in Īśvara. Vedānta similarly shows no concern for these concepts. Acharya Shankar explains that as long as the Jīva perceives itself as Truth, Īśvara becomes necessary. Īśvara holds value only while the Jīva considers itself real. Once one identifies as Ātmā, Īśvara disappears, leaving only Ātmā, also known as Brahman: "Ayam atmā brahman.
Why Do the Wise Call the Aatman 'The Enjoyer'? – Kathopanishad
Why Do the Wise Call the Aatman 'The Enjoyer'? – Kathopanishad
7 min
The atman is called 'the enjoyer' in the sense of the watcher, just as in a cinema hall you enjoy the show. How do you enjoy the show? By leaping into the screen? In the cinema hall, you enjoy the show by relaxing in your seat. That's what the atma does—it keeps relaxing in its seat. Even suffering is enjoyed in this detached manner, much like how we can enjoy tragic scenes in a movie. For the atma, there is no tragedy, as all suffering is false.
How to Achieve Your Highest Potential?
How to Achieve Your Highest Potential?
4 min

Questioner: Acharya ji, in Bhagavad Gita, Sri Krishna says, “I am the highest in all the vidyas.” He says, “I am the Everest in mountains”; that way he denotes all the powers. He says, “I am Atman, the highest thing, absolutely”.

There he does not say the potential but

Why Your Mind Should Stay 25 Forever?
Why Your Mind Should Stay 25 Forever?
2 min

Acharya Prashant: If one is living rightly, then youth is the permanent state of one's mind. The body can grow old. The mind cannot grow old if one has lived rightly. Youth, that way is your default state.

The 'Atma' has no age; it is ageless; the mind has the

विचारों के चलने को कैसे रोके?
विचारों के चलने को कैसे रोके?
9 min

आचार्य प्रशांत: कुछ पाने का विचार होगा, कुछ खोने का विचार होगा, और तो कोई विचार होता नहीं। विचार बड़ी नीरस चीज़ होती है, उबाऊ। न जाने तुम कैसे इस उबाऊ चीज़ के साथ इतना समय गुज़ार लेते हो।

विचार ने कभी कुछ और कहा है तुमसे? एक ही बात

संसार की नश्वरता समझ नहीं आती? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
संसार की नश्वरता समझ नहीं आती? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
11 min

ईक्षेत विभ्रममिदं मनसो विलासं दृष्टं विनष्टमतिलोलमलातचक्रम्। विज्ञानमकामुरुधेव विभाति माया स्वप्नस्त्रिधा गुणविसर्गकृतो विकल्प:।।“

यह जगत् मन का विलास है, दीखने पर भी नष्टप्राय है, अलातचक्र (लुकारियों की बनेठी)– के समान अत्यन्त चंचल है और भ्रम मात्र है— ऐसा समझे। ज्ञाता और ज्ञेय के भेद से रहित एक ज्ञानस्वरूप आत्मा

आप कौन हैं? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
आप कौन हैं? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
12 min

दृष्ट्वा मां त उपव्रज्य कृत्वा पादाभिवन्दनम्। ब्रह्माणमग्रत: कृत्वा पप्रच्छ: को भवानिति।।

“मुझे देखकर सनकादि ब्रह्माजी को आगे करके मेरे पास आये और उन्होंने मेरे चरणों की वन्दना करके मुझसे पूछा कि आप कौन हैं?”

~ हंस गीता, श्लोक २०

इत्यहयं मुनिभि: पुष्टस्तत्त्वजिज्ञासुभिस्तदा। यदवोचमहं तेभ्यस्तदुद्धव निबोध मे।

प्रिय उद्धव! सनकादि परमार्थतत्त्व

Bondage, freedom and fear of death || Acharya Prashant, on Yogavasishtha (2016)
Bondage, freedom and fear of death || Acharya Prashant, on Yogavasishtha (2016)
15 min

आज्ञाभयसंशयात्मगुणसङ्कल्पो बन्धः ।

ājñābhayasaṁśayātmaguṇasaṅkalpō bandhaḥ

Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts, fear, etc.

