वक्ता: जहाँ मोटिवेशन है, वहां डीमोटिवेशन भी आएगा| मोटिवेशन शब्द ही तभी अर्थपूर्ण है जब पहले डीमोटिवेटीड हो| जो डीमोटिवेटीड है उसी को ही तो मोटिवेशन चाहिए न| मतलब मोटिवेशन तुम सबको चाहिए| मतलब तुम सबने पक्का ही कर लिया है कि हम पहले डीमोटिवेटीड होंगे| ये कहाँ की समझदारी है? मोटिवेट कौन होगा? जो पहले मोटिवेटीड नहीं है, उसी को तो कोई आगे मोटिवेट करेगा| या कुछ पढ़ेगा तब मोटिवेट होगा? तो तुम सब मोटिवेट होना चाहते हो और कहते हो कि डीमोटिवेशन समस्या है| डीमोटिवेशन समस्या है, तो मोटिवेशन कैसे आएगा? डीमोटिवेशन तो तुम्हारे लिए वरदान है क्योंकि तुम्हें मोटिवेशन चाहिए|
श्रोता: सर अगर हम किसी प्रश्न का जवाब देते हैं और सामने वाला इंसान हमें डीमोरलाईस कर देता है, तो जो मेरा है, जो मैंने बोला है, वो कैसे हमें डीमोरलाईस कर देता है?
वक्ता: उसको पूरा हक है करने का जो भी वो कर रहा है| सवाल ये नहीं है कि वो क्या कर रहा है, सवाल ये है कि, तुम उस पर इतना निर्भर क्यों कर रही हो?
श्रोता: अहंकार आ गया|
वक्ता: बात पकड़ो, करीब-करीब बात यही है| आत्म-सम्मान को ठेस पहुँच गयी|
श्रोता: सर किसे ठेस पहुँच गयी?
श्रोता:




