प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आज आपको पहली बार प्रत्यक्ष रूप से सुन रहा हूँ और आपका बहुत आभार है। पूरा जीवन कोई कमी नहीं थी, लेकिन फिर भी बहुत बेचैनी में निकला है। और अभी एक-दो साल से आपको सुनने लगा हूँ तो काफ़ी कुछ समझ आता है, ऐसा नहीं है कि नहीं आता है।
और बहुत कुछ ठीक भी हुआ है लेकिन एक जो दी एंड (समाप्ति) होना चाहिए, दी एंड (समाप्ति) नहीं हो रहा है। और अभी जो पूछना चाहता हूँ उसका सब समाधान यूटयूब पर अवेलेबल (मौजूद) है। जो-जो कमियाँ हैं अब अगर उस पर सर्च (ढूँढना) मार दूँ तो आ जाएगा, इसलिए अब दोबारा पूछने का मतलब नहीं है। ख़ाली एक आपसे एक आशीर्वाद चाहिए कि दी एंड (समाप्ति) हो जाए।
आचार्य प्रशांत: मेरा दी एंड (समाप्ति) तो हो नहीं रहा, आपका क्या...(हँसते हुए)।
प्र: मेरा शुभ रूप से एंड (अंत) होना चाहिए, आप बहुत ही विशाल हैं।
आचार्य: जैसे आप कह रहे हैं न कि पता तो है ही कि सब जवाब पहले ही मैंने यूटयूब पर डाल रखे हैं फिर भी कुछ पूछना है, वही इस संसार की स्थिति है। हम सब जानते हैं कि समाधान क्या है और कहाँ है लेकिन फिर भी हम बचे रहना चाहते हैं। तो दी एंड (समाप्ति) कैसे होगा?
और जबतक आपको पूछना है तबतक मुझे मौजूद रहना है जवाब देने के लिए। तो मेरा दी एंड




