एक बार में किसी को मार दो, तो दिखाई पड़ता है — ‘हत्या हो गई,’ पर धीरे-धीरे करके किसी को कुपोषण से मार दो, तो थोड़ी पता चलेगा। भारत में आधे से ज़्यादा महिलाएँ एनीमिया, आयरन डेफिशिएंसी से पीड़ित हैं। उनको ठीक से खाने को ही नहीं दे रहे। हिंसा लगातार हो रही है, लेकिन हम चौंकते सिर्फ़ तब हैं, जब बलात्कार या हत्या हो जाती है। ये सब प्रेम की कमी है और कुछ नहीं। हमें बुनियाद से ही कुछ चीज़ें बदलनी पड़ेंगी।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आचार्य जी, आपने बताया जो फीमेल इन्फ़ैंटिसाइड और फीटिसाइड के बारे में... एक और बहुत ही गंभीर-गंभीर मुद्दा है वो ये है कि जब सरकारी अस्पतालों में — ये बहुत ही आम चीज़ है देखने को मिलती है कि बहुत ही साधारण बीमारियों के लिए भी जो लापरवाही एक लड़की की तरफ़ की जाती है माँ-बाप के द्वारा, वो मतलब किसी भी लड़के की तरफ़ नहीं किया जाता। जैसे….
आचार्य प्रशांत: अपना परिचय दे दीजिए ताकि जनता समझ जाए कि एक डॉक्टर बोल रहा है, वरना आपकी बात की कोई प्रामाणिकता नहीं रह जाती।
प्रश्नकर्ता: मैं सरकारी अस्पताल में काफ़ी दिनों तक कार्यरत था, बच्चों के विभाग में कार्यरत था। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था, तो ये बहुत ही एक आम सा सिनैरियो होता था कि बहुत ही जो साधारण बीमारियाँ होती हैं, टीबी जैसी बीमारियाँ जिसका इलाज बहुत आसानी से संभव है, और उसमें एक जो सबसे आम तौर पे देखा जाता था कि उसके लिए भी इतनी लापरवाही होती थी, अगर बच्ची बीमार है तो।




