हम जो एनिमल लवर भी बनते हैं, तो आमतौर पर क्या करते हैं, मुझे आसपास जो दिख रहा है, मैं उसका ख़्याल कर लूँगा। तो ये तो तुम्हारा बहुत संयोग से रिश्ता बना न, बोध की बात तो ये है कि मैं देखूँ कि पूरी पृथ्वी पर क्या चल रहा है और उसके लिए काम करूँगा। और बिल्कुल ये हो सकता है कि जितना समय आप चार जानवरों की सेवा में लगा रहे हो, उतना समय अगर आप जानवरों के लिए सही तरीक़े से लगा दो, तो आप 4 हज़ार जानवर बचा दो। तो बताओ, फिर ये चार जानवरों की सेवा करना प्रेम हुआ या हिंसा?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। तो आचार्य जी, मुझे पाँच महीने हो गए, अपनी मदर की डेथ के बाद से मैं आपके साथ जुड़ा हुआ हूँ। और गीता सत्रों से अराउंड दो-ढाई महीने से जुड़ा हूँ।
तो मदर की डेथ के बाद अभी मेरा यही शेड्यूल चल रहा है, अभी मैं दिन भर बस आपकी वीडियोज़ देख रहा हूँ और साथ में बस यही इन्फ़ॉर्मेशन कलेक्ट कर रहा हूँ जितनी कर पा रहा हूँ। तो आज मेरा जो प्रश्न है वो है आत्मस्थ होने के बारे में, मैं एक्चुअली कन्फ़्यूज़्ड हूँ कि आत्मस्थ होना है क्या? क्योंकि अगर हम आत्मस्थ हो रहे हैं इसका मतलब हम किसी चीज़ से अटैचमेंट रख नहीं पा रहे अपनी। तो फिर मैं कन्फ़्यूज़ हूँ कि हम नेचर को, एनवायरमेंट को, जानवरों के प्रति प्रेम, वो चीज़ कैसे मैनेज करें?
मुझे ये चीज़ समझ नहीं आ रही कि हम देशभक्ति ये चीज़ें, आप सभी का बता रहे हो कि देशभक्त होना चाहिए, देश के बारे में जानना चाहिए। तो मैं अपने आप को पा रहा हूँ कि मैं इन चीज़ों से अब जुड़ रहा हूँ, इन्हीं से




