
Patience is not about accommodation, adjustment, or tolerance. The patience we know is suffering. Real patience is timelessness—where you don't even feel time. Like when you're deeply immersed in a book in the late night, and suddenly it’s dawn with birds chirping—that is patience. Real patience is love, where time simply disappears.



ये खेल ऐसा है जिसमें ये नहीं देखा जाता कि किसने अंक ज़्यादा बनाये, इसमें ये देखा जाता है कि अन्त तक डटा कौन रहा, आख़िरी घड़ी तक खड़ा कौन रहा। इसमें बात ये नहीं है कि कौन कितना तेज़ दौड़ा, कहाँ तक पहुँच गया, इसमें बस बात ये है कि कौन मैदान छोड़कर भाग नहीं गया। जो मैदान छोड़कर नहीं भागा, वो जीत गया। ये नियम है इस खेल का। इसमें हार सिर्फ़ एक तरीक़े से होती है कि तुम मैदान छोड़ दो, *नॉक आउट* (पराजित) अपनेआप को घोषित कर दो कि भैया मेरा हो गया!

I tell everybody that small defeats are inevitable. You will have them. Let them not mean too much. If you are too disturbed by small defeats, you have had it; you won’t stay put for long. You would be so embarrassed and so ashamed of yourself that you will quit.

If you are in a railway coach, and that too an enclosed cabin with two fellow passengers, and it’s just a journey, let’s say, ten hours long, and those two guys are constantly squabbling, what would it do to you? If you are very patient, you will try to sleep.




प्रश्नकर्ता: मरने के बजाय अभी इसी क्षण जीवन में ही मुक्ति मिल सकेगी।
आचार्य प्रशांत: सिर्फ़ जीवन में। तुलना भी नहीं है। तुलना दो इकाइयों के बीच में की जाती है न, दूसरी इकाई है ही नहीं। तो मुक्ति है तो इसी जीवन में है, और इस जीवन में कल



प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मैं अभी बहुत दबाव में हूँ। पिता जी को दिल का दौरा पड़ा था, उनको लेकर अस्पताल पहुँचा और आगे का इलाज करवाया। पर अस्पताल पहुँचकर मैं बहुत हिल गया। एक साल से मैं आपको सुन रहा हूँ। हम आपसे सीखते हैं कि हम असंग हैं,

किसी की कदर तुम कर रहे हो किसी स्वार्थ की ख़ातिर, ठीक? इसको कहते हैं भाव देना। तुम उसे भाव दिए जा रहे हो, भाव दिए जा रहे हो और वो और ऐंठता जा रहा है, ऐंठता जा रहा है। एक बिंदु तो आता है जब तुम कहते हो, “धत्त

