हम सोचते हैं, आदमी कितना भी बुरा हो, अपने घर वालों के लिए तो अच्छा ही होता है — ऐसा नहीं होता। जो दुनिया के लिए बुरा है, वही घर पर फिर चाइल्ड मॉलेस्टेशन भी करता है। इसीलिए बच्चों का सबसे ज़्यादा शोषण परिवार के भीतर ही होता है। आज ऑनलाइन अब्यूज़, ऑनलाइन कचरा आपके घर की दीवारें बिल्कुल लाँघ करके आपके घर आ रहा है। सब के विरुद्ध एक ही सुरक्षा है — अध्यात्म। बच्चे ने अगर उपनिषदों सरीखे कुछ मूलभूत सवाल पूछने सीख लिए, तो फिर कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। सबसे पहले तो मैं आपको बहुत ज़्यादा थैंक्यू बोलना चाहती हूँ। ढाई साल से मेरी डिप्रेशन की दवाइयाँ ख़त्म हो चुकी हैं। मैं नहीं ले रही हूँ जब से आपसे कनेक्ट हुई हूँ। शुरुआत में आपकी बात नहीं समझ आती थी, तो कई बार मैंने आपके चैनल को ब्लॉक भी किया और संस्था के जो स्वयंसेवक मुझे वीडियो और संदेश भेजते थे उनका नंबर भी ब्लॉक किया था। लेकिन धीरे-धीरे यात्रा रही और गिरते-पड़ते चीज़ें स्पष्ट हुईं और आज ये परिणाम है कि चीज़ें भी सही हैं, समझ आनी शुरू हुई हैं, स्पष्टता शुरू हुई है।
बचपन में छ:-सात साल की थी तो चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज़(बाल यौन शोषण) हुआ मेरे साथ। और फिर धीरे-धीरे चीज़ें खराब होती गईं। माता-पिता को बोलने की भी हिम्मत नहीं थी, क्योंकि कुछ समझ ही नहीं था उस समय पर, बताया ही नहीं जाता था कि ऐसा कुछ होता भी है। और माता-पिता को लगता था कि सब सही तो है। और वो भी, मेरी बुआ के बेटे ने ये सब चीज़ें कीं।
तो जब उन्हें बताया तो वो ख़ुद हैरान हो गईं और बोली, 'हमें तो लगता था कि घर में सब बहन-भाई होते हैं, ऐसा तुम्हारे साथ बहुत समय से हो रहा था।’ लेकिन ठीक है। उन्होंने अपने तरीके से सब चीज़ें सुलझाईं। लेकिन मेरे भीतर एक गुस्सा, बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन जारी रहा। मानसिक तौर पर सही नहीं थी तो इसके काफ़ी दुष्प्रभाव झेलने पड़े। बिना सोचे समझे अधिक भोजन करना, प्रेम की कमी महसूस करना और फिर किशोरावस्था की सारी समस्याएँ आनी शुरू हुईं। मैं कभी-कभी इतना परेशान हो जाती थी कि बस घर से बैग लेकर निकल जाती थी। घर में सब परेशान हो चुके थे। मेरी मम्मी रोती थीं कि क्या है, क्या करें।




