पिंकिया-तोतिया-चिरैया-छोटिया - सबै के ब्याह हुइ गबा || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। हम झारखण्ड से हैं और अभी जस्ट(अभी-अभी) मेरा बी.टेक कंप्लीट(पूरा) हुआ है दो महीने पहले। आपको सुन 2018 से रहे हैं, कुछ-कुछ चीज़ सीखे हैं, जो इम्प्लिमेंट(लागू) भी किये है और बहुत कुछ अभी सीखना भी है।
थोड़ा जिद्दू कृष्णमूर्ति को भी पढ़े हैं, थोड़ा ओशो को भी, ज़्यादा नहीं थोड़ा ही और तो अभी जस्ट(अभी-अभी) मेरा बी.टेक कंप्लीट(पूरा) हुआ है, ठीक है, और हम एक मिडिल क्लास फ़ैमिली (मध्यम वर्गीय परिवार) से बिलॉन्ग (संबंध या सरोकार) करते हैं।
तो मतलब शुरू में तो यही टारगेट(लक्ष्य) था की फाइनैन्शल इंडिपेंडेंट(वित्तीय स्वतंत्र) होना है, क्योंकि एक लोअर मिडल क्लास फ़ैमिली(निम्न मध्यम वर्गीय परिवार) से बिलॉन्ग(संबंध या सरोकार) करते हैं, उसमें भी लड़की, तो सिचूएशन (स्थिति) बहुत ख़राब तो पता था कि अगरफाइनैन्शल इंडिपेंडेंट(वित्तीय स्वतंत्र) नहीं होते है तो, मतलब और बदतर सिचूएशन (स्थिति) में जाएंगे, तो फिर अभी ठीक है अभी छह-नौ महीने से हम एक कंपनी में काम कर रहें है।
मतलब छह महीने इंटर्नशिप(प्रशिक्षण) और दो, तीन महीने से जॉब। तो फिर शुरू में क्या था की जब हम 12th में थे न, तभी से ही पेरेन्ट्स(माता-पिता) का प्रेशर(दबाव) था की शादी करवा देंगे तुम्हारा, ऐसा था। और उसके बाद क्या हुआ? किसी तरह हम ज़िद करके बी.टेक में एडमिशन(दाख़िला) लिए तो और, और उनसे बोले की, उनका कहना था कि तुम करो बी.टेक हम इधर देखते है लड़का तुम्हारे लिए अगर, अगर लड़का चुन लिए तो तुमको बुला लेंगे, शादी करवा देंगे। हम बोले हाँ ठीक है, देख लेंगे। जितना मिल रहा है टाइम(समय) वो लेते हैं, बाकी देखा जाएगा।