प्रश्न: आचार्य जी, प्रणाम। जब कभी-कभी मुझे लगता है कि कोई ग़लत कर रहा है या बोल रहा है, तो मैं उन्हें रोक नहीं पाती। ऐसा लगता है कि बोलूँगी तो उन्हें बुरा लगेगा, या उनको तक़लीफ़ होगी। उनकी बात पर बस हँस कर चली आती हूँ।
देने वाले ने तुम्हें जो भी कुछ दिया है वो सहजता में ही दे दिया है और जो तुम्हें सहज न मिल रहा हो समझ लो कि वो तुम्हारे लिए है नहीं। कबीर साहब कह रहें हैं कि जो भी कुछ सहज मिल रहा हो, वही मीठा है; और जहाँ कहीं खींचा-तानी है, ज़ोर-ज़बर्दस्ती है, वो नहीं है तुम्हारे लिए। उसकी कोशिश व्यर्थ मत करो।
Do not use your life as a waiting room. Do not wait even a second for things that merely promise but won’t deliver, as it's in the future which is unseen. Having seen that what you hope and expect will never materialize, do not wait another moment. Drop what is false. Don’t be kind or liberal; have no patience with falseness.
अयति: श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानस:। अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति।।६.३७।।
अर्जुन बोले — हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किन्तु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात भगवत्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस…
You are doing the right thing but not finding validation of it from your peers. So, in spite of doing the right thing and living rightly, or at least beginning to live rightly, you feel as if something deeply wrong is happening with you. It’s a bad situation.
Change your…
Question (Q): Sir, you always talk of filling life with the highest work possible. I want to know what exactly is that highest work you repeatedly refer to?
Acharya Prashant(AP): We know of what is not high, right? When we are talking of filling our lives with the highest possible,…
प्रश्नकर्ता: जब वो बातें बोलते हैं और कोई नहीं मानता, तो फिर उन्हें कोई गुस्सा या कोई नफ़रत नहीं होती है और उसके लिए आपने कहा था क्योंकि वह अपनेआप में सुरक्षित है। ये बात मुझे समझ नहीं आयी क्योंकि मेरे साथ ऐसा ही होता है। मैं बातें बताती हूॅं…
आचार्य प्रशांत: तिरसठवाँ श्लोक उद्धृत किया है, पिंगलागीता से। भीष्म कहते हैं, युधिष्ठिर से - “राजन्! ब्राह्मण द्वारा कहे गए इन युक्तियुक्त वचनों से राजा सेनजित् का चित्त स्थिर हो गया। वे शोक छोड़कर सुखी हो गए और प्रसन्नतापूर्वक रहने लगे।”
तो कह रहे हैं प्रश्नकर्ता कि यहाँ तो ऐसा…
प्रश्नकर्त्ता: आचार्य जी, प्रणाम। अच्छे श्रोता कैसे बन सकते हैं? मुझे बीच-बीच में टोकने की आदत है जैसे कि मैं बोल रहा हूँ, जैसे कि कोई बोल रहा होता है तो कई बार उसका जवाब आता है मुझे फिर मैं बोलना शुरू कर देता हूँ।
आचार्य प्रशांत: जब बहुत मन…
आपको जब सुनता…
क्या ऐसा करना…
![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)
आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग है।
आचार्य प्रशांत के यूं तो सोशल मीडिया इत्यादि पर तीन करोड़ से अधिक फॉलोवर और तीस करोड़ से अधिक श्रोता हैं, परंतु गीता कम्यूनिटी कुछ अलग ही बात है। इसमें मात्र वे गंभीर साधक सम्मिलित हैं जो…

Especially in the modern world, unfortunately, a degree of constant anxiety has become an almost normalized state for us. A large portion of our mental health problems as a collective is very much about anxiety and fear. Burn-outs, career pressures, problems with self-esteem, fear of others, stress about studies etc.—all…

Spirituality is about belonging to existence. Not belonging to a narrow household, or caste or ideology. All these are boundaries. So, wherever there are boundaries, there is violence. Wherever there are boundaries, there is also the fear of being small, powerless, limited. The really non-violent one is at home, everywhere and in every situation. Non-violence is not about following duties. Non-violence is an action in clarity and love. That alone is non-violence.

First of all, we have to realize what our life is like. You know, I can’t change something without firstly understanding its processes and its actuality. I must know what this thing called my life is. We keep living without knowing a thing about life. And we’re blinded by names and identities.

प्रश्नकर्ता: आत्मा और अहंकार ये सारी इंटेलेक्चुअल लेवल (बौद्धिक स्तर) पर समझ में आती हैं। लेकिन अनुभव के स्तर पर कहीं-न-कहीं हम इनको एक तरीक़े से मान रहे हैं, जान नहीं पा रहे अन्दर से कि हम आत्मा हैं। ये परिवर्तन कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं समझना होता, जीना…