~ Niralamba Upanishad, Verse 25

✥ ✥ ✥

Acharya Prashant (AP): “Bondage is to imagine that Ātman has qualities like doubts or fear etc. Bondage is to imagine that Ātman has doubt or

Made mistakes? It's ok! || Acharya Prashant, with IIT-Hyderabad (2022)
Made mistakes? It's ok! || Acharya Prashant, with IIT-Hyderabad (2022)
14 min

Questioner (Q): Sir, my question is about handling pressure—the pressure of expectations. Sir, when God in Bhagavad Gita says that a human being is bound to make mistakes, why society is not ready to accept mistakes? Everybody is judged in the end by only results. How would you work if

There is no God or Atma within you || Acharya Prashant (2020)
There is no God or Atma within you || Acharya Prashant (2020)
16 min

Questioner (Q): So I had your advice and I got some books in terms of getting different perspectives. It might be a bit weird in a way question but I kind of wonder, when people are praying for God somewhere and also you're mentioning something about the myth of the

Sir, are you liberated? || Acharya Prashant (2022)
Sir, are you liberated? || Acharya Prashant (2022)
22 min

Questioner 1 (Q1): What I want to know is, suppose with all the discussions and with our own thought process, to some extent we understand Vedānta or spiritualism. But understanding is not enough. We have understood what to do—whether it is to reach the stage of bliss, or to separate

आत्मा माने क्या? शुद्ध धर्म कैसा? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)
आत्मा माने क्या? शुद्ध धर्म कैसा? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)
38 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न है कि भगवान महावीर आत्मा को मानते हैं और भगवान बुद्ध आत्मा को अस्वीकार करते हैं। एक आत्मा को सत्य बोलते हैं और एक असत्य बताते हैं तो इन दोनों के बीच में अंतर क्या है?

आचार्य: जब कोई बात हमको बताई जाती है

You need freedom from the cage, not lessons in flying || Acharya Prashant, on Vedanta (2021)
You need freedom from the cage, not lessons in flying || Acharya Prashant, on Vedanta (2021)
6 min

हिरण्मये परे कोशे विरजं ब्रह्म निष्कलम् । तच्छुभ्रं ज्योतिषं ज्योतिस्तद्यदात्मविदो विदुः ॥

hiraṇmaye pare kośe virajaṃ brahma niṣkalam tacchubhraṃ jyotiṣaṃ jyotistadyadātmavido viduḥ

In a supreme golden sheath the Brahman lies, stainless, without parts. A Splendor is That, It is the Light of Lights, It is That which the self-knowers know.

दिल और दुनिया के मारे, इतने दुखी क्यों ये बेचारे? || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2021)
दिल और दुनिया के मारे, इतने दुखी क्यों ये बेचारे? || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2021)
15 min

आचार्य प्रशांत: हम जो कुछ भी करते हैं पूरी जो हमारी मानसिक व्यवस्था है, मनुष्यों ने जो भी व्यवस्था स्थापित करी वो ले-देकर के या तो अनुभव हो रहे दुख को मिटाने के लिए होती है या आशंकित दुख को दूर रखने के लिए।

तो माने हमारी सारी गतिविधियाँ, हमारे

किसी व्यक्ति का मूल्य कैसे नापें? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2020)
किसी व्यक्ति का मूल्य कैसे नापें? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2020)
18 min

आचार्य प्रशांत: वो जो है, ठीक है? जो सब उपनिषदों का ध्येय है, प्रतिपाद्य विषय है, वो ऐसा है जैसे दूध में मक्खन और मक्खन का भी शिरोभाग, शिरोबिन्दु। मक्खन के ऊपर रहने वाला सारभाग है वो,ठीक है? छाछ, छाछ पर मक्खन, और मक्खन में भी सबसे ऊपर?

तो पहली

कहाँ है तुम्हारा बल? पराक्रमी बनो ! || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
कहाँ है तुम्हारा बल? पराक्रमी बनो ! || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
10 min

आचार्य प्रशांत: गिरीश मोहन हैं, कह रहे हैं उपनिषद् में बहुत पहले पढ़ा था, “नायमात्मा बलहीनेन लभ्यो”। आपकी बातें सुनता हूँ तो वो श्लोक याद आ गया, मुझे समझाइए कि आप ताकत पर, बल पर इतना ज़ोर क्यों देते हैं ?

