बच्चे पैदा करें? यदि हाँ, तो कितने? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, मेरा नाम प्रतीक है महाराष्ट्र से हूँ। सर, जैसे हम देखते हैं कि प्रकृति हमसे प्रकृति को आगे बढ़ाना चाहती है। वो सब जानवर वगैरह, पेड़-पौधे इनसे रिप्रोडयूस (पुनरुत्पादन) करती है लेकिन जब हम देखेंगे तो हिन्दू धर्म वगैरह नहीं, मानव धर्म की तरह देखेंगे। जैसे हम इंसान हैं तो हमारे पास एक विकल्प है, हम वो आगे बढ़ाएँ या न बढाएँ तो जैसे सनातन धर्म से हमको समझ में आया कि ये दायित्व नहीं है कि हम आगे पुनरुत्पादन करें।
तो एक पैमाना हो सकता है कि चेतना का स्तर का कि वैसे तो हम सभी शादी वगैरह में अटके पड़े हैं, अगर आप नहीं मिले होते तो हम फिर शादी कर लिये होते और पुनरुत्पादन कर लिये होते तो मुझे कहना है कि हमें पुनरुत्पादन करना ही नहीं चाहिए। अगर जैसे कि आपने बोला कि आज के दौर में वातावरण ख़राब है इसके लिए कम-से-कम एक ही करो तो सब वातावरण अच्छा होता, सब परिस्थिति ठीक होती।
अब सन्देह भी आता है कि वैसे तो सब इंसान ख़त्म हो जाएँगे फिर लेकिन अब मैं बताऊँ तो मुझे तो वो सबसे अच्छी परिस्थिति लगती है क्योंकि प्रकृति पूर्ण है, समस्या हमारे कारण है तो हम बस जिएँ। अब हमें इस पुनरुत्पादन को आगे बढ़ाना चाहिए या रोक देना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: ये किसके लिए पूछ रहे हैं पूरी दुनिया के लिए पूछ रहे हो?
प्र: सर क्योंकि मेरे लिए तो ये मेरा पर्सनल (व्यक्तिगत) है क्योंकि जैसे जब ये प्रतिप्रश्न आया न
आचार्य: पर्सनली (व्यक्तिगत रूप से) तो तुम पूरी मानवता को आगे बढ़ा भी नहीं रहे न पर्सनली कितने पैदा कर सकते हो?



