जीवन में कोई श्रीकृष्ण जैसा ही आ जाए, तो बिल्कुल करो शादी, पर ये कोई वजह नहीं है कि 'मैं निकला करती थी, मुझे लड़के छेड़ते थे, तो मैंने शादी कर ली।' यदि कोई छेड़छाड़ करे, तो विरोध करो, मार्शल आर्ट्स सीखो, इतनी मज़बूत बनो कि एक लगाओ अच्छे से। लेकिन इसके बावजूद भी कोई छेड़ के चला गया, तो उसे बहुत भाव मत देना, क्योंकि यह इतनी बड़ी बात नहीं कि इसकी वजह से ज़िन्दगी के निर्णय बदल दिए जाएँ।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आज रास्ते में जब मैं आ रही थी, तो यूट्यूब पर देखते टाइम कुछ ऐसा ही सिनेरियो था, कि एक लड़की का रेप हुआ और वो लड़की पढ़ने जा रही थी। तीन लड़कियाँ थीं, उनमें से एक लड़की को कुछ लोगों ने गाड़ी में बिठा लिया और कहीं दूर ले गए, एंड शी वाज़ किल्ड ऑल्सो। एंड द क्रिमिनल्स वर नॉट प्रॉसिक्यूटेड बिकॉज़ एविडेंस सही नहीं था। और पुलिस ने भी उस एविडेंस को टैम्पर कर दिया था जिस वजह से वो बरी हो गए, और फिर वो केस आगे नहीं बढ़ पाया। तो मतलब, ये एक ना बहुत ही इनसिक्योर्ड सी फीलिंग लाता है हमारे अंदर — ऐज़ अ वुमन।
तो मेरे दिमाग में पहली चीज़ ये आ रही थी — या तो मैं बॉक्सिंग सीख लेती हूँ और एकदम मस्कुलर हो जाती हूँ कि कोई मेरे आगे आए, तो मैं मैनहैंडल कर सकूँ इन लोगों को। या मैं एक लाइसेंस्ड गन ले लेती हूँ टू प्रोटेक्ट मायसेल्फ़। आई विल कैरी इट इन माय पर्स। क्योंकि सिनैरियो तो ऐसे बहुत आएँगे, जहाँ पे मैं अकेली होती हूँ रास्ते में, आई ऐम विद अ कैब ड्राइवर — मेबी माय क्वेश्चन इज़ वेग, बट सर, इसका सोल्यूशन क्या है? ऐज़ अ वूमन, आर दीज़ द टू ऑप्शन्स व्हिच आर कमिंग टू माय माइंड?