गिरीश मोहन! बल तो चाहिए न, नहीं तो बह

बाज़ार में अकेले मत निकलना || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
बाज़ार में अकेले मत निकलना || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
7 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी जैसा आपने बताया कि जो भी कुछ मन के दायरे में आता है वो सब छिलके हैं, यानि असत्य है। पर असत्यों को हटाने के लिए भी जो डिस्क्रिशन (विवेक) होता है या फ़िर जो कर्म होता है कि ये करना है ये नहीं करना है, वो

श्राद्ध प्रथा: विवाद और भ्रम || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
श्राद्ध प्रथा: विवाद और भ्रम || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
9 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। हमारे विस्तृत परिवार में श्राद्ध करने को बड़ा महत्व दिया जाता है। श्राद्ध के दिनों में पंडित को बुलाकर खाना खिलाना, यज्ञ-वगैरह करना आदि। मैं यह नहीं करती हूँ पर डरती हूँ कि क्या मैं अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध न करके उनके साथ कुछ अनादर

आत्मा को खा गए, इसलिए परमात्मा बनाना पड़ा || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
आत्मा को खा गए, इसलिए परमात्मा बनाना पड़ा || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
13 min

आचार्य प्रशांत: परमात्मा वास्तव में आत्मा-मात्र है। चूँकि ‘आत्मा’ शब्द का हमने बहुत दुरुपयोग कर लिया — हम मन को ही आत्मा कहने लग गए, हम जीवात्मा को ही आत्मा कहने लग गए — तो फिर ‘आत्मा’ शब्द को इंगित करने के लिए कहना पड़ा ‘परम आत्मा’; जैसे कि कई

आठ अरब लोग, इनमें असली कौन? || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी बॉम्बे के साथ (2020)
आठ अरब लोग, इनमें असली कौन? || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी बॉम्बे के साथ (2020)
8 min

प्रश्नकर्ता: दुनिया की इस आठ-अरब की आबादी में आत्मस्थ आदमी की पहचान कैसे हो?

आचार्य प्रशांत: तो गौरव, आत्मस्थ आदमी की पहचान तुम्हें करनी क्यों है? आत्मस्थ आदमी की पहचान तुम करना चाहते हो, इसका मतलब आत्मस्थ आदमी कुछ खास होता होगा! तुम ये तो कहते नहीं, कि “आठ-अरब की

ईश्वर से मांगो नहीं, स्वयं को सौंप दो || आचार्य प्रशांत (2017)
ईश्वर से मांगो नहीं, स्वयं को सौंप दो || आचार्य प्रशांत (2017)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अक्सर हम ईश्वर से कुछ माँगते रहते हैं और न मिलने पर दुखी हो जाते हैं। क्या हमें दुखी होना चाहिए?

आचार्य प्रशांत: माँगने का अंजाम ही यही होना है — ठुकराये जाओगे। वो बड़ा निष्ठुर है। सूफ़ियों ने उसे कसाई तक कहा है। सीना फाड़कर दिल

उसे आकाश जैसा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत, अवधूत गीता पर (2020)
उसे आकाश जैसा क्यों कहा गया है? || आचार्य प्रशांत, अवधूत गीता पर (2020)
6 min

अन्तर्हितच्क्ष स्थिरजड़्गमेषु ब्रह्मात्मभावेन समन्वयेन। व्यप्त्याअव्यवच्छेदमसड़्गमात्मनो मुनिनर्भस्त्वं विततस्य भावयेत्।।

(अध्याय १, श्लोक ४२)

राजन, जितने भी घट-मठ आदि पदार्थ हैं वो चाहे चल हों, अचल हों, उनके कारण भिन्न-भिन्न प्रतीत होने पर भी वास्तव में आकाश ‘एक और अपरिछिन्न है’। वैसे ही चर-अचर जितने भी सूक्ष्म-स्थूल शरीर हैं उनमें आत्मा रूप

आत्मा, परमात्मा और जीवात्मा - इनका अंतर साफ़ समझिए || आचार्य प्रशांत (2023)
आत्मा, परमात्मा और जीवात्मा - इनका अंतर साफ़ समझिए || आचार्य प्रशांत (2023)
11 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। एक छोटी सी कन्फ़्यूज़न थी कि अब तक मैं समझता था कि जिसको हम लोग जीवात्मा कह रहे थे वो आत्मा है। और जिसको हम आत्मा कह रहे थे वो परमात्मा है, जिसे हम सत्य कहते थे। ये मेरी अपनी समझ थी।

