गीता बिल्कुल आज की है। जैसे श्रीकृष्ण ने आपके लिए आज ही कही हो। बहुत-बहुत मॉडर्न है गीता, क्योंकि मनुष्य के अंतस की पुकार है गीता। यही वो असली धर्म है, जिसकी चाहत हर इंसान को है, और यही एकमात्र धर्म है, जिसका जेन ज़ी और उसके बाद की जेनेरेशन पालन कर पाएँगे, क्योंकि धीरे-धीरे जो धर्म, धारणा और अंधविश्वास बनकर रह गया है, वह विलुप्त हो जाएगा।
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प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी। मेरा एक कॉलेज का जूनियर है, जिससे जब भी बात होती है तो रिलिजन का टॉपिक हमेशा निकल के आता है। और जैसे ही रिलिजन का टॉपिक आता है, धर्म का टॉपिक आता है, तो वो छिटक जाता है। वो कहता है कि इसमें कट्टरता है, अप्रेशन है, कास्टिज़्म, हिंसा सब वॉर हो रही है रिलिजन के नाम पर, तो ये किसी काम का नहीं है।
और यही सेम सेंटिमेंट मैंने आज के जेन ज़ी में भी देखा है, जेन ज़ी भी भागना चाह रहा है रिलिजन से। उसने ऐसा डिस्टॉर्टेड रूप देख लिया रिलिजन का कि वो रिलिजन को बिल्कुल भी ऐक्सेप्ट नहीं करना चाहता। तो ऐसे में मुझे समझ नहीं आता कि मुझे उनसे क्या बोलना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: तुमने अभी जो सवाल में बोला, यही बात उनसे बोलनी चाहिए ना। आपने जो बोला, वो आप बोल रहे हो




