वर्तमान प्रोटेस्ट "जेन ज़ी" का आंदोलन नहीं था, यह एक आइडियोलॉजिकल मामला था, जिसमें हर उम्र के लोग शामिल थे, न कि किसी ख़ास पीढ़ी के। असली संकट टेक्नोलॉजी, नीति या नेतृत्व का नहीं, बल्कि हर इंसान के भीतर के अंधेरे — डर, बेईमानी और अनजाने में जी रही इच्छाओं का है। गाली-गलौज, भीड़ का नशा और अंधा वोट, ये सब उसी भीतरी डर के लक्षण हैं। असली साहस बाहर शोर मचाने में नहीं, अपने भीतर की सच्चाई स्वीकारने में है। जब तक जनसाधारण की "सेल्फ एजुकेशन" न हो, सतही क्रांतियाँ कुछ नहीं बदलेंगी।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी प्रोटेस्ट का जो पूरा नेचर ही है, कुछ उस टाइप का उसका इमोशनल एक रजिस्टर है। इसमें एक यह भी हो रहा है कि यह वायरल इसीलिए है क्योंकि इट इज़ अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ गाली प्लस ह्यूमर। तो जो मीम का फ़ॉर्मेट है, वो थोड़ा मॉकरी का, मिमिक्री का और सर्किकल है। *एंड दैट कॉम्बिनेशन सीम्स टू वर्क फ़ॉर द जेन ज़ी एंड दैट हैज़ काइंड ऑफ़ बिकम देयर पर्सनालिटी ऑल्सो।
आचार्य प्रशांत: कॉम्बिनेशन वर्क्स फ़ॉर एवरीबडी। इसमें जेन ज़ी जैसा कुछ ख़ास नहीं है। हम जेन ज़ी वैसे बोल रहे हैं जैसे कि कोई एलियन स्पीशीज़ अचानक से उतर आई है। जेन ज़ी माने क्या होता है? तीस साल से कोई भी कम है तो जेन ज़ी है। मोटे तौर पर अगर कोई तीस साल से नीचे का है आज तो वो जेन ज़ी हो गया। आधे तो यहाँ बैठे होंगे, हाथ उठाओ भाई, जेन ज़ी। ये लो, यही है जेन ज़ी। पर हम जेन ज़ी ऐसे बोल रहे हैं जैसे पता नहीं कि एक एलियन स्पेसशिप आया। और उसमें से एकदम ऐसे निकले नए ख़ून के, नए अंदाज़ के, नई पीढ़ी के सिकंदर। कुछ नहीं है जेन ज़ी ही तो थे, ये देखो खड़े तो थे। जेन ज़ी क्या होता है? इंसान है, जैसे हर कोई होता है, इंसान है। उसमें कुछ ख़ास थोड़ी है, ज़िंदगी भर मेरा इन्हीं जेन ज़ी से ही तो पाला पड़ा है। कोई मुझे आ करके बोलेगा, नहीं-नहीं, ये डरते नहीं हैं। ये डरते नहीं हैं? पूरी ज़िंदगी बीत गई मेरी इनसे डर निकालने में। मुझसे ज़्यादा ख़ुशी किसी को न हो अगर पता चले ये डरते नहीं हैं।