Questioner: Namskar Acharya ji. Pardon me for not remembering exactly but in one of the shivirs where we had read ‘Gospel of Sri Ramakrishna’ to come to terms with this expression called ‘Adhikar Bhed.’
So therein Ramakrishna was saying that, “now in modern times there cannot be any Adhikar Bhed,…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी! मेरे दो प्रश्न हैं। पहला प्रश्न है कि टिपिकली (आमतौर पर) ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएँ होती हैं, वो थोड़ा प्राकृतिक रूप से केयर गिवर्स (देखभाल कर्ता),इमोशनल (भावुक), ह्वेरैज़ मेन (जबकि पुरुष) वो थोड़ा,लॉजिकल (तार्किक), गो-गेटर्स (उद्योगी), ऐम्बिशस (महत्वाकांक्षी) होते हैं।
जब…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते सर, मेरा प्रश्न यह है कि हम अपने बच्चों को सत्य से कैसे अवगत कराएँ।
आचार्य प्रशांत: सत्य कुछ होता ही नहीं है, उससे कैसे अवगत कराएँगे? झूठ से अवगत कराया जाता है। सच रोशनी है। सच क्या है? रोशनी है, है न? उस रोशनी में वो सब…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम! मेरा सवाल मेरे बच्चों के बारे में था, आचार्य जी। मेरे नौ साल के और ग्यारह साल के दो बच्चे हैं लेकिन उनका लगाव आध्यात्मिक साहित्य में नहीं हो पा रहा है। वो लोग पंजाबी रैपिंग सॉन्ग सुनते हैं; बॉलीवुड के आइटम सॉन्ग सुनते हैंl उसमें…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, जो सोसाइटी (समाज) के द्वारा हमारे ऊपर कंडीशनिंग (अनुकूलन) करी गयी है, गलत मूल्यों को हमारे अंदर बैठा दिया गया है। लेकिन मुझे एक चीज़ समझ में नहीं आती है कि यह सोशल (सामाजिक) कंडीशनिंग इतनी बुरी तरह कैसे हम पर हावी होती चली गयी? अगर…

प्रश्नकर्ता: अगले प्रश्नकर्ता आपके साथ गोवा शिविर में भी थे और वहीं से ही वे उद्धृत करते हैं। आपने कहा था, ‘आदमी वास्तव में जान जाए उनके ऊपर कौन है। तो आगे लिखते हैं कि आचार्य जी, इस बात को मैं कैसे समझूँ और जान पाऊँ कि ज़िन्दगी निजी भोग…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं हंसराज कॉलेज का छात्र हूँ, कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेन्ट (संगणक विज्ञान विभाग) से। मेरे मन में एक प्रश्न है, जहाँ पर मैं दुविधा से भरा हुआ हूँ, कि मेरा इस बार अन्तिम वर्ष है और मैं कॉलेज से पास आउट हो (निकल) जाऊँगा। तो मेरी फैमिली…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरे इस जीवन के अभी तक के पड़ाव में, मैं बहुत सारे बंधनों से अटूट हूँ, जुड़ा हुआ हूँ, अभी तक जकड़ा भी हुआ हूँ। मेरा प्रश्न सांसारिक रूप से सम्बन्धित है।
मेरा बैंगलौर आने का प्रयोजन था कि मेरे बच्चे का एजुकेशन (शिक्षा) अच्छा हो। मैं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, स्वधर्म क्या है? क्या स्वधर्म का पालन करते हुए आजीविका चलायी जा सकती है?
आचार्य प्रशांत: स्वधर्म का कोई सम्बन्ध आपके रोटी-पानी के जुगाड़ से नहीं है, कि ये ऑक्युपेशन (व्यवसाय) कि वो ऑक्युपेशन। आप जिसको वर्क (काम) बोलते हैं, वो और क्या होता है? आजीविका का…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, हाल ही में मैंने अपने आदर्श स्टीव जॉब्स और विराट कोहली द्वारा सुझाई गयी लोकप्रिय किताब ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ पढ़ी, तो जीवन का अलग ही आयाम खुल गया।
उस किताब के लेखक और उनके गुरु ने, न केवल अपने पूर्व जन्मों के बारे में विस्तार से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मेरे मन में जो है सैक्स (यौन क्रिया) से सम्बन्धित बहुत विचार आते हैं तो उन्हें कैसे कम या नियन्त्रित कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: ज़िन्दगी यूँ ही छोटी है, उसमें किसी ऐसे काम के लिए तुम समय कहाँ से निकाल रहे हो, जो तुमको पता है…

Acharya Prashant: Desire means that you are not alright with yourself and you want something else to happen, correct? So, we are anyway not living for ourselves. We are rather living to change ourselves. And are these not two very different things? If you are living for yourself as you…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब हम संघर्ष करते हैं तो वह समय हमें बहुत कुछ सिखाता है, लेकिन फिर हम उसे कठिन समय क्यों कहते हैं? और जब समय अनुकूल चल रहा हो तो हम कुछ ऐसे काम कर देते हैं जो हमें नहीं करना चाहिए था। मुझे यह समझ नहीं…

Acharya Prashant: The spiritual soldier, the religious warrior has to be extremely intelligent. You could go to the extent of saying that he has to be cunning in the service of Truth; I’m choosing this word with all deliberation.
He has to be cunning in the service of the Truth;…

Vedanta does not talk of a personal past life, the person that you are or I am, we have no past or future life. Rebirth or reincarnation happens at a general, at a macro level, not at a personal level. It’s the “I” tendency that exists and keeps repeating its existence. Read more...