तो मुझे अभी तक

सिर्फ़ यहाँ झुकना तुम || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
सिर्फ़ यहाँ झुकना तुम || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
22 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हाल ही में वीडियो प्रकाशित हुआ है जिसका नाम है — “हिन्दू इतने देवी-देवताओं को क्यों पूजते हैं?” तो उसमें भी आपने यही समझाया था कि पूजन या पूजा तो देवी-देवताओं की ही हो सकती है, क्योंकि ब्रह्म की हम पूजा कर नहीं सकते। उसी सिलसिले में

आज्ञा मानना भी बंधन है || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
आज्ञा मानना भी बंधन है || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
37 min

“आज्ञा मानना बंधन है। भय बंधन है।”

~निरालंब उपनिषद्

आचार्य प्रशांत: आज्ञा का अर्थ है– विशेषाधिकार किसी का, किसी के पीछे सुनना, किसी को बहुत ऊँचा स्थान दे देना, किसी को प्रथम मान लेना। आत्मा और आज्ञा साथ-साथ नहीं चलते। आत्मा किसी की नहीं सुनती। आत्मा किसी की आज्ञा पर

जानते हो तुम सचमुच क्या चाहते हो? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
जानते हो तुम सचमुच क्या चाहते हो? || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)
8 min

आचार्य प्रशांत: सब नाम, सब उपाधियाँ, सब रूप सीमित होते हैं। जो कुछ भी सीमित है, वो एक मामले में धोखा है। किस मामले में? वो तुम्हारी गहनतम अभिलाषा पूरी नहीं कर पाएगा, पर वो तुम्हारे सामने खड़ा इसी तरह से हो जाता है जैसे वो बड़ा महत्त्वपूर्ण हो—और महत्व

वास्तविक मुक्ति, और आत्मा का विचार || आचार्य प्रशांत, अवधूत गीता पर (2017)
वास्तविक मुक्ति, और आत्मा का विचार || आचार्य प्रशांत, अवधूत गीता पर (2017)
9 min

आचार्य प्रशांत: दत्तात्रेय कह रहे हैं कि जो व्याप्य और व्यापक दोनों से मुक्त है, उस एक — बस एक कहा है — उस एक के प्रति यदि तुम सफल हो, तो फिर तुम कैसे कहोगे कि आत्मा प्रत्यक्ष है कि परोक्ष है।

बात मीठी है और बात इतनी–सी ही

क्या आत्मा को ही इस्लाम में रूह और ईसाइयत में स्पिरिट कहते हैं? || आचार्य प्रशांत (2021)
क्या आत्मा को ही इस्लाम में रूह और ईसाइयत में स्पिरिट कहते हैं? || आचार्य प्रशांत (2021)
6 min

प्रश्नकर्ता: क्या आत्मा को ही इस्लाम में रूह और क्रिश्चियनिटी (ईसाइयत) में स्पिरिट कहते हैं?

आचार्य प्रशांत: नहीं, आत्मा न रूह है, न सोल है, न स्पिरिट है; आत्मा आत्मा है। अंग्रेज़ी में आत्मा के लिए एक विशिष्ट शब्द होता है – ‘सेल्फ़’; ‘सोल’ नहीं, ‘सेल्फ़’। और आत्मा वेदांत में

विश्व का सत्य क्या है, आत्मा का उद्देश्य क्या है? || आचार्य प्रशांत (2017)
विश्व का सत्य क्या है, आत्मा का उद्देश्य क्या है? || आचार्य प्रशांत (2017)
13 min

प्रश्नकर्ता: यूनिवर्स (संसार) का सत्य क्या है? मेरी आत्मा का उद्देश्य क्या है?

