पशु के साथ क्रूरता करके पशुपति तक पहुँचोगे? || आचार्य प्रशांत, केदारनाथ यात्रा पर (2019)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, केदारनाथ की चढ़ाई के दौरान घोड़ों और खच्चरों ऊपर हो रहे अत्याचार को देखकर मेरा मन बहुत ही विचलित हुआ है। यह बात मेरे विचार के परे है कि कैसे कोई किसी प्राणी के साथ ऐसी क्रूरता कर सकता है। कृपया इस विषय पर मार्गदर्शन दें।
आचार्य प्रशांत: एक घोड़ा मरा पड़ा था।
श्रोता: उसको देख कर मैं वहीं हिल गयी थी।
आचार्य: उसको देखने के बाद भी अगर कोई घोड़े, खच्चर का प्रयोग कर रहा है, शोषण कर रहा है, तो क्या तीर्थ कर रहा है! आप जिनके यहाँ आये हैं उनका दूसरा नाम है महादेव, पशुपति। वो सब पशुओं के बड़े प्यारे हैं। सब पशुओं के बड़े प्यारे हैं। साँप, नाग तो गले में डाले रहते हैं। एक भी घोड़ा, खच्चर ऐसा नहीं था जिसके शरीर पर ज़ख्म न हों। कौन है ये तीर्थयात्री, कैसा इसका तीर्थ है, बताइए?
तीर्थ माने शांति की ओर बढ़ना। शांति और करुणा साथ-साथ चलते हैं। करुणा नहीं तो कैसी तीर्थ यात्रा? जवान जवान लोग दूसरे इंसानों की पीठ पर चढ़कर आ रहे हैं। मैं वृद्धों की बात समझ सकता हूँ एक बार को। कोई बिल्कुल वृद्ध है, असहाय है या कोई अपंग है, या कोई छोटा बच्चा है, समझा जा सकता है कि वो किसी और के ऊपर चढ़कर आए। ठीक है। पंद्रह साल वाले, बीस साल वाले, पच्चीस साल वाले, पैंतीस साल वाले, ये लोग अगर दूसरे की पीठ पर चढ़कर आ रहे हैं तो ये कौनसी तीर्थयात्रा है?
श्रोता: एक तो मोटे-मोटे लोग, और ऊपर से बैग साथ में!