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, आप हमेशा बोलते हैं कि ऊँचे उद्देश्य रखने चाहिए जिससे कि उसमें किसी भी तरीक़े का कोई डेविएशन नहीं होता है। अब ऊँचे उद्देश्य रखने की सामर्थ्य और साहस नहीं मिल पाता है क्योंकि अपनेआप को बहुत जगह मैं बेहोश पाता हूँ। कभी कुछ चीज़े साफ़…

प्रश्नकर्ता: मेरा सवाल फिर से मृत्यु के ऊपर ही है। आम ज़िन्दगी में जीवन के बारे में बोला जाता है कि जीवन आनन्द है या जीवन यह है, पर इसमें मृत्यु की कोई बात नहीं आती। जैसे आध्यात्मिकता में भी आप देखें तो लोगों ने मृत्यु पर ज़्यादा चर्चा नहीं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे कर्म में कोई विश्वास नहीं है, भक्ति में कोई श्रद्धा नहीं है। मुझे धर्म की कोई समझ नहीं है, तो परमात्मा की कृपा मुझ पर होगी या नहीं? परमात्मा से मेरा कभी साक्षात्कार होगा?
आचार्य प्रशांत: तो अभी जैसे भी हो तुम, उससे अगर संतुष्ट ही…

प्रश्नकर्ता: पिछले कुछ दिन से एक सेक्सुअल थॉट (यौन विचार) मन पर छाया रहता है। पॉर्न (अश्लील सामग्री) भी देखने लगा हूँ। जब अध्यात्म से नहीं जुड़ा था, तब भी मन इतना नहीं भागता था उन बातों की तरफ़; अभी एकदम से बहुत ज़्यादा हो गया है। पहले मुझे लगता…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी नमस्कार। आपकी शिक्षाओं की वजह से मेरी निजी ज़िन्दगी में काफ़ी परिवर्तन आया है और एक चीज़ जो मैंने सीखी है वह है वर्तमान क्षण में जीना, जो आपने बहुत दिन पहले शुरुआती दिमाग वाली बात बतायी थी, वह निजी ज़िन्दगी में बहुत अच्छी तरह से काम…

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पांडव। न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन।।
~ श्रीमद्भगवद्गीता, छठा अध्याय, दूसरा श्लोक।
जिसको संन्यास कहते हैं उसको तू योग जान क्योंकि संकल्पों का त्याग न करने वाला कोई भी व्यक्ति योगी नहीं होता।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। मैं संकल्पों के त्याग का तात्पर्य समझना चाहता…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक ही चीज़ का लम्बे समय तक सॉल्यूशन (हल) नहीं मिल पाता। जैसे मान लीजिए कि कोई मानसिक समस्या है, उसमें काफ़ी समय बीत गया और उस पर मनन-मंथन भी काफ़ी हुआ, लेकिन उससे उबर नहीं पाये हम, उससे…

Acharya Prashant: A quiver full of the best of arrows but no bow, how do you fight the battle of life? Can you imagine the amusing as well as tragic situation of the person who has a great arrow without a bow? He will be sharpening and sharpening his weapon,…

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न बच्चों के परवरिश के संदर्भ में है। जैसे हमेशा से कहा जाता है कि एक बच्चे की परवरिश में उसके माता और पिता दोनों की ही बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। और अगर दोनों में से कोई एक पैरेंट (अभिभावक) भी अगर अनुपस्थित है, तो…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। थोड़ा-सा पहली बार आया हूँ तो थोड़ा-सा बता दूँ कि कैसे आप तक पहुँचा। बहुत ज़ोर से भाग रहा था, मास्टर्स (स्नातकोत्तर) में एडमिशन (प्रवेश) लिया। कैरियर के लिये ही तमाम चीज़ें, आशाएँ और एम्बिशन्स (महत्वाकांक्षा) ढेर सारे। ज़ोर से भाग रहा था, आपकी वीडियो अचानक…