जानवर अपनी जैविक प्रवृत्तियों के अनुसार जीते हैं, जबकि मनुष्य के पास विवेक और चुनाव की क्षमता है। इसलिए अपने व्यवहार को सही ठहराने के लिए पशुओं का उदाहरण देना उचित नहीं है। जीवन में महत्वपूर्ण यह है कि हम सचेत होकर निर्णय लें। इसी तरह खेल में सफलता तब मिलती है जब ध्यान खेल पर हो, न कि जीत, प्रशंसा या दूसरों को प्रभावित करने पर। परिणाम की चिंता बढ़ते ही एकाग्रता टूटती है और प्रदर्शन प्रभावित होता है।
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प्रश्नकर्ता: आप बोलते हो कि नॉनवेज नहीं खाना चाहिए, पर जब वाइल्ड एनिमल्स हर्बीवोरस को खाते हैं, तो उनको बुरा नहीं लगता होगा, हर्बीवोरस को?
आचार्य प्रशांत: तुम डॉग नहीं हो न? तुम जैकाल भी नहीं हो, तुम वूल्फ भी नहीं हो। तो वाइल्ड एनिमल हर्बीवोर को, रैबिट को या किसी को भी, उसको खाने दो न।
वो बेचारा तो एनिमल है, उसको तो कुछ समझ ही नहीं, उसको तो नेचर ने जैसा प्रोग्राम करा, बेचारा करेगा। उसके पास कोई चॉइस ही नहीं है। पर तुम तो इंटेलिजेंट हो। तुम्हारे पास चॉइस है न? है न?
कोई बोले कि, “पर शेर भी तो हिरण को खाता है।” अरे, शेर तो नंगा सो जाता है, तुमने कपड़े क्यों पहने हैं? शेर तो ब्रश