आचार्य प्रशांत: ये सवाल मत पूछो, ये पता लगाओ कि ये सवाल तुम्हारे मन में अरे आए नहीं हैं घुसेड़े गए हैं। तुम पूछ रहे हो सोल पर्पज़ क्या है, आत्मा का उद्देश्य क्या है? उद्देश्य बाद

ये सीधा-सादा बंदा तो बहुत टेढ़ा निकला || आचार्य प्रशांत (2021)
ये सीधा-सादा बंदा तो बहुत टेढ़ा निकला || आचार्य प्रशांत (2021)
11 min

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, आप बार-बार कहते हैं ऊँचे उठो, जो बड़े-से-बड़ा है उसको करो। जीवन में कोई बहुत बड़ा लक्ष्य होना चाहिए, कभी भी छोटा होना स्वीकार मत कर लो। आप ऐसा बोलते हैं।

लेकिन बहुत सारे ज्ञानियों ने ख़ुद को कभी दास कहा है, कभी पाँव तले की घास

अवतारों की सच्चाई जानो || आचार्य प्रशांत (2021)
अवतारों की सच्चाई जानो || आचार्य प्रशांत (2021)
11 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, धर्म के किस्से-कहानियों में एक नायक की तरह, एक सर्व शक्तिमान वीर या ज्ञानी की तरह बार-बार अवतारों का उल्लेख आता है। अवतार का क्या मतलब होता है? नरसिंह अवतार ने प्रहलाद को बचाया, वामन अवतार छोटे थे, बौने थे, परशुराम क्रोधित रहते थे, मत्स्य अवतार मछली

जिन मंदिरों में दलित नहीं जा सकते || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
जिन मंदिरों में दलित नहीं जा सकते || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
9 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मैं आपको कुछ समय से सुन रहा हूँ। मेरे एक मित्र से मेरी बातचीत हो रही थी, जो कि दलित वर्ग से हैं। तो मैंने उन्हें कहा कि, 'आप आचार्य जी की पुस्तकें पढ़ें, वीडियोज़ देखें, वेदांत की तरफ जाएँ; जो मूल शिक्षा है सनातन धर्म

बेचारी आत्मा, जो भूत बन गई (कमज़ोर दिल वाले न देखें) || आचार्य प्रशांत (2023)
बेचारी आत्मा, जो भूत बन गई (कमज़ोर दिल वाले न देखें) || आचार्य प्रशांत (2023)
43 min

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।

जब एक भटकती आत्मा अचानक सामने आ गई || आचार्य प्रशांत (2023)
जब एक भटकती आत्मा अचानक सामने आ गई || आचार्य प्रशांत (2023)
21 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा प्रश्न ये है कि जैसे न आत्मा जन्म लेती है न मरती है, तो जो आम धारणा यह है कि उसकी आत्मा भटक रही है या आत्मा अतृप्त है। तो जैसा कि आप बताते हैं कि आत्मा तो जन्मती ही नहीं है, न

न आत्मा शरीर छोड़ती है, न शरीर में प्रवेश करती है (अंधविश्वास समाप्त हो) || आचार्य प्रशांत (2022)
न आत्मा शरीर छोड़ती है, न शरीर में प्रवेश करती है (अंधविश्वास समाप्त हो) || आचार्य प्रशांत (2022)
11 min

प्रश्नकर्ता: जो श्रीमद्भगवद्गीता की दो मूलभूत बातें हैं, उनको जोड़कर सवाल है। श्रीमद्भगवद्गीता में ये कहा गया है कि आत्मा एक शरीर बदलकर दूसरा शरीर धारण करती है। पिछले दो-सौ वर्ष में जो मानव जनसंख्या है, वो क़रीब एक बिलियन से बढ़कर अब क़रीब आठ बिलियन होने को है। तो

आत्मा तुम्हारी नियति है और गुरु उसका प्रदर्शक || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
आत्मा तुम्हारी नियति है और गुरु उसका प्रदर्शक || आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर (2014)
13 min

गुर परसादी हरि मंनि वसिआ पूरबि लिखिआ पाइआ।।

~ नितनेम (अनंदु साहिब)

बाइ गुरुज़ ग्रेस द लॉर्ड अबाइड्स विदिन द माइंड, एंड वंस प्री-ऑर्डेंड डेस्टिनी इज़ फ़ुलफ़िल्ड।

“गुरु के अनुग्रह से ईश्वर मन में बसता है, और व्यक्ति पूर्वनिर्धारित नियति को प्राप्त कर लेता है।”

प्रश्नकर्ता: ग्रेस (अनुग्रह) और प्री-ऑर्डेंड

हालत खराब, पर मन शांत - कैसे? || आचार्य प्रशांत, आर.डी.वी.वी. के साथ (2023)
हालत खराब, पर मन शांत - कैसे? || आचार्य प्रशांत, आर.डी.वी.वी. के साथ (2023)
9 min

प्रश्नकर्ता: मेरा नाम पूनम साहू है और मै जर्नलिज़्म डिपार्टमेंट (पत्रकारिता विभाग) से विद्यार्थी हूँ। मेरा सवाल आपसे ये है कि विपरीत परिस्थितियों में ख़ुद के मन को किस तरह शान्त रखें।

आचार्य प्रशांत: परिस्थिति तो परिस्थिति है न?

