आप साँस ले-लेके मर रहे हो। साँस लेके जिया जाता है। आपको मजबूर किया गया है कि आप साँस लेके मर जाओ, और आपके भीतर क्रोध नहीं उठ रहा। आप खड़े होकर के गर्जना नहीं कर रहे कि ये कैसे हो रहा है? कौन ज़िम्मेदार है? दुनिया की जो सबसे प्रदूषित राजधानी है, वो दिल्ली है। यह प्रदूषण विकास से नहीं हो रहा है। यह आंतरिक दूषण है, जो बाहरी प्रदूषण के रूप में दिखाई दे रहा है। छोटी सी बात ये है, कि इट ऑल स्टार्ट्स विदइन। और जो चीज भीतर से शुरू होनी है, आप बाहर, बाहर, उसमें लगे हुए हो। उससे क्या हो जाएगा?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: 100, 200, 300, 400, 500, 1000; ये केवल संख्या नहीं हैं, ये मानक है कि आपकी हवा में कितना ज़हर घुल चुका है। एक विशालकाय हाथी आपके लिविंग रूम में आकर बैठ गया है और आप चुटकुले सुनने में मग्न हैं। प्रदूषण की समस्या पर जब बात होती है तो उसे बड़ा सेकेंडरी इशू मान लिया जाता है। जब तक कोई आपदा नहीं आती, जब तक चीज़ें घर तक चलकर नहीं आ जाती, और बहुत सारे केसेज़ में तो घर तक चलकर आने के बाद भी उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, और ये एक एटीट्यूड की तरह हो गया है।
बहुत से सवाल ये एटीट्यूड उठाता है और इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए आज हमारे साथ मौजूद हैं, आचार्य प्रशांत। आचार्य प्रशांत, बहुत-बहुत स्वागत है आपका एनडीटीवी के इस ख़ास प्रोग्राम में। आप एक दार्शनिक हैं, बेस्ट सेलिंग ऑथर हैं, गीता और वेदांत की टीचिंग्स को जनमानस तक फैला रहे हैं।
आचार्य जी, आज जब हम इस एपिसोड को शूट कर रहे हैं, वर्ल्ड एनवायरमेंट डे है। आपको