प्र: वो जो विपरीत परिस्थितियाँ है; जैसे कि कोई हमारा काम

भारत, पाकिस्तान, और बँटा हुआ मन || आचार्य प्रशांत (2023)
भारत, पाकिस्तान, और बँटा हुआ मन || आचार्य प्रशांत (2023)
28 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते, आचार्य जी। मैं अपना प्रश्न एक उदाहरण से प्रारम्भ करूँगा। जैसे आज़ादी के तुरन्त बाद भारत और पाकिस्तान जो साथ में देश थे वो अलग हो गये। और उसके कुछ समय तक भी पाकिस्तान नहीं चल पाया और उसमें से भी पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों अलग हो गए।

कैसे पता चले कि साधक सही राह पर है? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
कैसे पता चले कि साधक सही राह पर है? || आचार्य प्रशांत, हंस गीता पर (2020)
5 min

अहंकारकृतं बन्धमात्मनोअर्थ‌ विपर्ययम्। विद्वान निर्विद्घ संसारचिन्तां तुर्ये स्थितस्त्यजेत्।। ~हंस गीता (श्लोक-२९)

आचार्य प्रशांत: हंस गीता, श्लोक क्रमांक उन्तीस, यह बन्धन अहंकार की ही रचना है और यही आत्मा के परिपूर्णतम सत्य, अखण्डज्ञान और परमानन्दस्वरूप को छिपा देता है। इस बात को सुनकर विरक्त हो जाए और अपने तीन अवस्थाओं में

क्या प्रबोध (enlightenment) निजी अनुभव की कोई घटना होती है? || आचार्य प्रशांत (2020)
क्या प्रबोध (enlightenment) निजी अनुभव की कोई घटना होती है? || आचार्य प्रशांत (2020)
7 min

प्रश्नकर्ता: जब आपसे लोग पूछते हैं कि क्या आप एनलाइटेंड (प्रबुद्ध) हैं, तो आप बार-बार एक ही जवाब देते हैं, न हूँ, न कभी होने वाला हूँ। कहीं ये वही बात तो नहीं कि हमें किसी चीज़ का अनुभव न हो, तो हम कह दें कि वैसी कोई चीज़ होती

अपमान बुरा क्यों लगता है? || आचार्य प्रशांत (2019)
अपमान बुरा क्यों लगता है? || आचार्य प्रशांत (2019)
9 min

प्रश्नकर्ता: मन दूसरों से मान की अपेक्षा रखता है, लेकिन अपमान होता है तो बुरा तो लग ही जाता है।

आचार्य प्रशांत: जानते हो ये मान-अपमान क्या चीज़ है? पूरी तरह प्राकृतिक है बस, और कुछ नहीं है। और हमने कहा था प्रकृति बस दो-चार चीज़ें ही चाहती है, क्या?

अधूरेपन में आनंद || आचार्य प्रशांत (2014)
अधूरेपन में आनंद || आचार्य प्रशांत (2014)
14 min

प्रश्नकर्ता: जब मैं कैम्प में था, तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मैंने दुनिया को ख़ुद पर हावी नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही वापस आया बीमार पड़ गया, तो ऐसा लगा कि मन पर दुनिया फिर से हावी हो रही है। काफ़ी सारे ढर्रे टूट चुके हैं, लेकिन

संगति का प्रभाव तो होगा ही || आचार्य प्रशांत (2019)
संगति का प्रभाव तो होगा ही || आचार्य प्रशांत (2019)
14 min

प्रश्नकर्ता: गुरुजी, जब भी हमारे गुरुभाई, गुरुबन्दगी की बात करते हैं तो हमें ऐसा लगता है कि हम भी पूरी बन्दगी कर सकते हैं। अकेले बैठकर भी ऐसा लगता है कि उनकी संगति में ही हूँ, पर जब अकेले नितनेम या गुरुबन्दगी करने बैठने लगते हैं, तो कठिनाई महसूस होती